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Monday, 20 April 2026

लो भाईयों, महिला सुरक्षा का नया अध्याय: खरात केस में गवाह की 'रहस्यमयी' मौत और भाजपा की दोहरी नीति

लो भाईयों, महिला सुरक्षा का नया अध्याय: खरात केस में गवाह की 'रहस्यमयी' मौत और भाजपा की दोहरी नीति-Friday World-April 20,2026
महाराष्ट्र के नासिक में स्वयंभू 'गॉडमैन' अशोक खरात के यौन उत्पीड़न और महिलाओं के शोषण के मामले ने एक बार फिर देश की न्याय व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खरात के शिवनिका ट्रस्ट के उपाध्यक्ष और उनके बेहद करीबी डॉक्टर जितेंद्र शेलके की समृद्धि महामार्ग पर हुई सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उनकी पत्नी अनुराधा शेलके भी मौके पर ही जान गंवा बैठीं, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल है।

यह हादसा महज एक साधारण ट्रैफिक एक्सीडेंट लगता है, लेकिन खरात केस के संदर्भ में यह पहली 'रहस्यमयी मौत' बन गई है। डॉ. जितेंद्र शेलके ट्रस्ट में खास आदमी थे। उनके पास खरात की कई गतिविधियों के राज़ थे—जमीन की खरीद-फरोख्त, ट्रस्ट के वित्तीय मामलों और महिलाओं से जुड़े आरोपों के अंदरूनी तथ्य। अब जब SIT जांच में शिकंजा कस रहा है, तो उनका जाना कई सवाल खड़े कर रहा है: क्या यह सच्चाई को दबाने की कोशिश थी? हादसा या साजिश?

 खरात केस: महिलाओं के शोषण का नया अध्याय
अशोक खरात पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न, बलात्कार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं। उनके ट्रस्ट को महिलाओं को आध्यात्मिक नाम पर लूटने और शोषण करने का माध्यम बताया जा रहा है। वायरल MMS और पीड़ितों की शिकायतों ने मामले को सुर्खियों में ला दिया। ऐसे में मुख्य गवाह की मौत न सिर्फ जांच को प्रभावित करेगी, बल्कि अन्य गवाहों में भी डर का माहौल पैदा करेगी।

यह पहली मौत है, लेकिन इतिहास गवाह है कि ऐसे बड़े कांडों में गवाहों का गायब होना या 'रहस्यमयी' मौतें आम हो जाती हैं।

 व्यापम कांड: गवाहों की मौत का भयावह रिकॉर्ड
मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला (Vyapam Scam) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 2013 में सामने आए इस घोटाले में परीक्षा पेपर लीक, भर्ती में घूसखोरी और नकली उम्मीदवारों का खेल चला। लेकिन घोटाले की जांच शुरू होते ही गवाहों और आरोपियों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 23 से 40 से ज्यादा 'असामान्य मौतें' हुईं। अनौपचारिक रूप से यह संख्या 100 के पार बताई जाती है। कुछ गवाह सड़क हादसों में मारे गए, कुछ को 'हृदयाघात' या 'आत्महत्या' बताया गया। एक पत्रकार जो जांच कर रहा था, वह भी रहस्यमयी परिस्थितियों में मरा। पूरे कांड में सिर्फ एक नेता (वो भी भाजपा का) जेल गया, बाकी बड़े मछली बच निकले।

व्यापम में भी यही सवाल उठे थे—क्या गवाहों को खामोश करने के लिए सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा था? आज खरात केस में डॉ. जितेंद्र शेलके की मौत उसी पैटर्न की याद दिलाती है। क्या इतिहास खुद को दोहरा रहा है?

 राम रहीम और हरियाणा की 'महिला सुरक्षा' नीति
जबकि महाराष्ट्र में खरात केस गर्म है, हरियाणा में भाजपा सरकार बाबा राम रहीम (Gurmeet Ram Rahim Singh) को लेकर चर्चा में है। दो महिलाओं के बलात्कार और एक हत्या के दोषी राम रहीम को 2017 से अब तक 15 बार से ज्यादा पैरोल मिल चुकी है। हरियाणा सरकार की अनुमति से वे दर्जनों बार जेल से बाहर आकर 'मौज' मना चुके हैं।

2022 में हरियाणा सरकार ने नया कानून बनाया, जिसके तहत 'अच्छे आचरण' वाले कैदियों को आसानी से अस्थायी रिहाई मिल सके। राम रहीम जैसे 'हार्डकोर' दोषी भी इस कानून का फायदा उठा रहे हैं। वे सिरसा डेरा में रहकर राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय दिखते हैं। SGPC और महिलाओं के संगठन बार-बार विरोध कर चुके हैं, लेकिन सरकार अपनी 'उदारता' पर अड़ी हुई है।

पीड़ित परिवार और महिला अधिकार कार्यकर्ता पूछते हैं—क्या यही है महिलाओं की सुरक्षा? एक दोषी बलात्कारी को बार-बार जेल से बाहर भेजकर सरकार महिलाओं को क्या संदेश दे रही है? राम रहीम पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोप हैं, फिर भी उन्हें 'महिला सुरक्षा' का गुरु बनाने की कोशिश क्यों?

 दोहरी नीति और न्याय की पोल
भाजपा शासित राज्यों में महिला सुरक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी घोषणाएं होती हैं—बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, सख्त कानून। लेकिन जब बात अपने सहयोगियों या वोट बैंक की आती है, तो चुप्पी साध ली जाती है। 

- व्यापम में गवाह मरे, बड़े नेता बच गए।
- राम रहीम को बार-बार पैरोल, जबकि पीड़ित महिलाएं अभी भी न्याय की गुहार लगाती हैं।
- अब खरात केस में मुख्य गवाह की मौत—फिर वही सवाल: क्या न्याय व्यवस्था गवाहों की रक्षा करने में नाकाम है?

ये घटनाएं दिखाती हैं कि जब शक्तिशाली लोग शामिल होते हैं, तो जांच का रुख बदल जाता है। गवाह डर जाते हैं, सबूत गायब हो जाते हैं और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। महिलाओं पर होने वाले अन्याय का ज्ञान देने वाले लोग खुद उन अपराधियों को संरक्षण देते नजर आते हैं, जिनके खिलाफ महिलाएं लड़ रही हैं।

 क्या सीखें हम?
महिला सुरक्षा सिर्फ कानून बनाने या नारेबाजी से नहीं आती। यह तब आती है जब:
- गवाहों को सुरक्षा मिले,
- जांच निष्पक्ष हो,
- दोषियों को राजनीतिक संरक्षण न मिले,
- और व्यवस्था सभी के लिए समान हो।

खरात केस, व्यापम घोटाला और राम रहीम पैरोल—ये तीनों घटनाएं एक ही कहानी कहती हैं। सत्ता और प्रभाव वाले लोग न्याय को प्रभावित करते हैं। आम आदमी या पीड़ित महिला के लिए न्याय दूर की कौड़ी बन जाता है।

लो भाईयों, यही है आज की 'महिला सुरक्षा'। जाओ, ले लो न्याय... अगर मिले तो।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 20,2026 

👉 यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं, मीडिया रिपोर्टों और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। जांच एजेंसियां अभी भी खरात केस की जांच कर रही हैं—अंतिम सत्य अदालत तय करेगी। लेकिन गवाहों की मौत जैसे पैटर्न को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सच्चाई की तलाश और न्याय की मांग हर नागरिक का अधिकार है।