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Tuesday, 28 April 2026

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी का तीखा हमला: "अजय पाल शर्मा को तुरंत सस्पेंड करो" — बंगाल चुनाव में विवाद की नई आंच।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी का तीखा हमला: "अजय पाल शर्मा को तुरंत सस्पेंड करो" — बंगाल चुनाव में विवाद की नई आंच।
-Friday World – April 28, 2026
नई दिल्ली/कोलकाता, 28 अप्रैल 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से ठीक पहले एक नया विवाद गरमा गया है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सैयद यासीन कुरैशी (S.Y. Qureshi) ने उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी **अजय पाल शर्मा** को तुरंत सस्पेंड करने की मांग की है। 

कुरैशी, जिन्हें चुनाव सुधारों और निष्पक्षता के सख्त पैरोकार के रूप में जाना जाता है, ने कहा कि शर्मा की तैनाती और उनके हालिया बर्ताव से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर अधिकारी को सस्पेंड किया जाए ताकि मतदान की शुचिता बनी रहे।

 कौन हैं अजय पाल शर्मा?

अजय पाल शर्मा यूपी पुलिस में ‘सिंघम और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए चर्चा बटोरी है। हाल ही में चुनाव आयोग ने उन्हें पश्चिम बंगाल के संवेदनशील जिले दक्षिण 24 परगना में पुलिस पर्यवेक्षक (Police Observer) के रूप में तैनात किया। यह क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत गढ़ के रूप में जाना जाता है और यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का खासा प्रभाव है।

शर्मा की तैनाती के बाद से विवाद शुरू हो गया। एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के इलाके में पहुंचकर कड़ी चेतावनी देते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, “जहांगीर खान के वोटरों को धमकाने की खबरें आ रही हैं। अगर कोई गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा तो हम उसकी अच्छे से खबर लेंगे।” 

इसके अलावा, एक पुराना वीडियो भी सामने आया जिसमें शर्मा बार डांसर के साथ नाचते हुए दिख रहे हैं, जिसे विपक्षी दल ‘हीरोगिरी’ और ‘अशोभनीय बर्ताव’ बता रहे हैं।

TMC का तीखा विरोध

तृणमूल कांग्रेस ने शर्मा की तैनाती को “बीजेपी और यूपी मॉडल थोपने” की साजिश बताया। TMC नेता जहांगीर खान, महुआ मोइत्रा और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि शर्मा निष्पक्ष पर्यवेक्षक नहीं, बल्कि “भय का माहौल” बनाने आए हैं। अखिलेश यादव समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए।

TMC का कहना है कि एक ऐसे अधिकारी को, जिसकी छवि “सख्त और विवादास्पद” है, संवेदनशील क्षेत्र में भेजना चुनावी समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है।

एस.वाई. कुरैशी का तर्क

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा:

“चुनाव आयोग का काम निष्पक्षता और विश्वास बनाए रखना है। जब कोई अधिकारी विवादों में घिर जाता है और उसके बर्ताव से एक पक्ष को डर लगने लगे, तो तुरंत कार्रवाई जरूरी है। अजय पाल शर्मा को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए ताकि चुनावी प्रक्रिया पर कोई आंच न आए।”

कुरैशी ने याद दिलाया कि चुनाव आयोग को न केवल कानून का पालन करना चाहिए, बल्कि निष्पक्षता की भावना (perception of fairness) भी बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी की वजह से मतदाताओं या उम्मीदवारों में भय या अविश्वास का माहौल बनता है, तो वह लोकतंत्र के लिए खतरा है।

 चुनाव आयोग की भूमिका और चुनौतियां

चुनाव आयोग ने शर्मा को इसलिए चुना क्योंकि दक्षिण 24 परगना में पिछले चुनावों में हिंसा और बूथ कैप्चरिंग की शिकायतें रही हैं। आयोग का मानना है कि एक सख्त अधिकारी के जरिए फ्री और फेयर पोलिंग सुनिश्चित की जा सकती है।

हालांकि, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी जैसे अनुभवी लोगों का कहना है कि सख्ती और निष्पक्षता में संतुलन जरूरी है। अत्यधिक सख्ती भी पूर्वाग्रह का आरोप लगवा सकती है।

 बंगाल चुनाव का संदर्भ

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 बेहद हाई-वोल्टेज माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस सत्ता बचाने की जंग लड़ रही है, जबकि भाजपा और अन्य विपक्षी दल मजबूत चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में हर छोटी घटना राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग को इस मामले में पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए। अगर शर्मा के खिलाफ ठोस सबूत हैं, तो सस्पेंड करना उचित होगा। अगर आरोप राजनीतिक हैं, तो आयोग को अपनी तैनाती की रक्षा करते हुए स्पष्टीकरण देना चाहिए।

 निष्पक्ष चुनाव: लोकतंत्र की आत्मा

एस.वाई. कुरैशी का बयान एक बार फिर याद दिलाता है कि चुनाव आयोग भारत के लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसका विश्वास जनता के मन में बना रहे, यही सबसे बड़ी चुनौती है। 

पूर्व सीईसी ने जोर दिया कि अधिकारी चाहे कितने भी सक्षम हों, अगर उनकी छवि विवादास्पद है तो उसे संवेदनशील ड्यूटी से हटाया जाना चाहिए। लोकतंत्र में “न्याय” नहीं, “न्याय का दिखना” भी उतना ही जरूरी है।

 आगे क्या?

अभी तक चुनाव आयोग की ओर से अजय पाल शर्मा पर कोई आधिकारिक कार्रवाई की खबर नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आयोग इस मामले पर जल्द कोई फैसला ले सकता है। 

यह घटना बंगाल चुनाव को और रोचक बना रही है। क्या शर्मा अपनी ड्यूटी जारी रख पाएंगे? या कुरैशी की मांग पर आयोग उन्हें सस्पेंड कर देगा? समय बताएगा।

लेकिन एक बात साफ है — चुनाव सुधारों और निष्पक्षता के पैरोकार एस.वाई. कुरैशी ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। उनकी मांग लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World – April 28, 2026

यह आलेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्टों, एस.वाई. कुरैशी के बयान और पश्चिम बंगाल चुनाव की वर्तमान स्थिति पर आधारित है। इसका उद्देश्य घटना का संतुलित और तथ्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करना है। चुनाव प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील विषय है और हर पक्ष की बात सुनना जरूरी है।