-Friday World-April 21,2026
वाशिंगटन, 2026 – "यह एक एहसास था जो राष्ट्रपति को हुआ था।"
प्रेस सचिव करोलाइन लेविट (Karoline Leavitt) ने खुलकर स्वीकार किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) लॉन्च करने का फैसला किसी ठोस खुफिया सबूत या इंटेलिजेंस रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि एक **'अच्छे एहसास'** (good feeling) पर किया। लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "राष्ट्रपति को यह फीलिंग थी कि ईरानी शासन अमेरिका की संपत्तियों और हमारे कर्मियों पर हमला करने वाला है। यह एक ऐसा एहसास था जो तथ्यों पर आधारित था।"
यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूफान खड़ा कर गया। दुनिया भर के मीडिया, विपक्षी नेता और विशेषज्ञ इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या दुनिया की सबसे ताकतवर सेना का इस्तेमाल अब 'एहसास' या 'गट फीलिंग' पर किया जा सकता है?
घटनाक्रम: 'एहसास' से 'एपिक फ्यूरी' तक
फरवरी-मार्च 2026 में ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान की मिसाइल सुविधाएं, नौसैनिक अड्डे और कुछ रिपोर्टों के अनुसार परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप ने इसे 'पूर्वनिवारक हमला' बताया और दावा किया कि ईरान पहले हमला करने वाला था।
लेकिन जब पत्रकारों ने ठोस सबूत मांगे तो सफाई आई – "प्रेसिडेंट हैड अ गुड फीलिंग"। लेविट ने बार-बार जोर दिया कि यह फीलिंग "तथ्यों पर आधारित" थी, जो उनके टॉप नेगोशिएटर्स से मिली थी। उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह बातचीत के दौरान झूठ बोल रहा था और परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा था।
हालांकि, कई रिपोर्टों और कांग्रेस ब्रिफिंग्स में पेंटागन और इंटेलिजेंस कम्युनिटी के सूत्रों ने साफ कहा – ईरान की ओर से अमेरिका पर कोई 'इमिनेंट प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक' की कोई खुफिया जानकारी नहीं थी। सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के शीर्ष डेमोक्रेटिक सदस्य मार्क वार्नर ने कहा, "मुझे कोई ऐसा सबूत नहीं दिखा कि ईरान अमेरिका पर पहले हमला करने वाला था।"
ट्रंप ने खुद ट्रुथ सोशल पर लिखा कि "वे पहले हमला करने वाले थे, मैंने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया।" लेकिन प्रशासन के बयान बार-बार बदलते रहे – कभी इजराइल के हमले का जवाब, कभी ईरान की मिसाइल क्षमता, तो कभी ट्रंप का व्यक्तिगत 'एहसास'।
क्यों विवादास्पद है यह 'एहसास'?
1. खुफिया विफलता या इरादतन अनदेखी?
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े सैन्य फैसलों में 'इंटेलिजेंस' की जगह 'इंट्यूशन' को प्राथमिकता देना खतरनाक है। पिछले अनुभवों (इराक युद्ध 2003) में भी गलत इंटेलिजेंस के आधार पर युद्ध शुरू हुआ था, जिसके लंबे परिणाम भुगतने पड़े।
2. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
डेमोक्रेट्स इसे 'चॉइस ऑफ वॉर' (युद्ध का चुनावी फैसला) बता रहे हैं। कुछ रिपब्लिकन नेता भी चुप्पी साधे हुए हैं या आंशिक समर्थन दे रहे हैं। इजराइल ने इसे 'पूर्वनिवारक' बताया, लेकिन गल्फ देशों और यूरोपीय सहयोगियों में चिंता है कि यह क्षेत्र को और अस्थिर कर सकता है।
3. परिणाम क्या हुए?
ऑपरेशन के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरें आईं। बाद में दो सप्ताह का सीजफायर हुआ, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और तेल आपूर्ति पर बातचीत हुई। लेविट ने इसे "ट्रंप की मजबूत धमकी का नतीजा" बताया। लेकिन आलोचक कहते हैं कि बिना ठोस सबूत के युद्ध शुरू करना "भावनाओं पर आधारित विदेश नीति" है।
ट्रंप की स्टाइल: इंट्यूशन पर भरोसा
ट्रंप हमेशा से 'गट फीलिंग' पर भरोसा करते रहे हैं। उन्होंने कई फैसलों में कहा है कि "मुझे लगता है..." या "मुझे फील होता है..."। समर्थक इसे उनकी 'स्ट्रॉन्ग लीडरशिप' और 'इंस्टिंक्ट' कहते हैं, जबकि आलोचक 'इंपल्सिव' और 'अनप्रेडिक्टेबल'।
ईरान मामले में भी यही हुआ। बातचीत चल रही थी, लेकिन ट्रंप को 'एहसास' हुआ कि ईरान धोखा दे रहा है। लेविट ने बचाव में कहा, "ये फैसले वैक्यूम में नहीं लिए जाते। राष्ट्रपति ने देखा कि ईरान झूठ बोल रहा है और हमारी संपत्तियों को खतरा है।"
सीजफायर अभी चल रहा है, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ है। ईरान परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रॉक्सी फोर्सेज (हिजबुल्लाह, हूती आदि) अभी भी मुद्दे हैं। अमेरिकी कांग्रेस में बहस हो रही है कि क्या ऐसे फैसलों के लिए ज्यादा पारदर्शिता और इंटेलिजेंस शेयरिंग जरूरी है।
दुनिया देख रही है – क्या 'एहसास' भविष्य की अमेरिकी विदेश नीति का नया आधार बनेगा? या यह सिर्फ एक अनोखा अध्याय साबित होगा?
"यह एक एहसास था..." – ये शब्द अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए हैं। चाहे समर्थक इसे ट्रंप की दूरदर्शिता कहें या आलोचक 'भावुक फैसला', एक बात साफ है – मिडिल ईस्ट की जटिल भू-राजनीति में 'फीलिंग' बनाम 'फैक्ट' का संतुलन हमेशा विवादास्पद रहेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 21,2026