-Friday World-April 22,2026
दुनिया के सबसे तनावपूर्ण संघर्षों में से एक – अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान – ने वैश्विक गठबंधनों को हिला दिया है। इस बीच, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक साहसिक, स्वतंत्र और सिद्धांतवादी रुख अपनाया है। उन्होंने युद्ध की निंदा की, नागरिकों खासकर बच्चों की सुरक्षा पर जोर दिया और इटली को इस संघर्ष से दूर रखा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी आलोचना के बावजूद मेलोनी ने परमाणु हथियारों, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों की रक्षा की। यह रुख न केवल इटली की संप्रभुता को दर्शाता है, बल्कि यूरोप में बढ़ते असहमति के स्वर को भी मजबूत करता है।
ट्रंप की आलोचना और मेलोनी का शक्तिशाली जवाब
अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मेलोनी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे “अस्वीकार्य” हैं। ट्रंप का आरोप था कि मेलोनी को ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने की कोई चिंता नहीं है और अगर ईरान को परमाणु बम मिल गया तो वह इटली को “दो मिनट में उड़ा” सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने मेलोनी में साहस देखा था, लेकिन वे गलत साबित हुए क्योंकि इटली नाटो और अमेरिका की मदद करने से पीछे हट रहा है।
मेलोनी का जवाब सीधा, तथ्यपरक और इतिहास की याद दिलाने वाला था। उन्होंने कहा, “जितना मुझे पता है, दुनिया में नौ देशों के पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल युद्ध में सिर्फ एक देश ने किया है – और वह खुद अमेरिका है।” उन्होंने 1945 के हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु हमलों का जिक्र किया, जहां एक पूरा देश पलभर में तबाह हो गया था। मेलोनी ने परमाणु धमकियों की भाषा को कम करने की अपील की और जोर दिया कि ऐसी बातें वैश्विक सुरक्षा को और कमजोर करती हैं।
यह जवाब न केवल ट्रंप की परमाणु आशंकाओं का मुकाबला करता है, बल्कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के ऐतिहासिक वास्तविकता की याद भी दिलाता है। मेलोनी ने स्पष्ट किया कि इटली ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने का पक्षधर है, लेकिन वह एकतरफा सैन्य कार्रवाई और परमाणु युद्ध की धमकियों का समर्थन नहीं कर सकता।
मिनाब स्कूल नरसंहार पर मेलोनी की सख्त निंदा
फरवरी-मार्च 2026 में अमेरिकी-इजरायली संयुक्त हमलों के दौरान ईरान के दक्षिणी शहर मिनाब में एक लड़कियों के प्राथमिक स्कूल पर हमला हुआ। इसमें 168 से अधिक बच्चियों की मौत हो गई। इस त्रासदी को मेलोनी ने इतालवी संसद (सीनेट) में खड़े होकर “लड़कियों का नरसंहार” (massacre of girls) बताया।
उन्होंने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर है। मेलोनी ने पीड़ित परिवारों के प्रति एकजुटता जताई और संयुक्त राष्ट्र से जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी सैन्य अभियान में नागरिकों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। यह बयान यूरोपीय नेताओं में से सबसे स्पष्ट था, जिसमें उन्होंने युद्ध की मानवीय कीमत पर प्रकाश डाला।
इटली का युद्ध से दूरी बनाए रखना: व्यावहारिक कदम
मेलोनी सरकार ने कई ठोस कदम उठाए जो इटली को इस संघर्ष से अलग रखते हैं:
- सिगोनेला एयरबेस का इनकार: मार्च 2026 के अंत में इटली ने सिसिली के सिगोनेला एयरबेस को अमेरिकी विमानों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने से मना कर दिया। ये विमान ईरान संबंधी अभियानों के लिए जा रहे थे। मेलोनी ने साफ कहा कि इटली इस युद्ध में शामिल नहीं है और शामिल नहीं होना चाहता। आधार समझौतों के अनुसार, अनुमति संसदीय प्रक्रिया और पूर्व अनुमोदन पर निर्भर करती है। इटली ने जोर दिया कि संबंध अमेरिका के साथ “मजबूत” हैं, लेकिन हर अनुरोध को केस-बाय-केस जांचा जाएगा।
- इजरायल के साथ रक्षा समझौते का निलंबन: 14 अप्रैल 2026 को मेलोनी ने घोषणा की कि 2003-2005 का डिफेंस कोऑपरेशन एग्रीमेंट (जो हर पांच साल में ऑटो-रिन्यू होता था) को “वर्तमान स्थिति” को देखते हुए सस्पेंड कर दिया गया है। यह समझौता हथियारों के आदान-प्रदान और प्रौद्योगिकी सहयोग पर आधारित था। यह कदम प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है और इजरायल के साथ इटली के पहले के मजबूत संबंधों में बदलाव दर्शाता है।
इन फैसलों से इटली ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों में हिस्सा नहीं लेगा, भले ही वह नाटो का सदस्य हो। मेलोनी ने संसद में कहा, “इटली युद्ध में भाग नहीं ले रहा है और लेने वाला नहीं है।”
मेलोनी का दृष्टिकोण: सिद्धांत, संप्रभुता और शांति
मेलोनी का स्टैंड कई आयामों को छूता है। वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की चिंता रखती हैं और कहती हैं कि इससे वैश्विक अप्रसार व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है। फिर भी, वे एकतरफा हमलों को “अंतरराष्ट्रीय कानून के बाहर” मानती हैं। उनका मानना है कि ऐसे हस्तक्षेप वैश्विक अस्थिरता बढ़ाते हैं।
इटली ने खाड़ी क्षेत्र के सहयोगियों की सुरक्षा के लिए एयर-डिफेंस संसाधन तैनात किए, लेकिन प्रत्यक्ष युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया। यह रुख इटली की ऊर्जा सुरक्षा, यूरोपीय एकजुटता और संवैधानिक प्रतिबद्धताओं (अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन) को ध्यान में रखता है।
ट्रंप की आलोचना के बावजूद मेलोनी ने इटली की स्वतंत्र विदेश नीति को मजबूत किया। उन्होंने पॉप लीओ XIV के खिलाफ ट्रंप के बयानों को भी “अस्वीकार्य” बताया, जो दर्शाता है कि वे मूल्यों पर समझौता नहीं करतीं।
वैश्विक संदर्भ और निहितार्थ
यह घटनाक्रम यूरोप में बढ़ती असहमति को उजागर करता है। स्पेन ने भी हवाई क्षेत्र बंद किया, जबकि कई यूरोपीय देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना गठबंधन में शामिल होने से हिचकिचाए। मेलोनी का फैसला दर्शाता है कि मजबूत सहयोगी होने के बावजूद कोई देश अंधेरे में अमेरिका का साथ नहीं दे सकता।
विश्लेषकों के अनुसार, मेलोनी का यह उलटफेर (U-turn) इजरायल और अमेरिका के साथ पिछले निकट संबंधों को देखते हुए महत्वपूर्ण है। यह प्रतीकात्मक है, लेकिन इटली की संप्रभुता और मानवीय चिंताओं को प्राथमिकता देने का संकेत देता है।
मेलोनी का संदेश साफ है: युद्ध समाधान नहीं, बल्कि समस्या है। परमाणु धमकियां, नागरिकों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किसी भी पक्ष को मजबूत नहीं बनाते। इटली शांति, कानून और नागरिक सुरक्षा की वकालत करता है।
यह स्टैंड न केवल इटली के लिए, बल्कि पूरे यूरोप और विश्व के लिए एक उदाहरण है कि सच्चा साहस अंध अनुसरण में नहीं, बल्कि सिद्धांतों पर अडिग रहने में होता है। जब दुनिया परमाणु खतरे और युद्ध की आग के बीच खड़ी है, तब मेलोनी जैसी आवाजें याद दिलाती हैं कि शांति और न्याय की राह ही एकमात्र टिकाऊ रास्ता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 22,2026