वाशिंगटन, 25 अप्रैल 2026 – अमेरिकी रक्षा सचिव (युद्ध सचिव) पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए ईरान पर लगाई जा रही नाकाबंदी को और सख्त करने का ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका की यह नाकाबंदी न केवल मजबूत हो रही है, बल्कि अब वैश्विक स्तर पर फैल रही है। साथ ही तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसके पास अभी भी वाशिंगटन के साथ “अच्छा समझौता” करने का मौका बाकी है।
हेगसेथ का बयान उन तनावपूर्ण दिनों में आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील गला बन चुका है। विश्व के तेल निर्यात का करीब 20-25 प्रतिशत इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है। ईरान ने इसे अपना रणनीतिक हथियार माना है, लेकिन अमेरिकी नौसेना अब यहां अपना दबदबा स्थापित करने का दावा कर रही है।
“कोई भी जहाज अमेरिकी नौसेना की अनुमति के बिना नहीं गुजर सकता”
हेगसेथ ने जोरदार लहजे में कहा,
> “हमारी नाकाबंदी बढ़ रही है और वैश्विक स्तर पर फैल रही है। कोई भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया में कहीं भी अमेरिकी नौसेना की अनुमति के बिना नहीं जा सकता।”
उन्होंने आगे बताया कि अमेरिकी नौसेना ने अब तक 34 जहाजों को होर्मुज से गुजरने की कोशिश करते हुए वापस भेज दिया है। इनमें ज्यादातर ईरानी बंदरगाहों से जुड़े या ईरान से संबंधित माने जाने वाले जहाज शामिल थे। एक जहाज को जब्त भी किया गया। हेगसेथ ने इसे “आयरनक्लैड ब्लॉकेड” (लोहे जैसी मजबूत नाकाबंदी) करार दिया और कहा कि यह “दिन-प्रतिदिन” मजबूत हो रही है।
दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर जल्द ही इस अभियान में शामिल होने वाला है। अमेरिकी सेना का कहना है कि नाकाबंदी केवल होर्मुज तक सीमित नहीं है – यह गल्फ ऑफ ओमान से लेकर हिंद महासागर और प्रशांत महासागर तक फैली हुई है। “कुछ भी अंदर नहीं, कुछ भी बाहर नहीं” – यही फिलहाल अमेरिकी नीति है।
ईरान को “अच्छा समझौता” का ऑफर, लेकिन चेतावनी भी सख्त
हेगसेथ ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया कि उसके पास अभी भी समय है। उन्होंने कहा,
“ईरान के पास वाशिंगटन के साथ एक अच्छा समझौता करने का अवसर है।”
लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर ईरान होर्मुज में और माइन्स बिछाने या शिपिंग को बाधित करने की कोशिश करता है, तो यह सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा। अमेरिकी सेना को सख्त आदेश हैं – ऐसी किसी भी कोशिश पर “बिना झिझक गोली चलाकर नष्ट” कर दिया जाएगा।
पेंटागन के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ चेयर जनरल डैन केन ने भी ब्रीफिंग में इस नाकाबंदी की पुष्टि की और कहा कि यह ईरान के सभी बंदरगाहों पर लागू है।
वैश्विक प्रभाव: तेल की कीमतें, भारत की चिंता और यूरोप का दबाव
होर्मुज जलडमरूमध्य की अस्थिरता का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। पहले ही तेल की कीमतों में उछाल आ चुका है, जो आगे बढ़ सकता है। भारत जैसे देश, जो अपना बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से आयात करते हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
हेगसेथ ने यूरोप को भी संबोधित करते हुए कहा कि होर्मुज की सुरक्षा यूरोप की जरूरत अमेरिका से ज्यादा है। उन्होंने संकेत दिया कि यूरोपीय देशों को भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
विश्लेषकों का मानना है कि यह नाकाबंदी ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका पहुंचा रही है। ईरान का तेल निर्यात और राजस्व दोनों प्रभावित हो रहे हैं। दूसरी ओर, अमेरिका इसे “ईरान की क्षेत्रीय धमकी को खत्म करने” का रणनीतिक कदम बता रहा है।
पृष्ठभूमि: ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति
यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति का हिस्सा लगता है। अप्रैल 2026 में शुरू हुई इस नाकाबंदी का मकसद ईरान को मेज पर लाकर एक नया समझौता करवाना है, जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों और मिसाइल क्षमता पर अंकुश लगाया जा सके।
ईरान की तरफ से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया में “प्रतिरोध” और “समुद्री स्वतंत्रता” की बात कही जा रही है। तेहरान पहले भी होर्मुज को बंद करने की धमकी दे चुका है, लेकिन अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के आगे यह चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
क्या होगा आगे?
विश्व अब इस सवाल का इंतजार कर रहा है – क्या ईरान “अच्छा समझौता” स्वीकार करेगा या नाकाबंदी और लंबी खिंचेगी? अगर स्थिति बिगड़ी तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, शिपिंग लागत बढ़ेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी।
भारत के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती है – एक ओर ऊर्जा सुरक्षा, दूसरी ओर क्षेत्रीय स्थिरता। नई दिल्ली सतर्क नजर रखे हुए है और कूटनीतिक स्तर पर दोनों पक्षों से संपर्क बनाए हुए है।
पीट हेगसेथ का यह बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि अमेरिका की नई समुद्री रणनीति का प्रदर्शन है। होर्मुज अब केवल एक जलडमरूमध्य नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का मैदान बन चुका है। दुनिया देख रही है कि यह “लोहे की नाकाबंदी” कितने समय तक चलती है और इसका अंतिम नतीजा क्या निकलता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 25,2026