Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Friday, 24 April 2026

ट्रंप का ‘नरक’ वाला अपमान: मोदी-ट्रंप की ‘नमस्ते ट्रंप’ वाली दोस्ती अब कहाँ? हिंदुस्तान के स्वाभिमान पर सवाल

ट्रंप का ‘नरक’ वाला अपमान: मोदी-ट्रंप की ‘नमस्ते ट्रंप’ वाली दोस्ती अब कहाँ? हिंदुस्तान के स्वाभिमान पर सवाल-Friday World-April 25,2026 
नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026 – जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2020 में अहमदाबाद में **नमस्ते ट्रंप** कार्यक्रम आयोजित किया, तो उसकी भव्यता की चर्चा पूरे विश्व में हुई। अनुमानित 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च, लाखों लोगों की भीड़, गुजराती महिलाओं द्वारा अपनी पीठ पर मोदी-ट्रंप की पेंटिंग बनवाकर दिखाई गई नुमाइश – सब कुछ दो नेताओं की “अद्भुत दोस्ती” का प्रतीक था। 

उससे पहले 2016 के अमेरिकी चुनाव में मोदी भक्तों ने भारत में जगह-जगह हवन-पूजा पाठ कर ट्रंप की जीत की कामना की। मोदी जी खुद ह्यूस्टन के **हाउडी मोदी** कार्यक्रम में मंच से नारा लगाते दिखे – “अबकी बार ट्रंप सरकार”। ट्रंप ने भी भारतीय-अमेरिकियों को लुभाने के लिए “अबकी बार ट्रंप सरकार” का नारा अपनाया था। 

लेकिन आज वही ट्रंप भारत को “Hellhole” (नरक) कहकर हर भारतीय का अपमान कर रहे हैं। भारतीय प्रवासियों को कदम-कदम पर बेइज्जती का सामना करना पड़ रहा है, मनमाना टैरिफ लगाया जा रहा है, रूस से सस्ता तेल खरीदने पर दबाव बनाया जा रहा है। 

क्या यह वही “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” है जिसकी डुगडुगी बजाई गई थी?

 नमस्ते ट्रंप की भव्यता और गुजराती लड़कियों की ‘नंगी पीठ’ वाली नुमाइश

फरवरी 2020 में अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में आयोजित नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम भारत-अमेरिका संबंधों का सबसे भव्य प्रदर्शन माना गया। कार्यक्रम की तैयारियों में गुजरात की कई महिलाओं ने अपनी पीठ पर मोदी और ट्रंप की पेंटिंग बनवाईं और उसका प्रदर्शन किया। कुछ तस्वीरें वायरल भी हुईं, जिनमें महिलाओं की खुशी साफ झलक रही थी। 

सरकार ने इसे “लोकप्रिय कूटनीति” का उदाहरण बताया। विपक्ष ने इसे फिजूलखर्ची करार दिया। लेकिन उस समय किसी को यह अंदाजा नहीं था कि कुछ साल बाद वही ट्रंप भारत को “नरक” कहेंगे।

ट्रंप की जीत के लिए हवन-पूजा और “अबकी बार ट्रंप सरकार”

2016 में जब ट्रंप अमेरिकी चुनाव लड़ रहे थे, तब भारत में उनके समर्थन में कई जगह हवन-पूजा आयोजित की गईं। मोदी भक्तों ने सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया। ट्रंप की जीत के बाद जश्न मनाया गया। 

2019 के हाउडी मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने खुद कहा था – “हम भारत में ट्रंप से अच्छी तरह जुड़े हुए हैं और उम्मीदवार ट्रंप के शब्द ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ गूंज रहे थे।” यह बयान ट्रंप की 2020 की फिर से चुनावी उम्मीदवारी के संदर्भ में लिया गया।

आज जब ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति हैं, तो वही भारतीय समुदाय उनके कड़े इमिग्रेशन पॉलिसी और डिपोर्टेशन ड्राइव का शिकार बन रहा है। कई भारतीयों को हथकड़ियां पहनाकर मिलिट्री प्लेन से भारत भेजा जा रहा है।

ट्रंप का “Hellhole” वाला बयान – भारत का अपमान

हाल ही में ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें रेडियो होस्ट माइकल सेवेज ने भारत और चीन जैसे देशों को “hellholes” कहा था। ट्रंप के इस रीपोस्ट ने भारत में तूफान खड़ा कर दिया। 

विदेश मंत्रालय ने इसे “uninformed, inappropriate and in poor taste” बताया। भारत ने साफ कहा कि ऐसे बयान भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को नहीं दर्शाते। 

ट्रंप ने बाद में भारत को “great country” और “very good friend” भी कहा, लेकिन नुकसान हो चुका था। सोशल मीडिया पर भारतीयों का गुस्सा फूट पड़ा – “जो देश 200 करोड़ खर्च कर तुम्हारा स्वागत करता है, उसे नरक कहते हो?”

 व्यापार युद्ध और रूसी तेल पर दबाव

ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कई बार टैरिफ बढ़ाए। रूस से सस्ता तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया। बाद में कुछ डील हुई, टैरिफ 50% से घटकर 18% और फिर 10% पर आया, लेकिन शर्त रखी गई – रूसी तेल खरीदना बंद करो, ज्यादा अमेरिकी सामान खरीदो। 

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी तेल महत्वपूर्ण है। फिर भी अमेरिका लगातार दबाव बनाए हुए है। मनमाना टैरिफ और “America First” नीति के तहत भारतीय निर्यात प्रभावित हो रहा है।

हिंदुस्तानी भाइयों की बेइज्जती: डिपोर्टेशन और इमिग्रेशन कड़ाई

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारतीय प्रवासियों पर सख्ती बढ़ी है। H-1B वीजा पर नकेल, वर्कप्लेस रेड, अंडॉक्यूमेंटेड भारतीयों की डिपोर्टेशन। कुछ मामलों में हथकड़ियां और पैरों में बेड़ियां लगाकर भारतीयों को भेजा गया। 

अनुमान है कि हजारों भारतीय इस नीति से प्रभावित हो रहे हैं। गुजरात और पंजाब से आने वाले कई लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 

जो लोग कभी ट्रंप की जीत के लिए पूजा-पाठ करते थे, आज वही लोग अमेरिका में बेइज्जती का सामना कर रहे हैं।

 मजबूत सरकार की कमी?

आलोचक कहते हैं कि अगर भारत में मजबूत और स्वाभिमानी सरकार होती, तो ट्रंप की ऐसी “गुस्ताखी” का माकूल जवाब दिया जा सकता था। कुछ लोग पूछ रहे हैं – क्या सिर्फ “मित्रता” के नाम पर हर अपमान सह लिया जाएगा? 

दूसरी ओर, सरकार के समर्थक तर्क देते हैं कि भारत-अमेरिका संबंध रणनीतिक हैं – क्वाड, इंडो-पैसिफिक, डिफेंस डील, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप। व्यक्तिगत बयानों से ऊपर उठकर बड़े हितों को देखना जरूरी है। 

लेकिन जनता का सवाल जायज है – स्वाभिमान कहाँ गया? जब कोई विदेशी नेता पूरे देश को नरक कहे, तो सिर्फ MEA का बयान काफी नहीं होता। 

निष्कर्ष: दोस्ती या लेन-देन?

नमस्ते ट्रंप की भव्यता, हवन-पूजा, “अबकी बार ट्रंप सरकार” का नारा – सब कुछ एक तरफ। दूसरी तरफ आज का अपमान, टैरिफ, डिपोर्टेशन और “Hellhole” वाला बयान। 

भारत एक उभरती हुई शक्ति है। हमारी अर्थव्यवस्था, हमारी डेमोग्राफी, हमारी सैन्य क्षमता हमें मजबूत बनाती है। लेकिन मजबूती सिर्फ अर्थव्यवस्था में नहीं, स्वाभिमान में भी होती है। 

ट्रंप की नीति “America First” है। भारत को भी “India First” सोचना चाहिए। दोस्ती अच्छी है, लेकिन उसमें सम्मान जरूरी है। अगर दोस्ती में अपमान शामिल हो, तो वह दोस्ती नहीं, लेन-देन बन जाती है। 

समय आ गया है कि भारत अपनी आवाज बुलंद करे। न सिर्फ कूटनीतिक स्तर पर, बल्कि जनता के स्वाभिमान को भी मजबूती से रखे। क्योंकि हर भारतीय का अपमान पूरे राष्ट्र का अपमान है।

जब तक हम खुद अपना सम्मान नहीं करेंगे, कोई और हमें सम्मान नहीं देगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 25,2026