Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Monday, 20 April 2026

यूएस वॉरशिप पर खाने के फाँफे! दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना के सैनिक भूखे पेट सोने को मजबूर

यूएस वॉरशिप पर खाने के फाँफे! दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना के सैनिक भूखे पेट सोने को मजबूर
-Friday World-April 20,2026 
अरब सागर में ईरान के खिलाफ तनाव और सशस्त्र संघर्ष के बीच अमेरिकी नौसेना की दो प्रमुख युद्धपोतों — USS ट्रिपोली और USS अब्राहम लिंकन — पर खाने की भयावह कमी की खबरें सामने आई हैं। परिवारों को भेजे गए फोटो में लंच ट्रे लगभग खाली नजर आ रही हैं — सिर्फ मुट्ठी भर कटा हुआ मांस का टुकड़ा और एक मुड़ी हुई टॉर्टिला, या फिर उबले गाजर, सूखा मीट पैटी और ग्रे प्रोसेस्ड मीट का स्लैब। 

ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं और पूरी दुनिया में अमेरिकी नौसेना की मज़ाक उड़ाई जा रही है। कुछ ही महीने पहले टॉयलेट ब्लॉक होने की घटना पर भी ठिठोली हुई थी, अब खाने की कमी ने सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या दुनिया की सबसे महंगी और ताकतवर नौसेना भी लंबे संघर्ष के लिए तैयार नहीं है?

 पहले टॉयलेट ब्लॉक, अब खाने की कमी
ईरान के खिलाफ ऑपरेशन शुरू होने से पहले अरब सागर में तैनात एक अमेरिकी वॉरशिप पर टॉयलेट सिस्टम ब्लॉक हो जाने की घटना ने सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया था। हजारों सैनिकों के लिए सीमित शौचालयों की वजह से लंबी कतारें लग रही थीं। अब उसी क्षेत्र में तैनात जहाजों पर खाने की समस्या उभरी है।
USA Today की रिपोर्ट के अनुसार, USS ट्रिपोली पर तैनात एक महिला मरीन ने अपने परिवार को लंच ट्रे का फोटो भेजा। ट्रे में सिर्फ थोड़ा सा शेडेड मीट और एक फोल्डेड टॉर्टिला था। इसी तरह USS अब्राहम लिंकन पर एक डिनर की तस्वीर में मुट्ठी भर उबले गाजर, सूखा मीट पैटी और प्रोसेस्ड मीट का ग्रे टुकड़ा दिखाई दिया। परिवार वाले हैरान हैं कि इतनी बड़ी नौसेना में सैनिकों को इतना कम और बेस्वाद खाना क्यों मिल रहा है।

 परिवारों की चिंता और राशनिंग की मजबूरी
एक पिता (जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बात की) ने बताया कि उनकी बेटी USS ट्रिपोली पर है। वह लिखती है — “जब खाना उपलब्ध होता है तो हम खाते हैं, जब कम होता है तो बराबर बाँटते हैं। अगर सप्लाई और घट गई तो हमारा मनोबल सबसे नीचे स्तर पर पहुँच जाएगा।”

पश्चिम वर्जीनिया की एक पादरी ने बताया कि उनके समुदाय के एक सदस्य का बेटा अब्राहम लिंकन पर तैनात है। उसने बताया — “खाना बेस्वाद है, मात्रा बहुत कम है और सैनिक हमेशा भूखे रहते हैं।”

परिवार वाले अब कुकीज, डियोडोरेंट, मोजे, टूथपेस्ट जैसी जरूरी चीजें पैक करके भेजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर पार्सल अटके पड़े हैं। अप्रैल 2026 की शुरुआत से US Postal Service ने मध्य पूर्व के 27 मिलिट्री ZIP कोड्स पर डिलीवरी अस्थायी रूप से रोक दी है। वजह — गल्फ एयरस्पेस बंद होना और संघर्ष से जुड़ी लॉजिस्टिकल दिक्कतें।

 नौसेना का बचाव और विवाद
अमेरिकी नौसेना ने इन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीफ ऑफ नेवल ऑपरेशंस एडमिरल डैरिल कॉडल ने कहा — “तैनात जहाजों पर खाने की कमी और खराब गुणवत्ता की रिपोर्टें गलत हैं। USS अब्राहम लिंकन और USS ट्रिपोली दोनों पर पर्याप्त खाना उपलब्ध है और स्वस्थ विकल्प दिए जा रहे हैं।”

नेवी ने सोशल मीडिया पर “ताजा और भरपूर भोजन” की तस्वीरें भी जारी कीं और दावा किया कि दोनों जहाजों पर 30 दिनों से ज्यादा का क्लास-1 (खाने का) स्टॉक मौजूद है। पेंटागन के अधिकारी रोजाना लॉजिस्टिक्स की निगरानी कर रहे हैं।

लेकिन परिवारों और कुछ मीडिया रिपोर्टों का कहना है कि लंबी तैनाती, बंदरगाहों पर रुकने की कमी और सप्लाई लाइन पर दबाव के कारण ताजा सब्जियाँ, फल और अच्छा खाना गायब हो गया है। सैनिक राशनिंग कर रहे हैं और मनोबल गिर रहा है।

 क्या कहती है सच्चाई?
ये घटनाएँ दिखाती हैं कि आधुनिक युद्ध सिर्फ मिसाइल और ड्रोन का नहीं, लॉजिस्टिक्स का भी होता है। अमेरिका अपनी नौसेना पर खरबों डॉलर खर्च करता है, फिर भी ईरान जैसे क्षेत्र में लंबे समय तक ऑपरेशन चलाने में सप्लाई चेन दबाव में आ रही है। 

पहले टॉयलेट की समस्या, अब खाने की कमी — सोशल मीडिया पर यूजर्स मज़ाक उड़ा रहे हैं कि “दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना भूख और शौचालय की लड़ाई लड़ रही है”। ईरान समर्थक अकाउंट्स तो इसे “ट्रंप प्रशासन की नाकामी” बता रहे हैं।

महिलाओं की सुरक्षा से लेकर वैश्विक युद्ध तक — दोहरी नीति?
जब अमेरिका दुनिया को “महिला सुरक्षा”, “मानवाधिकार” और “न्याय” का उपदेश देता है, तो उसके अपने सैनिक (महिलाओं सहित) भूखे पेट तैनात हैं। वहीं घरेलू मोर्चे पर भी अमेरिका की नीतियाँ सवालों के घेरे में हैं। 

भारत में हम देखते हैं कि महिला सुरक्षा के नाम पर बड़े-बड़े नारे लगाए जाते हैं, लेकिन जब शक्तिशाली लोग या वोट बैंक शामिल होते हैं तो न्याय की प्रक्रिया प्रभावित होती है। खरात केस में गवाह की मौत, व्यापम घोटाले में दर्जनों गवाहों की रहस्यमयी मौतें, राम रहीम जैसे दोषियों को बार-बार पैरोल — ये सब दिखाते हैं कि सत्ता और प्रभाव न्याय को कैसे मोड़ देते हैं।

अमेरिका भी वैश्विक स्तर पर यही खेल खेल रहा है — एक तरफ ईरान पर हमले की तैयारी, दूसरी तरफ अपने सैनिकों की हालत पर चुप्पी। 

 सबक क्या है?
महिला सुरक्षा हो या सैनिकों की भलाई — दोनों ही मामलों में सच्चाई छिपाई नहीं जा सकती। लंबे संघर्ष में लॉजिस्टिक्स की कमी, गवाहों की सुरक्षा की कमी या दोषियों को राजनीतिक संरक्षण — ये सब व्यवस्था की कमजोरी दिखाते हैं। 

अमेरिकी नौसेना के सैनिक भले ही 30 दिन का स्टॉक होने का दावा करें, लेकिन परिवारों द्वारा शेयर की गई तस्वीरें और संदेश साफ बताते हैं कि स्थिति सामान्य नहीं है। सैनिक जब भूखे होंगे तो लड़ाई का जज्बा कैसे बरकरार रहेगा?

लो भाईयों, यही है आज की “सुपरपावर” की हकीकत। खाने के फाँफे, टॉयलेट की कतारें और घर से भेजे पैकेज अटके पड़े — जबकि अरब सागर में तनाव चरम पर है। 

न्याय की मांग हर जगह एक समान होनी चाहिए — चाहे वो महिलाओं पर अत्याचार का मामला हो, गवाहों की सुरक्षा का सवाल हो, या सैनिकों की भलाई का। चुप्पी अन्याय को बढ़ावा देती है। सच्चाई सामने आए और व्यवस्था सबके लिए समान बने — यही असली सुरक्षा और न्याय है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 20,2026