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Thursday, 16 April 2026

ट्रम्प का सनसनीखेज ऐलान: स्पेन के साथ सभी व्यापारिक संबंध खत्म! अब यूरोप और एशिया में अमेरिका से दूरी बढ़ रही, ईरान युद्ध ने बदल दी वैश्विक राजनीति

ट्रम्प का सनसनीखेज ऐलान: स्पेन के साथ सभी व्यापारिक संबंध खत्म! अब यूरोप और एशिया में अमेरिका से दूरी बढ़ रही, ईरान युद्ध ने बदल दी वैश्विक राजनीति-Friday World-April 16,2026 
वाशिंगटन, 16 अप्रैल 2026 – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मार्च 2026 में स्पेन के साथ सभी व्यापारिक संबंध समाप्त करने की धमकी देते हुए कहा, “हम स्पेन के साथ सब कुछ काट देंगे। हम स्पेन से कुछ भी नहीं चाहते।” यह बयान ईरान युद्ध के दौरान स्पेन द्वारा अमेरिकी सैन्य अड्डों के इस्तेमाल पर “नहीं” कहने के बाद आया। अब स्पेन ने जवाब में चीन की ओर रुख कर लिया है। स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने 14 अप्रैल 2026 को बीजिंग पहुंचकर चीन के साथ 19 नए व्यापारिक समझौते साइन किए और कहा कि यूरोप को चीन के साथ मजबूत संबंध बनाने चाहिए।

ईरान युद्ध ने न सिर्फ मध्य पूर्व को हिला दिया, बल्कि अमेरिका की वैश्विक साझेदारियों को भी झटका पहुंचाया है। कई देश अब अमेरिका से दूरी बना रहे हैं और चीन-रूस जैसे विकल्पों की ओर मुड़ रहे हैं। क्या यह अमेरिकी वर्चस्व का अंतिम दौर है या सिर्फ एक अस्थायी तूफान?

 ट्रम्प का गुस्सा: स्पेन ने क्यों ठुकराया अमेरिका?

मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए। इस ऑपरेशन में स्पेन के रोटा और मोरोन सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की अमेरिका ने मांग की। लेकिन स्पेन की सोशलिस्ट सरकार ने साफ मना कर दिया। प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने “नो टू वॉर” का नारा देते हुए कहा कि स्पेनिश धरती का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए नहीं होगा।

ट्रम्प ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ व्हाइट हाउस मीटिंग में उन्होंने कहा, “स्पेन भयानक रहा है। मैंने ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट को स्पेन से सभी डीलिंग्स काटने को कहा है। हम स्पेन के साथ सभी व्यापार खत्म कर देंगे। हम स्पेन से कुछ भी नहीं चाहते।”

ट्रम्प ने स्पेन पर NATO डिफेंस स्पेंडिंग बढ़ाने से इनकार करने और ईरान हमलों में सहयोग न करने का आरोप लगाया। उन्होंने यहां तक कहा कि वह स्पेन पर पूर्ण व्यापारिक प्रतिबंध (एम्बार्गो) लगा सकते हैं। इस धमकी के बाद अमेरिका ने स्पेन से 15 एयरक्राफ्ट (रिफ्यूलिंग टैंकर समेत) हटा लिए।

स्पेन EU का सदस्य है, इसलिए अमेरिका का स्पेन को टारगेट करना पूरे यूरोपीय संघ के साथ टकराव पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प की यह “अमेरिका फर्स्ट” नीति अब सहयोगियों को भी परेशान कर रही है।

 स्पेन का जवाब: चीन पहुंचकर नए रिश्ते मजबूत किए

ट्रम्प की धमकी के कुछ हफ्तों बाद स्पेन ने जवाब दिया। 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री सांचेज़ चीन पहुंचे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने “रणनीतिक संवाद” शुरू करने का ऐलान किया और 19 द्विपक्षीय समझौते साइन किए।

मुख्य समझौते:
- स्पेनिश कृषि उत्पादों (पिस्ता, सूखे अंजीर, पोर्क प्रोटीन आदि) को चीन में ज्यादा बाजार पहुंच।
- परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सहयोग।
- व्यापार घाटे को कम करने के उपाय (स्पेन का चीन के साथ घाटा करीब 50 बिलियन डॉलर का है)।
- टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट और स्वास्थ्य सहयोग।

सांचेज़ ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बिखर रही है। यूरोप और चीन को मिलकर बहुपक्षीयता की रक्षा करनी चाहिए।” चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ भी बैठक में आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया गया। स्पेन अब चीन को रणनीतिक साझेदार मान रहा है, न कि प्रतिद्वंद्वी।

यह दौरा ट्रम्प की धमकी के ठीक बाद हुआ, जो स्पष्ट संदेश है – अगर अमेरिका दबाव बनाएगा तो यूरोपीय देश अन्य विकल्प तलाशेंगे।

 ईरान युद्ध ने अमेरिका का डर क्यों खत्म कर दिया?

ईरान युद्ध (फरवरी-मार्च 2026) ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को तहस-नहस कर दिया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज – जहां विश्व का 20% तेल गुजरता है – बाधित हुआ। तेल की कीमतें आसमान छू गईं। कई देशों ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि बिना सलाह-मशविरे के शुरू किया गया यह युद्ध अब पूरे विश्व को महंगा पड़ रहा है।

ईरान ने अमेरिकी सहयोगी देशों (कतर, यूएई, बहरीन) पर हमले किए। स्पेन जैसे NATO सदस्यों ने साफ कहा – हम आपकी हर लड़ाई में शामिल नहीं होंगे। इससे अमेरिका की “डर” वाली छवि प्रभावित हुई। अब कई देश सोच रहे हैं कि अमेरिका पर अंधा भरोसा करना महंगा साबित हो सकता है।

परिणाम:
- यूरोप में अमेरिका से दूरी – फ्रांस, जर्मनी जैसे देश भी सतर्क हो गए।
- एशिया और लैटिन अमेरिका में चीन की तरफ झुकाव बढ़ा।
- रूस को फायदा – ऊंची तेल कीमतों से उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।

अन्य देश भी अमेरिका से दूरी बना रहे हैं: क्या हो रहा है?

स्पेन अकेला नहीं है। ईरान युद्ध और ट्रम्प की आक्रामक नीतियों के बाद कई संकेत मिल रहे हैं:
- यूरोपीय संघ चीन के साथ व्यापार बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
- कुछ खाड़ी देश (सऊदी, यूएई) भी चीन और रूस से संबंध मजबूत कर रहे हैं।
- ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश NATO के अंदर असंतोष जता रहे हैं।
- विकासशील देशों में “अमेरिका पर निर्भरता कम करो” की आवाज तेज हुई।

ट्रम्प की “टैरिफ और एम्बार्गो” वाली रणनीति अब उल्टा पड़ रही है। जहां पहले सहयोगी अमेरिका के साथ खड़े होते थे, अब वे स्वतंत्र रास्ता चुन रहे हैं।

 वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: तेल संकट और नई साझेदारियां

ईरान युद्ध से तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। इससे मुद्रास्फीति बढ़ी, विकास दर घटी और कई देशों में ईंधन संकट हुआ। स्पेन जैसे देश अब चीन से सस्ते विकल्प और निवेश तलाश रहे हैं।

चीन इस मौके का फायदा उठा रहा है। बीजिंग “बेल्ट एंड रोड” और नई व्यापारिक पहलों के जरिए यूरोप में पैर पसार रहा है। स्पेन के साथ नए समझौते सिर्फ शुरुआत हो सकते हैं।

भारत के लिए सबक: ऊर्जा सुरक्षा और विविधीकरण

भारत, जो रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है और अमेरिका के साथ मजबूत संबंध रखता है, इस स्थिति से सीख सकता है। ईरान युद्ध और ट्रम्प-स्पेन विवाद ने दिखाया कि भू-राजनीति तेजी से बदल रही है। भारत को अपनी ऊर्जा आयात रणनीति को और विविधीकृत करना चाहिए – मध्य पूर्व, रूस, अमेरिका और अफ्रीका सभी स्रोतों पर ध्यान देना जरूरी है।

कूटनीतिक रूप से भारत दोनों तरफ बैलेंस बनाए रख रहा है। लेकिन अगर अमेरिका अपने सहयोगियों पर दबाव बढ़ाता रहा तो नई साझेदारियां उभर सकती हैं।

 निष्कर्ष: क्या अमेरिकी वर्चस्व कमजोर पड़ रहा है?

ट्रम्प का स्पेन पर गुस्सा और स्पेन का चीन की ओर रुख एक बड़े बदलाव का संकेत है। ईरान युद्ध ने साबित कर दिया कि सैन्य शक्ति अकेले काफी नहीं – सहयोगी देशों का समर्थन भी जरूरी है। जब सहयोगी “नहीं” कहते हैं तो अमेरिका को अकेलापन महसूस होता है।

दुनिया अब बहुध्रुवीय हो रही है। चीन आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, यूरोप स्वतंत्र नीति अपनाने लगा है और कई देश अमेरिका से दूरी बना रहे हैं। आने वाले दिनों में ट्रम्प प्रशासन को इस नई वास्तविकता से निपटना होगा।

क्या स्पेन के बाद और देश चीन की ओर मुड़ेंगे? क्या ट्रम्प अपनी धमकियों को अमल में लाएंगे या पीछे हटेंगे? समय बताएगा। लेकिन एक बात साफ है – ईरान युद्ध ने वैश्विक राजनीति की नई किताब खोल दी है, जिसमें अमेरिका अब अकेला हीरो नहीं रह गया।

ऊर्जा, व्यापार और कूटनीति– ये तीनों अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। देशों को स्मार्ट और संतुलित नीतियां अपनानी होंगी, वरना बड़ा नुकसान हो सकता है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 16,2026