-Friday World-April 20,2026
इस्लामाबाद/वाशिंगटन: वैश्विक तनाव के बीच एक नया मोड़! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें तेहरान ने कहा था कि वह पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता के नए दौर में शामिल नहीं होगा। ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए विशेष साक्षात्कार में साफ कहा – “हमें बातचीत करनी है। मैं मानता हूं कि इस समय कोई खेल नहीं खेल रहा है।”
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर कोई ठोस प्रगति हुई तो वह ईरान के वरिष्ठ नेताओं से सीधे मुलाकात करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “मुझे उनसे मिलने में कोई दिक्कत नहीं है। अगर वे मिलना चाहते हैं और हमारे पास सक्षम लोग हैं, तो मैं खुद मिल सकता हूं।”
उच्च-स्तरीय अमेरिकी डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंच रहा
सोमवार सुबह ट्रंप ने पुष्टि की कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर चर्चाओं की तैयारी के लिए अमेरिका से इस्लामाबाद रवाना हो गए हैं। ट्रंप ने कहा, “वे अभी वहां जा रहे हैं। वे आज रात इस्लामाबाद समय के अनुसार पहुंच जाएंगे।”
यह दूसरा दौर की वार्ता है, जो ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने और **नाभिकीय कार्यक्रम** पर अंकुश लगाने के प्रयास का हिस्सा है। पहला दौर भी पाकिस्तान की राजधानी में हुआ था, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। अब युद्धविराम की समय-सीमा समाप्त होने वाली है और दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हुई हैं।
ईरान का दावा vs ट्रंप का आत्मविश्वास
ईरान ने दावा किया था कि अमेरिका की “अवास्तविक मांगों” और फारस की खाड़ी में जारी नौसैनिक ब्लॉकेड के कारण वह वार्ता में शामिल नहीं होगा। तेहरान ने अमेरिकी मांगों को खारिज करते हुए कहा कि वे अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे।
लेकिन ट्रंप पूरी तरह आश्वस्त नजर आए। उन्होंने कहा, “हम बातचीत करने वाले हैं।” उन्होंने ईरान की चिंताओं को खारिज करते हुए जोर दिया कि कोई भी पक्ष “खेल” नहीं खेल रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की मुख्य मांग अब भी वही है – ईरान को परमाणु हथियार बनाने से पूरी तरह दूर रहना होगा।
ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि अगर कोई ब्रेकथ्रू होता है तो वह खुद ईरानी नेतृत्व से मिलने में पीछे नहीं हटेंगे। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप पहले भी पाकिस्तान जाने का संकेत दे चुके हैं।
पृष्ठभूमि: ईरान-अमेरिका तनाव और पाकिस्तान की भूमिका
पिछले कुछ हफ्तों में ईरान और अमेरिका (साथ में इजराइल) के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में नौसैनिक ब्लॉकेड, ईरानी जहाजों पर कार्रवाई और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन बाधित होने से वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
पाकिस्तान ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। इस्लामाबाद ने दोनों देशों से संपर्क बनाए रखा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से ट्रंप की हालिया फोन बातचीत में हॉर्मुज ब्लॉकेड पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार ट्रंप ने मुनीर के सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया।
पाकिस्तान की इस भूमिका को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस्लामाबाद ने होटलों और परिवहन व्यवस्था को भी वार्ता के मद्देनजर तैयार रखा है।
क्या है स्टेक?
- युद्धविराम की समय-सीमा: वर्तमान युद्धविराम इस सप्ताह समाप्त होने वाला है। अगर नया समझौता नहीं हुआ तो संघर्ष फिर भड़क सकता है।
- नाभिकीय मुद्दा: अमेरिका ईरान से परमाणु कार्यक्रम छोड़ने की मांग पर अड़ा है।
- आर्थिक प्रभाव: हॉर्मुज ब्लॉकेड से विश्व अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। तेल की कीमतें बढ़ने से भारत समेत कई देशों को महंगाई का खतरा है।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: अगर वार्ता विफल हुई तो मध्य पूर्व में नया संघर्ष शुरू हो सकता है, जिसका असर दक्षिण एशिया तक पहुंच सकता है।
ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि अमेरिका “नाइस वे या हार्ड वे” दोनों विकल्पों के लिए तैयार है। उन्होंने पहले भी कहा था – “डील हो जाएगी, या फिर बहुत कुछ होगा।”
आगे क्या?
अभी ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है कि उनकी टीम इस्लामाबाद पहुंचेगी या नहीं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि तेहरान पुनर्विचार कर रहा है। अमेरिकी डेलिगेशन के पहुंचने के बाद स्थिति साफ हो सकेगी।
ट्रंप के बयान से लगता है कि अमेरिका आशान्वित है। उन्होंने कहा, “हमारे पास सक्षम लोग हैं।” जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की टीम को “A-टीम” कहा जा रहा है।
दुनिया भर के राजनयिक इस्लामाबाद की इन वार्ताओं पर नजर रखे हुए हैं। अगर कोई सकारात्मक परिणाम निकला तो यह न सिर्फ ईरान-अमेरिका संबंधों में नया अध्याय होगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी राहत की खबर होगी।
ट्रंप ने ईरान के इनकार को ‘खेल’ नहीं मानते हुए वार्ता आगे बढ़ाने का फैसला किया है। अब सबकी निगाहें इस्लामाबाद पर हैं – क्या यह दौर सफल होगा या फिर तनाव बढ़ेगा? समय बताएगा, लेकिन ट्रंप का आत्मविश्वास और तैयारियां साफ संकेत दे रही हैं कि अमेरिका डील चाहता है – शांतिपूर्ण या दबाव के साथ।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 20,2026