-Friday World-April 23,2026
मध्य पूर्व की जटिल भू-राजनीति में एक बार फिर तनाव की नई लहर उभर रही है। अमेरिका ने कथित तौर पर इजराइल को सूचित किया है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्षविराम रविवार (26 अप्रैल 2026) को समाप्त होने वाला है, जबकि व्हाइट हाउस की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई सख्त समयसीमा तय न करने का दावा किया जा रहा है। इजराइली मीडिया और सूत्र इस स्थिति को “वार्ता में ठप्पा” और “अमेरिकी रुख में असंगति” करार दे रहे हैं। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक भविष्य को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
ट्रंप प्रशासन का दोहरा रुख: विस्तार लेकिन दबाव बरकरार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम को विस्तारित करने की घोषणा की थी। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस व्यवस्था को ट्रंप ने “ईरानी नेतृत्व को एकीकृत प्रस्ताव देने का समय” देते हुए बढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघर्षविराम तब तक जारी रहेगा जब तक तेहरान एक “एकजुट प्रस्ताव” पेश नहीं कर देता। साथ ही, अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए ब्लॉकेड को पूरी तरह बरकरार रखने का आदेश दिया गया।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कोई सौदा नहीं हुआ तो “बहुत सारे बम फटेंगे” और ईरान को “ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा”। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट (Karoline Leavitt) ने प्रेस से बात करते हुए जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है। उन्होंने कहा, “कुछ रिपोर्ट्स में जो 3-5 दिन या रविवार की डेडलाइन बताई जा रही है, वह गलत है। समयसीमा अंततः राष्ट्रपति तय करेंगे।”
यह दोहरा संदेश वाशिंगटन की रणनीति को लेकर भ्रम बढ़ा रहा है। एक तरफ ट्रंप त्वरित और ठोस परिणाम चाहते हैं, तो दूसरी तरफ वे ईरान के आंतरिक विभाजन (प्रगतिशील बनाम कट्टरपंथी गुट) को देखते हुए लचीलापन दिखा रहे हैं।
इजराइली चिंता: KAN रिपोर्ट और सूत्रों की प्रतिक्रिया
इजराइली सार्वजनिक प्रसारक **KAN** ने खबर दी कि अमेरिका ने इजराइल को गोपनीय रूप से सूचित किया है कि ट्रंप द्वारा निर्धारित समयसीमा रविवार को खत्म हो रही है। इजराइली सूत्रों का कहना है कि इस समयसीमा से पहले अमेरिका-ईरान वार्ता में कोई ठोस सफलता की संभावना नजर नहीं आ रही। उन्होंने वाशिंगटन के रुख में “स्पष्टता की कमी” और “आगे के रास्ते को लेकर असंगत संकेत” की ओर इशारा किया।
इजराइल के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि वह ईरान को परमाणु क्षमता विकसित करने से रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि तेहरान अभी भी पाकिस्तान में प्रस्तावित दूसरी दौर की वार्ता (जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल होने वाले थे) में पूरी तरह भाग लेने को तैयार नहीं दिख रहा। वार्ता ठप होने की आशंका से इजराइल में अमेरिकी नीति पर सवाल उठ रहे हैं।
ईरान का पक्ष: नया प्रस्ताव और “बैटलफील्ड कार्ड्स”
ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक “एकीकृत प्रस्ताव” नहीं आया है। तेहरान ने अमेरिकी ब्लॉकेड को “युद्ध की कार्रवाई” करार दिया है और कहा है कि हार्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना संभव नहीं जब तक ब्लॉकेड हटाया न जाए। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर संघर्षविराम टूटा तो ईरान “बैटलफील्ड पर नए कार्ड” खोलने के लिए तैयार है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन के “परस्पर विरोधी संदेशों” की आलोचना की और कहा कि दबाव की नीति के तहत कोई वार्ता संभव नहीं। फिर भी, पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के प्रयास जारी हैं।
वैश्विक प्रभाव: तेल बाजार, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा
यह पूरा घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। हार्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग है। संघर्षविराम टूटने की आशंका से तेल की कीमतों में पहले ही उछाल आ चुका है। यदि ब्लॉकेड और तनाव बढ़ा तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी, जिसका असर भारत समेत कई विकासशील देशों पर पड़ेगा।
भारत की दृष्टि से यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि हम ईरान से तेल आयात करते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता हमारी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी हुई है। साथ ही, भारत अमेरिका और इजराइल दोनों के साथ मजबूत संबंध रखता है, इसलिए संतुलित कूटनीति की जरूरत है।
आगे क्या?
वर्तमान में स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। ट्रंप प्रशासन ईरान के आंतरिक विभाजन को देखते हुए समय दे रहा है, लेकिन सैन्य दबाव भी बनाए हुए है। इजराइल इस “भ्रम” से नाखुश है और स्पष्ट रणनीति की मांग कर रहा है। ईरान वार्ता के लिए शर्तें रख रहा है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में या तो तेहरान कोई प्रस्ताव पेश करेगा या फिर तनाव और बढ़ सकता है। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर आगे की कोशिशें जारी रहेंगी।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि मध्य पूर्व में शांति स्थापना कितनी जटिल है। ठोस सौदा तभी संभव है जब सभी पक्ष विश्वास और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ें। फिलहाल, दुनिया संघर्षविराम के विस्तार को सकारात्मक कदम मान रही है, लेकिन रविवार के आसपास की घटनाएं निर्णायक साबित हो सकती हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 23,2026