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Saturday, 18 April 2026

ट्रम्प Vs नेतन्याहू: लेबनान सीजफायर पर अमेरिका-इजराइल में गहरी दरार, व्हाइट हाउस में हड़कंप

ट्रम्प Vs नेतन्याहू: लेबनान सीजफायर पर अमेरिका-इजराइल में गहरी दरार, व्हाइट हाउस में हड़कंप
-Friday World-April 18,2026 
वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच रणनीतिक साझेदारी में पहली बार स्पष्ट तनाव के संकेत दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लेबनान में जारी 10-दिन के युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर शुक्रवार को जोरदार घोषणा की, जिससे इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी टीम स्तब्ध रह गई। ट्रम्प ने अपनी ट्रुथ सोशल पोस्ट में साफ कहा कि इजराइल अब लेबनान पर बमबारी नहीं कर सकता — “वे अमेरिका द्वारा PROHIBITED हैं। Enough is enough!!”

यह बयान सीजफायर समझौते के आधिकारिक टेक्स्ट से बिल्कुल अलग था, जिसमें इजराइल को “योजनाबद्ध, आगामी या चल रहे हमलों” के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार दिया गया था। इजराइली पक्ष ने इसे अमेरिकी दबाव और अपमानजनक हस्तक्षेप माना। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू और उनके सलाहकार ट्रम्प के पोस्ट से पूरी तरह हैरान थे और उन्होंने व्हाइट हाउस से तुरंत स्पष्टीकरण मांगा।

 घटना का पूरा क्रम
गुरुवार को ट्रम्प ने घोषणा की कि इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर शुरू हो रहा है। उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइली पीएम नेतन्याहू से बातचीत का जिक्र किया और कहा कि दोनों देशों के बीच शांति के लिए यह पहला कदम है। ट्रम्प ने आगे कहा कि वे दोनों नेताओं को व्हाइट हाउस बुलाएंगे — 1983 के बाद इजराइल और लेबनान के बीच पहली बार ऐसी सीधी बातचीत का मौका।

लेकिन अगले ही दिन शुक्रवार को ट्रम्प का टोन बदल गया। उन्होंने लिखा:  
“इजराइल अब लेबनान पर बमबारी नहीं करेगा। वे अमेरिका द्वारा PROHIBITED हैं। Enough is enough!!!”

यह बयान इजराइली सरकार के लिए बड़ा झटका था। इजराइल का तर्क है कि सीजफायर में आक्रामक कार्रवाई पर रोक है, लेकिन आत्मरक्षा का अधिकार बरकरार है। ट्रम्प के शब्दों ने इसे पूरी तरह नकार दिया, जिससे तेल अवीव में नाराजगी बढ़ गई। इजराइली अधिकारियों ने व्हाइट हाउस से स्पष्टीकरण मांगा। बाद में अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आक्रामक ऑपरेशंस नहीं होंगे, लेकिन आत्मरक्षा का अधिकार बना रहेगा। फिर भी, ट्रम्प की कड़ी भाषा ने दोनों देशों के बीच विश्वास की दरार को उजागर कर दिया।

 क्यों नाराज हैं नेतन्याहू?
- अचानक घोषणा: ट्रम्प ने सीजफायर और संबंधित बयान से पहले इजराइल को पूरी तरह विश्वास में नहीं लिया। नेतन्याहू को मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला।
- राजनीतिक दबाव: नेतन्याहू के लिए यह सीजफायर पहले से ही संवेदनशील मुद्दा है। इजराइल में कई लोग इसे हिजबुल्लाह के खिलाफ “पूर्ण विजय” न मिलने के रूप में देख रहे हैं। ट्रम्प का “Enough is enough” वाला बयान इजराइल को कमजोर दिखाने वाला माना जा रहा है।
- ईरान से जुड़ी कूटनीति: ट्रम्प ईरान के साथ बड़े समझौते की कोशिश कर रहे हैं। लेबनान (जहां हिजबुल्लाह ईरान समर्थित है) में शांति उस डील के लिए जरूरी मानी जा रही है। इजराइल इसे अपनी सुरक्षा से समझौता मान रहा है।

 व्हाइट हाउस में दौड़-धूप
घटना के बाद व्हाइट हाउस में हलचल मच गई। अमेरिकी अधिकारियों ने इजराइल को आश्वासन देने की कोशिश की कि आत्मरक्षा का अधिकार बरकरार है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन को इजराइल-लेबनान के बीच स्थायी शांति के लिए काम करने का निर्देश दिया गया है।

ट्रम्प ने अलग से पोस्ट में लिखा कि यह डील ईरान से जुड़ी नहीं है, लेकिन “Make Lebanon Great Again” का नारा भी दिया। उन्होंने कहा कि लेबनान और इजराइल के बीच 34 साल बाद सीधी बातचीत हो रही है।

 क्षेत्रीय संदर्भ और प्रभाव
लेबनान में यह तनाव हिजबुल्लाह के साथ इजराइल के छह सप्ताह से ज्यादा चले संघर्ष का नतीजा है। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में भारी बमबारी की थी। सीजफायर में इजराइली सैनिकों को दक्षिण लेबनान से वापस बुलाने की कोई शर्त नहीं है, जो इजराइल के लिए राहत की बात है, लेकिन हिजबुल्लाह की मौजूदगी बनी हुई है।

यह घटना ट्रम्प की “अमेरिका फर्स्ट” नीति और इजराइल के साथ पारंपरिक “अनशेकेबल बॉन्ड” के बीच बढ़ते अंतर को दिखाती है। ट्रम्प ईरान के साथ डील करना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू हिजबुल्लाह और ईरान को पूरी तरह कमजोर करना चाहते हैं।

 दोनों पक्षों के लिए चुनौतियां
इजराइल के लिए:  
- घरेलू राजनीति में नेतन्याहू पर दबाव बढ़ेगा। अगर सीजफायर टूटा तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।  
- हिजबुल्लाह के हमलों से उत्तरी इजराइल की सुरक्षा अभी भी खतरे में है।

ट्रम्प प्रशासन के लिए:  
- मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने का दावा मजबूत करना है, खासकर ईरान डील के लिए।  
- इजराइल जैसे करीबी सहयोगी को नाराज नहीं करना चाहते, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता प्राथमिकता है।

लेबनान के लिए:  
- सीजफायर से राहत मिली है, लेकिन हिजबुल्लाह की ताकत और इजराइली सैनिकों की मौजूदगी चुनौती बनी हुई है। लेबनान के राष्ट्रपति ने ट्रम्प को धन्यवाद दिया है।

 आगे क्या?
वर्तमान में 10-दिन का सीजफायर लागू है। दोनों पक्षों के बीच व्हाइट हाउस में बातचीत प्रस्तावित है। अगर यह सफल रही तो स्थायी शांति की संभावना बढ़ेगी, वरना तनाव फिर बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दरार अस्थायी हो सकती है, क्योंकि अमेरिका और इजराइल के बीच रक्षा, खुफिया और आर्थिक सहयोग बहुत गहरा है। लेकिन ट्रम्प की अप्रत्याशित और कड़ी भाषा ने दिखा दिया कि मध्य पूर्व में अमेरिकी नीति अब पहले से ज्यादा “ट्रम्प सेंट्रीक” हो गई है।

यह घटना याद दिलाती है कि भले ही दोनों देश लंबे समय से सहयोगी रहे हों, लेकिन राष्ट्रीय हितों और व्यक्तिगत नेतृत्व शैली के टकराव से रिश्ते में तनाव आ सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 18,2026