सेंट पीटर्सबर्ग, 27 अप्रैल 2026: अमेरिका-ईरान संघर्षविराम वार्ता में गहराते गतिरोध के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली अप्रत्यक्ष वार्ताएं ठप पड़ गईं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कड़ी नाकाबंदी नीति पर जोर देते हुए ईरान को "फोन करके बात करने" की सलाह दी।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची पाकिस्तान और ओमान के दौरे के बाद रूस पहुंचे। उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन से मुलाकात की, जहां दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, संघर्षविराम की स्थिति और पश्चिमी दबाव के खिलाफ रणनीतिक समन्वय पर चर्चा की। क्रेमलिन ने इस बैठक की पुष्टि की और कहा कि दोनों नेता "शांति की जल्द स्थापना" की उम्मीद जताते हैं।
वार्ता क्यों अटकी? ट्रंप की सख्ती और ईरान की शर्तें
अमेरिका-ईरान के बीच दो महीने से चले आ रहे तनाव के बाद घोषित संघर्षविराम अब मुश्किल दौर से गुजर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर परमाणु कार्यक्रम छोड़ने की मांग रखी है, जबकि तेहरान नाकाबंदी हटाने और प्रतिबंधों में ढील की शर्त पर अड़ा हुआ है। ट्रंप ने अपने दूतों स्टीव विटकोफ और जared कुश्नर की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी, कहा- "हमारे पास सारे ताश हैं, वे कुछ नहीं रखते। अगर बात करनी है तो फोन कर लें!"
ईरान ने इस रुख को "अत्यधिक मांग" बताया। अराघची ने मेहर न्यूज एजेंसी से कहा कि अमेरिका की "दोषपूर्ण रणनीति" और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर सैन्य दबाव के कारण पाकिस्तान में वार्ता विफल रही। ईरान का दावा है कि संघर्षविराम के दौरान भी अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जारी है, जो खुद युद्धविराम का उल्लंघन है।
पाकिस्तान ने मध्यस्थता की बड़ी भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इशाक दार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से अराघची की मुलाकात हुई। इस्लामाबाद ने दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन ईरान ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत से इनकार कर दिया जब तक नाकाबंदी न हटे। कुछ ईरानी सांसदों ने तो पाकिस्तान को मध्यस्थता के लिए "अयोग्य" तक बताया।
ओमान ने भी शटल डिप्लोमेसी चलाई, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। अब नजरें रूस पर टिकी हैं, जो ईरान का पुराना रणनीतिक साझेदार है।
रूस-ईरान साझेदारी: पश्चिमी दबाव के खिलाफ ढाल?
रूस और ईरान दोनों पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद मॉस्को ने तेहरान से ड्रोन और अन्य सहयोग लिया है, जबकि ईरान को रूस से सैन्य-तकनीकी समर्थन मिलता रहा है। पुतिन-अराघची बैठक में दोनों पक्षों ने "क्षेत्रीय सुरक्षा" और "साझा चुनौतियों" पर फोकस किया।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान रूस की मदद से अमेरिका पर दबाव बढ़ाना चाहता है। रूस हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर स्थिरता की वकालत कर सकता है, जहां ईरान ने सैन्य नियंत्रण का प्रस्ताव रखा है। तेल की कीमतें पहले ही बढ़ रही हैं और वैश्विक बाजार अस्थिर हैं।
ट्रंप ने कहा कि संघर्षविराम बढ़ाया जा सकता है अगर ईरान "एकजुट प्रस्ताव" लाए, लेकिन नाकाबंदी जारी रखने का संकेत दिया। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियन ने भी साफ किया कि तेहरान "झुकेगा नहीं"।
क्षेत्रीय प्रभाव और पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान के लिए यह मध्यस्थता कूटनीतिक चुनौती है। इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान दोनों से संतुलन बनाए रखना चाहता है, लेकिन वार्ता विफल होने से उसकी साख पर असर पड़ सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि पाकिस्तान ने ईरान के "रेड लाइन्स" अमेरिका तक पहुंचाए, लेकिन ट्रंप ने उन्हें अपर्याप्त बताया।
मध्य पूर्व में तनाव से भारत समेत कई देश प्रभावित हो सकते हैं। तेल आयात, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ेगा। चीन और रूस जैसे देश ईरान के साथ खड़े दिख रहे हैं, जबकि अमेरिका-इजराइल गठजोड़ मजबूत है।
आगे क्या?
अराघची की रूस यात्रा से साफ है कि ईरान एकतरफा अमेरिकी दबाव स्वीकार नहीं करेगा। पुतिन की मध्यस्थता की पेशकश पहले भी आई थी। अगर रूस सक्रिय भूमिका निभाता है तो वार्ता का नया रास्ता खुल सकता है, वरना हॉर्मुज पर तनाव बढ़ने और तेल संकट का खतरा मंडराएगा।
ट्रंप की "हमारे पास सारे ताश" वाली रणनीति अल्पकालिक दबाव तो डाल सकती है, लेकिन लंबे समय में क्षेत्रीय गठबंधनों को मजबूत कर सकती है। ईरान का कहना है कि वह "लड़ाई थोपे गए युद्ध" का सामना कर रहा है और शांति के लिए सम्मानजनक शर्तें जरूरी हैं।
यह स्थिति वैश्विक कूटनीति के लिए परीक्षा है। पाकिस्तान, ओमान और अब रूस की मध्यस्थता प्रयास जारी हैं, लेकिन बिना प्रमुख रियायतों के कोई बड़ा ब्रेकथ्रू मुश्किल दिखता है। दुनिया नजर रखे हुए है कि क्या फोन कॉल से या रूसी मेजबानी में कोई नया अध्याय शुरू होता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 27,2026