-Friday World-April 19,2026
कल से बीजेपी के सारे सांसद और विधायक एक ही कॉपी-पेस्ट मैसेज चेप रहे हैं – "महिलाओं का अपमान हो गया, महिलाओं का अपमान हो गया!" सोशल मीडिया पर ट्रोल फौज सक्रिय है, प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही हैं और बयानबाजी का सिलसिला चल रहा है। लेकिन सवाल यह है – क्या ये वही लोग हैं जो खुद महिलाओं के सम्मान की रक्षा करते आए हैं? या फिर ये सिर्फ चुनावी और राजनीतिक फायदे के लिए नारी सम्मान का नाटक कर रहे हैं?
जनता अब जाग चुकी है। वो जानती है कि असली सम्मान शब्दों में नहीं, कर्मों में होता है। अगर बीजेपी को महिलाओं का इतना सम्मान है, तो एक सच्चा कदम उठाए – अपनी सीटों से इस्तीफा दें, महिला कार्यकर्ताओं को टिकट दें और चुनाव लड़वाएं। जब संसद में 240 महिला सांसद बैठेंगी, तब मानेंगे कि बीजेपी वाकई नारी शक्ति की पूजक है। फिलहाल तो आंकड़े कुछ और ही कहानी बयान करते हैं। 18वीं लोकसभा में कुल 74 महिला सांसद हैं, जिनमें बीजेपी की सिर्फ 31 हैं – यानी महज 13%। राज्य विधानसभाओं में भी स्थिति बेहतर नहीं।
शब्दों versus कर्म: बीजेपी का दोहरा चेहरा
बीजेपी "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" का नारा लगाती है, लेकिन जब असली संकट आता है तो चुप्पी साध लेती है। उन्नाव कांड याद है? 2017 में उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया। सेंगर को दोषी ठहराया गया और उम्रकैद हुई, लेकिन पीड़िता और परिवार को न्याय मिलने में कितनी मुश्किलें आईं? बाद में सजा पर रोक लगी, पीड़िता को फिर डराया-धमकाया गया। जनता भूली नहीं।
हाथरस कांड 2020 का भी जिक्र जरूरी है। एक दलित युवती से कथित गैंगरेप के बाद उसकी मौत हो गई। परिवार का आरोप था कि पुलिस ने रात के अंधेरे में बिना सहमति के अंतिम संस्कार कर दिया, सबूत मिटाने की कोशिश हुई। सीबीआई जांच हुई, लेकिन मामला अभी भी न्याय की राह देख रहा है। विपक्षी नेता परिवार से मिलने गए तो राजनीति का आरोप लगा, लेकिन सवाल यह है – सरकार ने पीड़िता परिवार को कितना सुरक्षा और न्याय दिलाया?
महिला पहलवानों का आंदोलन 2023 भी ताजा है। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया जैसी चैंपियन खिलाड़ियों ने Wrestling Federation of India के तत्कालीन प्रमुख और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। जंतर-मंतर पर धरना, पदक गंगा में विसर्जित करने की धमकी – सब हुआ। लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी ने कई सवाल खड़े किए। खिलाड़ियों पर दबाव डाला गया, लेकिन आरोपियों को बचाने की कोशिशें दिखीं। ये वही पहलवान हैं जो देश का नाम रोशन करती हैं, लेकिन उनके साथ हुआ सलूक नारी सम्मान का उदाहरण नहीं बन सका।
मणिपुर की घटना 2023 दिल दहला देने वाली थी। जातीय हिंसा के बीच दो महिलाओं को नंगी अवस्था में सड़क पर घुमाया गया, कथित तौर पर गैंगरेप भी हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में गुस्सा फूटा। प्रधानमंत्री ने 79 दिनों बाद चुप्पी तोड़ी और कहा कि "देश शर्मसार हुआ है", लेकिन पहले दो महीने क्यों चुप रहे? मणिपुर में महिलाओं पर अत्याचार की कई घटनाएं हुईं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया धीमी रही।
अभी हाल ही में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में आदिवासी महिलाएं Ken-Betwa नदी लिंकिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं। वे 'चिता आंदोलन' कर रही हैं – प्रतीकात्मक रूप से चिताओं पर लेटकर अपनी जिंदगी दांव पर लगाने का प्रदर्शन। जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह – महिलाएं और बच्चे घंटों पानी में खड़े होकर विरोध जता रही हैं। मांग है उचित मुआवजा और पुनर्वास की। लेकिन सुनवाई कहां है? ये आदिवासी महिलाएं भी नारी शक्ति का हिस्सा हैं, लेकिन विकास के नाम पर उनका शोषण हो रहा है।
बलात्कारियों का स्वागत और नारी सम्मान का दोगलापन
सबसे शर्मनाक बात यह है कि कुछ मामलों में बलात्कारियों या आरोपियों को फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। बिलकिस बानो मामले में दोषियों को रिहा करने पर कुछ बीजेपी नेताओं की मौजूदगी में जश्न मनाया गया। महिला पहलवानों को सड़कों पर घसीटने की बातें भी सामने आईं। और आज वही लोग नारी सम्मान की दुहाई दे रहे हैं।
आंकड़े भी साफ हैं – कई राज्यों में महिला अपराध के केस बढ़े हैं। कई नेताओं पर खुद महिला उत्पीड़न के आरोप हैं। शादी न होने या पारिवारिक मुद्दों की बातें अलग, लेकिन राजनीतिक दलों में महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी साफ दिखती है। बीजेपी में महिला सांसदों की संख्या बढ़ाने के बजाय पुरुष वर्चस्व कायम है।
असली सम्मान कर्म से आता है
नारी सम्मान सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस कदमों से साबित होता है।
- महिलाओं को समान टिकट दें।
- अपराधियों को बिना पक्षपात सजा दिलाएं।
- आंदोलनरत महिलाओं की आवाज सुनें।
- संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण को तुरंत लागू करने की दिशा में काम करें (बिना किसी छुपे एजेंडे के)।
अगर बीजेपी वाकई महिलाओं का सम्मान करती है, तो कॉपी-पेस्ट बयानों से ऊपर उठकर सच्चाई दिखाएं। इस्तीफे दें, महिलाओं को आगे बढ़ाएं। जब 240 महिला सांसद संसद की शोभा बढ़ाएंगी, तब जनता मानेगी कि "नारी तुम्हारा सम्मान" सिर्फ शब्द नहीं, हकीकत है।
जनता याद रखती है – उन्नाव, हाथरस, पहलवान, मणिपुर और छतरपुर की महिलाओं की पीड़ा को। ढोंग अब नहीं चलेगा। असली नारी सम्मान दिखाओ, वरना जनता का गुस्सा और बढ़ेगा।
नारी शक्ति का अपमान बंद करो, सम्मान दो – कर्म से, शब्दों से नहीं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 19,2026