-Friday World-April 23,2026
तेहरान, 23 अप्रैल 2026 – ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची (Abbas Araghchi) ने दक्षिण कोरिया के विशेष दूत चुंग ब्युंग-हा (Chung Byung-ha) से मुलाकात में जोर देकर कहा कि अमेरिका और इज़राइल की आक्रामक कार्रवाइयाँ फारस की खाड़ी तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की सबसे बड़ी वजह हैं। IRNA की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक तेहरान में हुई, जिसमें ईरान पर एक महीने से ज़्यादा समय तक चले हमलों के दौरान हुए अमेरिकी-इज़राइली उल्लंघनों पर विस्तार से चर्चा की गई।
क्षेत्रीय तनाव और हॉर्मुज संकट का पृष्ठभूमि
वर्तमान समय में मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका-इज़राइल के सैन्य अभियानों के जवाब में ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी सुरक्षा उपाय शुरू किए। यह जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है। ईरान ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताया है, जबकि दक्षिण कोरिया जैसे देशों के कई जहाज़ वहाँ फंस गए हैं। सियोल ने विशेष दूत भेजकर अपने नागरिकों, जहाज़ों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
अराकची ने बैठक में स्पष्ट किया कि आक्रमणकारी (अमेरिका और इज़राइल) ही इस अस्थिरता के पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिकी और इज़राइली कार्रवाइयाँ फारस की खाड़ी और हॉर्मुज में असुरक्षा का मुख्य स्रोत हैं। यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।” ईरानी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में जोर दिया गया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानून के अनुसार अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं।
अराकची का आग्रह: अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप न रहे
ईरानी विदेश मंत्री ने दक्षिण कोरियाई दूत को ईरान पर हुए हमलों के दौरान हुए “अपराधों” की जानकारी दी। उन्होंने सभी देशों से अपील की कि वे इन हमलों की निंदा में स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाएँ। अराकची ने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निरंतर चुप्पी केवल अस्थिरता को और गहरा करेगी।
उन्होंने जोर दिया कि जिम्मेदार पक्षों (aggressors) को इस स्थिति के परिणाम भुगतने होंगे। दक्षिण कोरियाई दूत चुंग ब्युंग-हा ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीद जताई। उन्होंने हॉर्मुज में फंसे कोरियाई जहाज़ों और नाविकों की सुरक्षित निकासी पर ईरान से सहयोग की अपील की। अराकची ने इस प्रयास की सराहना की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा का गला
हॉर्मुज जलडमरूमध्य मध्य पूर्व का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग है। यहाँ से रोज़ाना लाखों बैरल तेल और LNG गुजरता है, जो एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों की ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। दक्षिण कोरिया जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान संकट में कई कोरियाई जहाज़ फंस गए हैं, जिससे सियोल को कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय होना पड़ा है।
ईरान का तर्क है कि अमेरिका-इज़राइल के हमलों ने क्षेत्र को अस्थिर किया, जिसके जवाब में ईरान ने अपनी सुरक्षा के उपाय किए। वहीं, अमेरिकी पक्ष इसे “समुद्री आतंकवाद” या ब्लॉकेड का मुद्दा बता रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि वैश्विक बाज़ार तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधा से प्रभावित हो रहे हैं।
द्विपक्षीय संबंधों की उम्मीद
बैठक में अराकची ने दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून (Cho Hyun) द्वारा विशेष दूत भेजने के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में भी कोरियाई दूतावास का काम जारी रहना सराहनीय है। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। ईरान ने कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा पर भी ध्यान देने का आश्वासन दिया।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में युद्धविराम की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन हॉर्मुज में तनाव बरकरार है। दक्षिण कोरिया का प्रयास मुख्य रूप से अपने आर्थिक हितों—खासकर ऊर्जा आयात—की रक्षा करना है, जबकि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता और अपनी संप्रभुता की रक्षा पर जोर दे रहा है।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियाँ
यह घटना सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत नहीं है, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ को दर्शाती है। हॉर्मुज का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। तेल की कीमतें बढ़ने से मुद्रास्फीति, परिवहन लागत और ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ता है। कई देश अब कूटनीतिक चैनलों से ईरान से संपर्क कर रहे हैं ताकि जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके।
ईरान का रुख साफ है — आक्रमण रुकना चाहिए, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान होना चाहिए और चुप्पी अस्थिरता बढ़ाएगी। वहीं, दक्षिण कोरिया जैसे देश शांति वार्ता और व्यावहारिक समाधान चाहते हैं।
: तेहरान ने सियोल के दूत के माध्यम से दुनिया को संदेश दिया है कि खाड़ी की अस्थिरता की जड़ अमेरिकी-इज़राइली नीतियाँ हैं। अब देखना यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस चेतावनी पर कितना गंभीर रुख अपनाता है। कूटनीति की जीत होगी या तनाव और बढ़ेगा — यह आने वाले दिनों का फैसला करेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 23,2026