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Wednesday, 22 April 2026

अमेरिका में सनसनीखेज विवाद! पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट ने ट्रंप के ईरान दावों की हवा निकाल दी – “ईरान की सैन्य ताकत अभी भी अक्षुण्ण”

अमेरिका में सनसनीखेज विवाद! पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट ने ट्रंप के ईरान दावों की हवा निकाल दी – “ईरान की सैन्य ताकत अभी भी अक्षुण्ण”
-Friday World-April 22,2026 
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण स्थिति के बीच एक नया राजनीतिक बम फूटा है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की खुफिया शाखा की ताजा रिपोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के सार्वजनिक दावों को सीधा चुनौती दे दी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि हालिया संघर्षों के बावजूद ईरान की प्रमुख सैन्य क्षमताएं अभी भी बरकरार हैं और तेहरान पश्चिम एशिया में एक प्रभावशाली क्षेत्रीय शक्ति के रूप में मजबूत बना हुआ है।

यह आंतरिक आकलन ट्रंप प्रशासन की “पूर्ण विजय” और “ईरान की सेना को पूरी तरह कुचलने” वाली कहानी से बिल्कुल उलट है। अब व्हाइट हाउस और पेंटागन के बीच बढ़ते फर्क पर सवाल उठने लगे हैं।

पेंटागन रिपोर्ट क्या कहती है?

पेंटागन की इंटेलिजेंस ब्रांच (Defense Intelligence Agency) के अनुसार, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, एयर डिफेंस सिस्टम और असममित युद्ध (asymmetric warfare) की क्षमताएं अभी भी काफी हद तक बरकरार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों में ईरान को नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन उसकी सेना को “अपरिवर्तनीय क्षति” नहीं पहुंची है।

ट्रंप ने बार-बार दावा किया था कि ईरान की एयर फोर्स “नष्ट” हो गई है, नौसेना “समाप्त” हो गई है और मिसाइल फैक्टरियां “टुकड़े-टुकड़े” हो गई हैं। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में 90% की कमी आई है। लेकिन पेंटागन की नई रिपोर्ट इन दावों को “अतिरंजित” बताती है और स्पष्ट करती है कि ईरान अभी भी क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च करने और जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है।

यह खुलासा प्रशासन की सार्वजनिक छवि और आंतरिक खुफिया मूल्यांकन के बीच गहरे अंतर को उजागर करता है। विपक्षी डेमोक्रेट्स और कई विश्लेषकों ने अब ट्रंप पर “जनता को गुमराह करने” का आरोप लगाना शुरू कर दिया है।

 ट्रंप ने युद्धविराम बढ़ाया, लेकिन ईरान ने ठुकराया

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ युद्धविराम (ceasefire) को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत के लिए समय देने की मांग की थी। ट्रंप ने कहा कि वे ईरान से “एकजुट प्रस्ताव” का इंतजार कर रहे हैं और तब तक नौसैनिक नाकाबंदी (blockade) जारी रहेगी।

लेकिन तेहरान ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने कहा, “हारने वाला पक्ष शर्तें नहीं तय कर सकता।” उन्होंने अमेरिकी नाकाबंदी को “बमबारी के बराबर” बताया और ईरानी सेना को मजबूत जवाब देने का आह्वान किया। ईरान का तर्क है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकाबंदी नहीं हटाता, कोई स्थायी समझौता संभव नहीं है।

इससे पहले इस्लामाबाद में 21 घंटे चली लंबी बातचीत भी बेनतीजा रही थी। ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए अपनी शर्तें रखी हैं – जिसमें युद्ध क्षतिपूर्ति, हमलों से भविष्य की सुरक्षा गारंटी और हार्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी संप्रभुता की मान्यता शामिल है।

राजनयिक गतिरोध और बढ़ता संकट

अमेरिका-ईरान के बीच राजनयिक गतिरोध दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। पेंटागन रिपोर्ट के आने के बाद स्थिति और जटिल हो गई है। रिपोर्ट साफ करती है कि ईरान का सैन्य ढांचा अभी पूरी तरह से कमजोर नहीं हुआ है। इससे कूटनीति की विफलता और युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है।

विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं:
1. आंतरिक खुफिया रिपोर्ट और सार्वजनिक बयानों के बीच का अंतर।
2. ईरान की अड़ियल रुख और हार्मुज जलडमरूमध्य पर जारी संकट।

हार्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल निर्यात का महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान की ओर से यहां हमलों और खनन की धमकियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान प्रस्ताव नहीं लाता तो अमेरिकी सेना “पूरी तरह तैयार” है, लेकिन पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत का रास्ता अभी खुला रखा गया है।

 ट्रंप सरकार पर सवाल

यह विवाद ट्रंप सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ वे “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को बड़ी सफलता बता रहे हैं, दूसरी तरफ पेंटागन की रिपोर्ट कह रही है कि ईरान की क्षमता अभी भी मजबूत है। कई कांग्रेस सदस्यों ने अब स्वतंत्र जांच की मांग की है।

ईरान के साथ चल रही यह मुठभेड़ न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और बाजार अनिश्चितता से जूझ रहे हैं।

 आगे क्या?

वर्तमान में गृह मंत्रालय का प्रभार खुद ट्रंप संभाल रहे हैं (नेपाल वाले मामले से अलग)। ईरान मामले में आगामी दिनों में इस्लामाबाद में नई दौर की बातचीत की संभावना है, लेकिन ईरान की सख्त शर्तों के कारण सफलता मुश्किल दिख रही है।

पेंटागन रिपोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि युद्ध के मैदान में तथ्य और राजनीतिक बयानबाजी अक्सर अलग-अलग रास्ते चलते हैं। ट्रंप प्रशासन को अब न केवल ईरान के साथ, बल्कि अपनी ही खुफिया एजेंसियों के साथ भी सामंजस्य बिठाना होगा।

यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीति में नया तूफान खड़ा कर सकता है। क्या ट्रंप अपनी “मजबूत” छवि बचाने में सफल होंगे या पेंटागन रिपोर्ट उनके दावों पर भारी पड़ जाएगी? आने वाले दिन इस सवाल का जवाब देंगे।

ईरान-अमेरिका विवाद की यह जटिल कड़ी एक बार फिर दर्शाती है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सूचना, कूटनीति और विश्वसनीयता से भी लड़े जाते हैं।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 22,2026