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Wednesday, 8 April 2026

ट्रंप का "विजय" धोखा घोषणा, लेकिन ईरान की शर्तों में फंसा अमेरिका-इजरायल गठबंधन: होर्मुज स्ट्रेट पर तेहरान का कड़ा कंट्रोल और मिसाइल हमलों की छाया

ट्रंप का "विजय" धोखा घोषणा, लेकिन ईरान की शर्तों में फंसा अमेरिका-इजरायल गठबंधन: होर्मुज स्ट्रेट पर तेहरान का कड़ा कंट्रोल और मिसाइल हमलों की छाया
-Friday World-April 9,2026 
मध्य पूर्व की जंग में नया मोड़: युद्धविराम की घोषणा के बावजूद तनाव क्यों बरकरार?

अप्रैल 2026 की शुरुआत में मध्य पूर्व की जंग ने एक नया और विवादास्पद मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जोर-शोर से "पूर्ण विजय" का ढिंढोरा पीटा। उन्होंने दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा की, जिसे उन्होंने ईरान के साथ "काम करने योग्य" समझौते का हिस्सा बताया। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने अपने सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और अब लंबे समय तक शांति की दिशा में बातचीत होगी। लेकिन हकीकत काफी अलग है। ईरान ने अमेरिका की कोई प्रमुख शर्त नहीं मानी, उल्टा होर्मुज स्ट्रेट पर अपना कड़ा नियंत्रण बरकरार रखा है और युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद इजरायल पर मिसाइलों की बौछार जारी रखी।

यह युद्धविराम पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ है। ट्रंप ने इसे "दो हफ्ते का ब्रेक" बताया, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को "पूर्ण रूप से खोलने" की शर्त रखी गई थी। लेकिन ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट कहा कि जहाजों का सुरक्षित गुजर "ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय" से ही संभव होगा। यानी बिना तेहरान की इजाजत के कोई भी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकेगा। यह शर्त युद्ध से पहले की स्थिति से अलग है, जब स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था। अब ईरान ने इसे अपनी "सुरक्षा और तकनीकी सीमाओं" के अधीन कर लिया है।

 होर्मुज स्ट्रेट: विश्व अर्थव्यवस्था की धमनी पर ईरान का शिकंजा

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है। युद्ध के दौरान ईरान ने इसे बंद कर दिया था, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू गईं। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर स्ट्रेट नहीं खुला तो "नर्क बरसाया जाएगा"। लेकिन युद्धविराम के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई।

ईरानी मीडिया और आधिकारिक बयानों में साफ कहा गया कि जहाजों को ईरानी नौसेना की अनुमति लेनी होगी। कुछ रिपोर्ट्स में तो शुल्क वसूली की भी बात सामने आई, जो पहले कभी नहीं थी। जहाज ट्रैकिंग डेटा दिखाता है कि युद्धविराम के पहले दिन बहुत कम जहाज गुजरे। अमेरिका का दावा है कि स्ट्रेट "खुल रहा है", लेकिन वास्तव में ईरान का नियंत्रण बना हुआ है। यह तेहरान की रणनीतिक जीत मानी जा रही है। ईरान ने दिखा दिया कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है और अब इस कार्ड को बातचीत में इस्तेमाल कर रहा है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका के सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं और अब "वास्तविक शांति" की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन विश्लेषक इसे "ट्रंप की मजबूरी" बता रहे हैं। ईरान के मिसाइल हमलों और स्ट्रेट बंद करने की क्षमता ने अमेरिका को ब्रेक लेने पर मजबूर किया।

 इजरायल में सदमा और आंतरिक कलह: नेतन्याहू पर नाकामी के आरोप

जबकि ट्रंप "विजय" मना रहे हैं, उनके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल में हड़कंप मचा हुआ है। इजरायली मीडिया और विपक्षी नेता युद्धविराम को "कूटनीतिक आपदा" बता रहे हैं। विपक्ष के प्रमुख नेता यायर लापिद ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "सेना ने सब कुछ किया, जनता ने अद्भुत सहनशक्ति दिखाई, लेकिन नेतन्याहू कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से नाकाम रहे। उन्होंने खुद के तय लक्ष्यों में से एक भी पूरा नहीं किया।"

इजरायली अखबारों में सरकार से कठिन सवाल पूछे जा रहे हैं। क्या ईरान की परमाणु क्षमता, मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी (जैसे हिजबुल्लाह) पर कोई असर पड़ा? जवाब ज्यादातर नकारात्मक है। इजरायल का कहना है कि युद्धविराम लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ उसके अभियान पर लागू नहीं होता, लेकिन ईरान इसे उल्लंघन मान रहा है।

युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही ईरान ने मध्य इजरायल पर मिसाइल दागीं। इजरायली इंटेलिजेंस कम्युनिटी को पहले से आशंका थी कि सीजफायर के बावजूद ऐसे हमले हो सकते हैं। कुछ मिसाइलों में क्लस्टर मुनिशन थे, जिनसे हाइफा और अन्य इलाकों में नुकसान हुआ। इजरायल की एयर डिफेंस ने ज्यादातर को रोक लिया, लेकिन मनोवैज्ञानिक असर गहरा था।

नेतन्याहू ने बयान जारी कर ट्रंप के फैसले का समर्थन किया, लेकिन जोड़ा कि लेबनान पर हमले जारी रहेंगे। पाकिस्तान ने मध्यस्थता में लेबनान को भी शामिल बताया था, जिसे इजरायल ने खारिज कर दिया। इस असहमति ने युद्धविराम को और नाजुक बना दिया है।

इजरायली विपक्ष और मीडिया में सवाल उठ रहे हैं: क्या यह "जीत के मुंह से हार" है? इजरायल ने ईरान पर हमले किए, लेकिन तेहरान अभी भी खड़ा है। उसकी मिसाइल क्षमता बरकरार है, परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस रोक नहीं लगी और होर्मुज पर उसका कंट्रोल बढ़ गया। कुछ दक्षिणपंथी इजरायली नेता तो ट्रंप को "कमजोर" बता रहे हैं।

 युद्धविराम की सच्चाई: दोनों पक्ष जीत का दावा, लेकिन हकीकत क्या?

ट्रंप ने कहा कि ईरान ने 10-पॉइंट प्लान दिया, जिसे वे "काम करने योग्य" मानते हैं। लेकिन ईरान का प्लान अमेरिकी दावों से काफी अलग है। तेहरान का कहना है कि समझौते में यूरेनियम संवर्धन जारी रखने का अधिकार, क्षेत्रीय हमलों का अंत और अमेरिकी सैनिकों की वापसी शामिल है। ट्रंप ने इनमें से कई को खारिज किया और कहा कि "कोई यूरेनियम संवर्धन नहीं होगा"।

वास्तव में यह दो हफ्ते का "पॉज" लग रहा है, जिसमें दोनों पक्ष सांस ले रहे हैं। अमेरिका ने हमले रोक दिए, लेकिन क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बनाए रखी है। ईरान ने "सुरक्षित गुजर" का वादा किया, लेकिन नियंत्रण अपने हाथ में रखा। इस बीच लेबनान में इजरायली हमले जारी हैं, जिससे ईरान नाराज है और स्ट्रेट पर दबाव बढ़ा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने रणनीतिक रूप से मजबूत स्थिति हासिल की है। उसने दिखाया कि वह अमेरिका-इजरायल गठबंधन को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी ओर, ट्रंप घरेलू और वैश्विक दबाव में ब्रेक ले रहे हैं। तेल की कीमतें गिर गईं, स्टॉक मार्केट में उछाल आया, लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकती है।

आगे क्या? इस्लामाबाद में बातचीत और अनिश्चित भविष्य

अगले कुछ दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान बातचीत होने वाली है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इन वार्ताओं का नेतृत्व करेंगे। मुद्दे जटिल हैं: होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य, ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी और लंबे समय की शांति।

इजरायल में राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। नेतन्याहू को विपक्ष से चुनौती मिल रही है। अगर युद्धविराम टूटा तो फिर बड़े पैमाने पर जंग हो सकती है। ईरान का कहना है कि वह स्थायी समाधान चाहता है, जबकि अमेरिका और इजरायल "ईरान को कमजोर" करने पर अड़े हैं।

यह स्थिति दिखाती है कि मध्य पूर्व की जंग में कोई आसान विजेता नहीं है। ट्रंप की घोषणा भले ही जीत जैसी लगे, लेकिन होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण, मिसाइल हमले और इजरायल की निराशा बता रहे हैं कि लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। विश्व को अब देखना होगा कि दो हफ्ते का यह ब्रेक शांति की ओर ले जाता है या फिर और बड़े संघर्ष की तैयारी है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 9,2026