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Saturday, 18 April 2026

अमेरिकी सेना ने 12 साल बाद सीरिया छोड़ा: सैनिक जॉर्डन लौटे, दमिश्क सरकार बोली – अब पूरे देश में एक ही वहीवट चलेगा

अमेरिकी सेना ने 12 साल बाद सीरिया छोड़ा: सैनिक जॉर्डन लौटे, दमिश्क सरकार बोली – अब पूरे देश में एक ही वहीवट चलेगा
-Friday World-April 19,2026 
सीरिया की जंग-जर्जर ज़मीन पर अमेरिका की सैन्य मौजूदगी का एक लंबा अध्याय आखिरकार खत्म हो गया। अप्रैल 2026 में, ठीक 12 साल बाद, अमेरिकी फौज ने आखिरी बेस **कसराक एयर बेस** (हसाका प्रांत) खाली कर दिया। अंतिम काफिला रात के अंधेरे में जॉर्डन की ओर रवाना हुआ। सीरियाई सरकार ने इसे देश की पूर्ण संप्रभुता की बहाली बताया और साफ कहा – “अब सीरिया में एक ही प्रशासन चलेगा, कोई अलग क्षेत्र या बाहरी नियंत्रण नहीं रहेगा।”

यह घटना न सिर्फ सीरिया के लिए, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की भू-राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो रही है। ISIS के खिलाफ शुरू हुई यह मुहिम अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां दमिश्क खुद को मजबूत कर रहा है और क्षेत्रीय शक्तियां नई संतुलन की तलाश में हैं।

 2014 से 2026 तक: अमेरिका की सीरिया यात्रा

साल 2014 में जब इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने सीरिया और इराक के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया था, तब अमेरिका ने इंटरनेशनल कोएलिशन बनाकर हस्तक्षेप किया। मुख्य उद्देश्य था – कुर्द नेतृत्व वाली **सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF)** को सपोर्ट देकर ISIS को कुचलना। अमेरिकी सैनिकों ने उत्तर-पूर्वी सीरिया में कई बेस स्थापित किए, जिनमें अल-तनफ, कसराक और शद्दादी जैसे अहम ठिकाने शामिल थे।

2019 तक ISIS का भौगोलिक खलिफा खत्म हो चुका था, लेकिन अमेरिका ने अपने सैनिकों को पूरी तरह वापस नहीं बुलाया। ट्रंप प्रशासन के समय में वापसी की कोशिशें हुईं, लेकिन कई बार प्लान बदल गए। बाइडेन और फिर दोबारा ट्रंप के कार्यकाल में भी अमेरिकी फौज (लगभग 900-2000 सैनिक) वहां बनी रही। मकसद था – ISIS की स्लीपर सेल्स को दबाए रखना, ईरान समर्थित मिलिशिया पर नजर रखना और कुर्द सहयोगियों को सुरक्षा देना।

लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सरकार गिरने और अहमद अल-शरा (जिन्हें अबू मोहम्मद अल-जौलानी के नाम से भी जाना जाता है) के नेतृत्व वाली नई सरकार के सत्ता में आने के बाद परिदृश्य बदल गया। नई सरकार ने SDF के साथ समझौता किया, कुर्द लड़ाकों को राष्ट्रीय सेना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की और अमेरिका से साफ कहा कि अब विदेशी सैन्य ठिकानों की जरूरत नहीं है।

ट्रंप प्रशासन ने इसे “शर्तों पर आधारित संक्रमण” बताया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा, “हमने सभी प्रमुख बेस सौंप दिए हैं। हम ISIS के स्थायी पराजय के लिए पार्टनर-लेड काउंटर-टेररिज्म को सपोर्ट जारी रखेंगे, लेकिन स्थायी बेस नहीं रखेंगे।”

अप्रैल 2026 में आखिरी काफिला कसराक एयर बेस से निकला। सैकड़ों ट्रक, आर्मर्ड वाहन और उपकरण जॉर्डन की सीमा पार कर गए। लगभग 2000 अमेरिकी सैनिक अब जॉर्डन में तैनात किए जा रहे हैं, ताकि इराक या सीरिया से गुजरते समय ईरान समर्थित समूहों के हमलों से बचा जा सके।

 सीरियाई सरकार का दावा: एक देश, एक प्रशासन

सीरिया के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि “सीरियाई राज्य उन क्षेत्रों पर अपनी संप्रभुता बहाल कर रहा है जो पहले उसके नियंत्रण से बाहर थे, जिसमें उत्तर-पूर्व और सीमा क्षेत्र शामिल हैं। यह एकता की दिशा में निरंतर प्रयासों का नतीजा है।”

नई सरकार ने सभी खाली हुए बेसों पर तुरंत कब्जा कर लिया। सीरियाई सेना अब हसाका, दैर अज-जोर और अन्य इलाकों में तैनात हो रही है। कुर्द SDF को राष्ट्रीय ढांचे में शामिल करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार का मानना है कि अब कोई “अलग प्रशासन” नहीं चलेगा – पूरे देश में दमिश्क का एक ही वहीवट चलेगा।

यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले सालों में सीरिया कई टुकड़ों में बंटा हुआ था – असद शासन, कुर्द क्षेत्र, तुर्की समर्थित इलाके, ISIS के बचे हुए ठिकाने और विदेशी ठिकाने। अब एकता की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह वापसी?

1. ISIS खतरे का नया संतुलन: अमेरिका का कहना है कि ISIS का भौगोलिक नियंत्रण खत्म हो चुका है, लेकिन स्लीपर सेल्स अभी भी सक्रिय हैं। अब जिम्मेदारी मुख्य रूप से सीरियाई सरकार और उसके सहयोगियों पर आएगी। कुछ विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि अगर नई सरकार कमजोर पड़ी तो ISIS दोबारा सिर उठा सकता है।

2. क्षेत्रीय शक्तियों का खेल: ईरान, रूस, तुर्की और इजराइल इस बदलाव को करीब से देख रहे हैं। रूस पहले से सीरिया में मौजूद है। ईरान समर्थित मिलिशिया अमेरिकी वापसी को अपनी जीत मान सकते हैं। तुर्की कुर्द मुद्दे पर सतर्क है। इजराइल सीरिया में ईरानी प्रभाव बढ़ने से चिंतित है।

3. अमेरिका की नई रणनीति: ट्रंप प्रशासन “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत विदेशी जंगों से दूरी बना रहा है। सीरिया से पूर्ण निकासी इसका हिस्सा है। हालांकि, अमेरिका हवाई हमलों या सलाहकार भूमिका से पूरी तरह हाथ नहीं खींचेगा।

4. कुर्दों का भविष्य: SDF ने ISIS के खिलाफ सबसे बड़ा बलिदान दिया। अब उन्हें दमिश्क के साथ समझौता करना पड़ रहा है। अगर एकीकरण शांतिपूर्ण रहा तो सीरिया मजबूत होगा, वरना नई तनाव की संभावना बनी रहेगी।

 मध्य पूर्व के लिए क्या मतलब?

यह वापसी 2011 से शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध के एक लंबे दौर को समाप्त करती है। असद के पतन के बाद नई सरकार स्थिरता लाने की कोशिश कर रही है। अगर सफल रही तो सीरिया में शरणार्थियों की वापसी, अर्थव्यवस्था की बहाली और क्षेत्रीय शांति संभव है। लेकिन चुनौतियां कम नहीं – आर्थिक संकट, जातीय-धर्मीय तनाव और पड़ोसी देशों के हस्तक्षेप।

अमेरिकी मीडिया और विश्लेषकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ इसे “सही समय पर सही फैसला” बता रहे हैं, जबकि अन्य ISIS के दोबारा उभरने का खतरा बता रहे हैं।

 भविष्य की ओर

सीरिया अब खुद को संभालने की चुनौती का सामना कर रहा है। एक मजबूत, एकीकृत और संप्रभु सीरिया न सिर्फ अपने नागरिकों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए स्थिरता ला सकता है। अमेरिका की वापसी इस प्रक्रिया को तेज करेगी या नई जटिलताएं पैदा करेगी, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।

फिलहाल, कसराक एयर बेस पर सीरियाई झंडा लहरा रहा है और जॉर्डन की ओर जाते अमेरिकी काफिले धूल उड़ाते हुए दूर जा रहे हैं। 12 साल की सैन्य यात्रा का अंत हो चुका है, लेकिन सीरिया की नई कहानी अभी शुरू हुई है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 19,2026