पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की लपटें अब सीधे भारत की समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा को छू रही हैं। शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गनबोट्स ने भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर गोलाबारी कर दी। इस घटना में कोई जान-माल की भारी क्षति नहीं हुई और सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं, लेकिन इससे वैश्विक तेल मार्ग पर गहरा संकट पैदा हो गया है। भारत सरकार ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब किया।
यह घटना दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में अचानक उभरे तनाव का हिस्सा है, जहां से वैश्विक तेल का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में इस रणनीतिक मार्ग पर फिर से सख्त नियंत्रण लगा दिया है और चेतावनी दी है कि बिना उसकी अनुमति के कोई भी जहाज यहां से नहीं गुजर सकेगा।
घटना का विस्तृत विवरण
शनिवार को दोपहर के आसपास IRGC की दो गनबोट्स ने होर्मुज स्ट्रेट में एक टैंकर पर अचानक गोलाबारी शुरू कर दी। ब्रिटिश सेना की यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इसकी पुष्टि की। टैंकर मास्टर ने रिपोर्ट किया कि गनबोट्स ने कोई VHF चेतावनी दिए बिना फायरिंग की।
इस हमले में शामिल दो जहाज भारतीय ध्वज वाले थे। इनमें से एक बहुत बड़ा क्रूड ऑयल कैरियर (VLCC) था, जिस पर लगभग 20 लाख बैरल इराकी कच्चा तेल लदा हुआ था। टैंकरट्रैकर्स.कॉम जैसी शिपिंग ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार, गोलाबारी के बाद दोनों भारतीय जहाजों को जान बचाने के लिए यू-टर्न लेकर वापस लौटना पड़ा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, टैंकर 'सanmar Herald' को भी फायरिंग का सामना करना पड़ा, हालांकि क्रू ने रेडियो पर चीखते हुए कहा कि "आपने हमें क्लियरेंस दी थी, अब फायरिंग क्यों कर रहे हैं?"
UKMTO ने स्पष्ट किया कि टैंकर और क्रू दोनों सुरक्षित हैं। कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी। कुछ रिपोर्टों में एक कंटेनर जहाज पर भी गोलीबारी का जिक्र है, जिसमें हल्का नुकसान हुआ।
भारत की त्वरित कूटनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के कुछ घंटों के अंदर ही भारत सरकार ने सख्त कदम उठाया। विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत **डॉ. मोहम्मद फथली** को तलब किया। राजदूत विदेश मंत्रालय पहुंचे और भारत ने गहरी चिंता जताते हुए सुरक्षित समुद्री पारगमन सुनिश्चित करने की मांग की।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत ने ईरानी पक्ष से कहा कि भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। राजदूत ने आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को तेहरान तक उठाएंगे। भारत जल्द ही एक आधिकारिक बयान जारी कर सकता है।
यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि भारत ईरान से तेल आयात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है और होर्मुज स्ट्रेट उसकी ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ईरान का रुख: "हमारी अनुमति के बिना कोई गुजर नहीं सकता"
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अमेरिका अगर उसके बंदरगाहों पर नाकाबंदी नहीं हटाता, तो होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा। IRGC ने कहा कि स्ट्रेट अब उसके पूर्ण नियंत्रण में है। जहाजों को केवल IRGC की अनुमति और निरीक्षण के बाद ही गुजरने दिया जाएगा।
यह कदम अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव का नतीजा है। हाल ही में हुए संघर्ष के बाद स्ट्रेट कुछ समय के लिए खुला बताया गया था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रहेगी। इससे भड़के ईरान ने फिर से मार्ग बंद करने की घोषणा कर दी।
शुक्रवार देर रात जहाज मालिकों को रेडियो पर चेतावनी मिली थी कि बिना अनुमति के प्रवेश करने पर कार्रवाई होगी। अब गोलाबारी के साथ यह चेतावनी अमल में लाई गई लगती है।
क्यों बढ़ रहा है तनाव? विरोधाभास के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटना के पीछे कई परतें हैं:
1. ईरान के अंदर सत्ता का संघर्ष: राजनीतिक नेतृत्व और शक्तिशाली IRGC के बीच तालमेल की कमी दिख रही है। IRGC सख्त रुख अपनाए हुए है और कह रहा है कि बिना उसकी मंजूरी के कोई जहाज नहीं गुजरेगा।
2. अमेरिकी नाकाबंदी: ट्रंप प्रशासन ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रखने का ऐलान किया, जबकि स्ट्रेट को खुला बताने का दावा किया। ईरान इसे अपने संप्रभु अधिकारों पर हमला मान रहा है।
3. वैश्विक तेल बाजार पर असर: होर्मुज से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। अगर 22 अप्रैल तक अमेरिका-ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हुआ, तो युद्धविराम खत्म होने के साथ तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आ सकता है। भारत जैसे आयातक देशों पर इसका सीधा बोझ पड़ेगा।
भारत के लिए चुनौतियां और प्रभाव
भारत के लिए यह घटना कई मायनों में चिंताजनक है:
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत इराक, सऊदी अरब आदि से तेल आयात करता है, जो होर्मुज से होकर आता है। जहाजों को वापस लौटना पड़ना सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
- नाविकों की सुरक्षा: सैकड़ों भारतीय नाविक इस रूट पर काम करते हैं। सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने होंगे।
- आर्थिक प्रभाव: तेल कीमतों में बढ़ोतरी से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिसका असर आम आदमी पर पड़ेगा।
भारतीय नौसेना और विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि भारत को तटस्थ रहते हुए सभी पक्षों से बातचीत जारी रखनी चाहिए और वैकल्पिक रूट्स या आपूर्ति स्रोतों की तलाश करनी चाहिए।
आगे क्या?
वर्तमान में क्रू सदस्य सुरक्षित हैं और जहाजों को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा। लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो यह क्षेत्रीय संघर्ष को नई ऊंचाई दे सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देश भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
भारत जैसे शांतिप्रिय देशों को उम्मीद है कि कूटनीति से जल्द समाधान निकलेगा, ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। होर्मुज स्ट्रेट न सिर्फ तेल का रास्ता है, बल्कि वैश्विक स्थिरता का प्रतीक भी है। इस संकट से उबरने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना होगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 18,2026