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Monday, 27 April 2026

वर्जीनिया का पेंशन फंड: इज़राइल को हथियार सप्लाई करने वाली कंपनियों में सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश, जनता की सहमति के बिना “जनसंहार” का वित्तीय समर्थन?

वर्जीनिया का पेंशन फंड: इज़राइल को हथियार सप्लाई करने वाली कंपनियों में सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश, जनता की सहमति के बिना “जनसंहार” का वित्तीय समर्थन?-Friday World-April 27,2026 
रिचमंड, वर्जीनिया, 27 अप्रैल 2026: अमेरिकी राज्य वर्जीनिया के पब्लिक पेंशन फंड ने उन कंपनियों में लगभग 394 मिलियन डॉलर का निवेश किया है जो इज़राइल को गाजा, लेबनान और ईरान पर चल रहे सैन्य अभियानों के लिए युद्धक विमान, बम, मिसाइल और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट प्रदान करती हैं। वर्जीनिया रिटायरमेंट सिस्टम (VRS) ने इन कंपनियों से निवेश वापस लेने की मांगों को ठुकरा दिया है, जबकि हजारों शिक्षक, फायरफाइटर और पब्लिक कर्मचारी अपना रिटायरमेंट पैसा इन “वार प्रॉफिटियर” कंपनियों में फंसा हुआ देख रहे हैं।

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, VRS Divest from Weapons and War कैंपेन ने खुलासा किया कि वर्जीनिया के पब्लिक वर्कर्स के पेंशन फंड से 300 मिलियन से ज्यादा डॉलर उन कंपनियों में गए हैं जो इज़राइल की सैन्य मशीन को सीधे सपोर्ट कर रही हैं। इनमें लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, नॉर्थ्रोप ग्रुम्मन, जनरल डायनेमिक्स, RTX (पूर्व में रेथियॉन) और मर्स्क जैसी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां इज़राइल को F-35 फाइटर जेट्स, 2000 पाउंड के बम, आर्टिलरी शेल्स और सैन्य कार्गो शिपमेंट मुहैया कराती हैं।

VRS का निवेश: किसके पैसे से किसका समर्थन?

वर्जीनिया रिटायरमेंट सिस्टम राज्य के 800,000 से ज्यादा पब्लिक एम्प्लॉयीज़ (शिक्षक, फायरफाइटर, पुलिस और अन्य सरकारी कर्मचारी) के रिटायरमेंट और बेनिफिट्स का प्रबंधन करता है। इसका कुल पोर्टफोलियो 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से सैकड़ों मिलियन डॉलर उन 14 कंपनियों में निवेशित हैं जो इज़राइल को हथियार और लॉजिस्टिक्स सप्लाई करती हैं।

मुख्य कंपनियां जिनमें निवेश है:
- लॉकहीड मार्टिन: F-35 जेट्स की सप्लाई, जो गाजा और लेबनान में इस्तेमाल हुए।
- बोइंग: सैन्य विमान और बम सिस्टम।
- RTX (रेथियॉन): गाइडेड मिसाइल्स और बड़े बम।
- AP Moller-Maersk: सैन्य कार्गो शिपमेंट, लाखों पाउंड हथियार इज़राइल पहुंचाने में मदद।
- अन्य: जनरल डायनेमिक्स, नॉर्थ्रोप ग्रुम्मन, BAE सिस्टम्स आदि।

कैंपेन के अनुसार, ये निवेश बिना लाभार्थियों की सहमति के किए गए। पब्लिक कर्मचारी दावा करते हैं कि उनका पैसा “जनसंहार” और क्षेत्रीय युद्धों को फंड कर रहा है, जबकि वे खुद घरेलू मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जूझ रहे हैं।

“जनसंहार” का आरोप और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

इज़राइल के गाजा अभियान को कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और संभावित जनसंहार के रूप में देखा है। रिपोर्ट्स में 60,000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत का जिक्र है, जिसमें महिलाएं, बच्चे और अस्पतालों पर हमले शामिल हैं। लेबनान और ईरान के खिलाफ हाल के ऑपरेशंस में भी इन हथियारों का इस्तेमाल बताया जाता है।

VRS Divest कैंपेन कहता है कि अमेरिकी पेंशन फंड्स का पैसा इन युद्धों को संभव बना रहा है। “हमारे टैक्सपेयर का पैसा विदेशी युद्धों में लगाया जा रहा है, जबकि अमेरिका में ही स्कूल, अस्पताल और इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत खराब है।” कैंपेन ने VRS बोर्ड को पत्र लिखकर इन कंपनियों से तुरंत डिवेस्टमेंट की मांग की है।

हालांकि, VRS ने इन मांगों को खारिज कर दिया। बोर्ड ने कहा कि निवेश “फिड्यूशरी ड्यूटी” (वित्तीय जिम्मेदारी) के तहत किए गए हैं और रिटर्न्स को प्राथमिकता दी जाती है। कुछ रिपोर्ट्स में VRS पर युद्ध अपराधी को आमंत्रित करने और पिटीशन देने वाले फायरफाइटर को गिरफ्तार करने के आरोप भी लगे हैं।

अमेरिकी नीति और डबल स्टैंडर्ड?

अमेरिका इज़राइल को सालाना अरबों डॉलर की सैन्य सहायता देता है, जो ज्यादातर अमेरिकी कंपनियों से हथियार खरीदने में खर्च होती है। यह “अमेरिकन जॉब्स” और डिफेंस इंडस्ट्री को सपोर्ट करने का तर्क दिया जाता है। लॉकहीड मार्टिन, बोइंग जैसी कंपनियां पेंटागन के सबसे बड़े कॉन्ट्रैक्टर्स हैं और इज़राइल को दिए गए हथियार अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचाते हैं।

लेकिन आलोचक पूछते हैं — क्या आम अमेरिकी नागरिक जानबूझकर इस नीति का समर्थन कर रहे हैं? या फिर यह “मानवता” और “डेमोक्रेसी” के नाम पर दी जाने वाली नैरेटिव का हिस्सा है, जबकि वास्तव में सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स का प्रॉफिट मॉडल चल रहा है? 

ट्रंप प्रशासन या बाइडेन काल में भी इज़राइल को हथियार सप्लाई जारी रही। अब जबकि संघर्षविराम की बातें हो रही हैं, फिर भी नाकाबंदी और सप्लाई चेन सक्रिय दिखती है। वर्जीनिया जैसे राज्य के पेंशन फंड का निवेश इस पूरे सिस्टम का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डिवेस्टमेंट मूवमेंट: बढ़ती आवाज

वर्जीनिया में VRS Divest कैंपेन के अलावा कई अमेरिकी शहरों और राज्यों में इसी तरह की मांगें उठ रही हैं। वाशिंगटन स्टेट, मिनेसोटा, मिशिगन जैसे जगहों पर इज़राइल बॉन्ड्स या स्पेसिफिक कंपनियों से डिवेस्टमेंट हुए हैं। ज्यूइश वॉइस फॉर पीस (JVP) और अन्य संगठन भी इसमें सक्रिय हैं।

कैंपेनरों का तर्क है कि पेंशन फंड्स को नैतिक रूप से निवेश करना चाहिए — हथियारों के बजाय शिक्षा, ग्रीन एनर्जी या हेल्थकेयर में। “हमारे रिटायरमेंट का पैसा बच्चों के खून से रंगा नहीं होना चाहिए।”

दूसरी तरफ, समर्थक कहते हैं कि इज़राइल अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी है, जो क्षेत्र में ईरान, हमास और अन्य ताकतों के खिलाफ “डिफेंसिव” भूमिका निभाता है। हथियार सप्लाई “सेल्फ-डिफेंस” का अधिकार है और अमेरिकी जॉब्स को बचाती है।

 आगे क्या?

VRS बोर्ड की अगली मीटिंग में यह मुद्दा फिर उठ सकता है। कैंपेनर पिटीशन, प्रोटेस्ट और लीगल रास्ते अपनाने की तैयारी में हैं। अगर ज्यादा राज्य और शहर डिवेस्टमेंट की ओर बढ़े तो अमेरिकी विदेश नीति पर दबाव बढ़ सकता है।

यह मामला सिर्फ वर्जीनिया का नहीं, बल्कि पूरे अमेरिका के सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स, पब्लिक फंड्स की नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में नागरिकों की भूमिका का सवाल उठाता है। क्या आम अमेरिकी टैक्सपेयर और पेंशन होल्डर सच में “मानवता” के नाम पर दुनिया को भ्रमित कर रहे हैं, या फिर बड़े कॉर्पोरेट और राजनीतिक हित इस पूरे खेल को चला रहे हैं?

दुनिया देख रही है कि पैसे की ताकत किस तरफ झुकती है — प्रॉफिट की ओर या पीस और जस्टिस की ओर। फिलहाल, वर्जीनिया के पेंशन फंड ने साफ संकेत दिया है कि वह “बिजनेस ऐज यूजुअल” जारी रखेगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 27,2026