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Wednesday, 22 April 2026

मुर्शिदाबाद में वोटिंग से ठीक पहले बड़ा बवाल: क्या यह ‘डिवाइड एंड रूल’ का नया अध्याय है?

मुर्शिदाबाद में वोटिंग से ठीक पहले बड़ा बवाल: क्या यह ‘डिवाइड एंड रूल’ का नया अध्याय है?
-Friday World-April 23,2026 
पश्चिम बंगाल की 2026 विधानसभा चुनाव की पहली फेज वोटिंग 23 अप्रैल को चल रही है। मुर्शिदाबाद जिले के नवदा विधानसभा क्षेत्र के शिवनगर इलाके में पोलिंग बूथ से महज 50 मीटर दूर रात में क्रूड बम फेंके गए। धमाकों से इलाके में दहशत फैल गई, एक महिला घायल हुई और स्थानीय लोग घबराहट में घरों में कैद हो गए। केंद्रीय बल तैनात थे, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। 

TMC उम्मीदवार सहिना मुमताज खान ने आरोप लगाया कि यह हमला उन पर था और हमायूं कबीर की नई पार्टी AJUP (जनता उन्नयन पार्टी) को जिम्मेदार ठहराया। वहीं हमायूं कबीर, जो पहले TMC के MLA थे और अब अपनी पार्टी चलाते हैं, घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मुर्शिदाबाद में पहले से ही बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद बनाने के मुद्दे पर तनाव है, राम नवमी हिंसा की यादें ताजा हैं और वफ़्क संशोधन के बाद की घटनाएं अभी भी गूंज रही हैं। 

यह घटना सिर्फ एक स्थानीय हिंसा नहीं लग रही। कुछ लोग इसे गहरे षड्यंत्र से जोड़कर देख रहे हैं। 

 इजराइल का कथित ‘फॉल्स फ्लैग’ पैटर्न: क्या मुर्शिदाबाद में उसकी छाया?

दुनिया भर में कुछ लोग इजराइल को ‘डिवाइड एंड रूल’ का मास्टर मानते हैं। उनका दावा है कि इजराइल विरोधी या प्रतिद्वंद्वी देशों/समूहों को आपस में लड़ाने के लिए फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन करता है — यानी खुद हमला करवाकर या ब्लास्ट करवाकर उसका आरोप दूसरे पर लगा देता है। नतीजा? दोनों पक्ष लड़ते-लड़ते कमजोर हो जाते हैं, इजराइल को न लड़ना पड़ता है, न अपने सैनिक खोने पड़ते हैं। 

ऐतिहासिक उदाहरणों में लावोन अफेयर (1954) का जिक्र अक्सर होता है, जिसमें इजराइली एजेंटों ने मिस्र में अमेरिकी और ब्रिटिश ठिकानों पर बम रखे और आरोप मिस्र के राष्ट्रवादियों पर लगाने की कोशिश की। ऑपरेशन फेल हो गया था, लेकिन यह ‘प्रॉवोकेशन’ की रणनीति का क्लासिक केस माना जाता है। कुछ लोग 9/11, USS लिबर्टी या अन्य घटनाओं को भी इसी पैटर्न से जोड़ते हैं, हालांकि ये दावे विवादास्पद और अक्सर सबूतों की कमी वाले रहते हैं। 

अब सवाल उठता है — क्या मुर्शिदाबाद का यह ब्लास्ट भी उसी तरह का ‘नैरेटिव बिल्डिंग’ है? 

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है: “TMC और हमायूं कबीर आपस में लड़ते रहें, कोई  पक्ष अपना काम करके निकल जाए।” मुर्शिदाबाद मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां TMC की पकड़ मजबूत रही है, लेकिन हमायूं कबीर जैसे स्थानीय नेता बाबरी मस्जिद रेप्लिका बनाने के मुद्दे पर अलग रास्ता चुन चुके हैं। इससे मुस्लिम वोट बंटने का खतरा है। अगर हिंसा बढ़ी तो दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहेंगे, जबकि असली मुद्दे — विकास, बेरोजगारी, सीमा सुरक्षा — पीछे छूट जाएंगे। 

यह पैटर्न नया नहीं। पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा दशकों पुरानी है। पिछले दस साल में बंगाल ने देश में सबसे ज्यादा चुनावी हिंसा देखी है। क्रूड बम, पत्थरबाजी, आगजनी — ये सब सामान्य हो चुके हैं। मुर्शिदाबाद में राम नवमी के दौरान हिंसा, वफ़्क विवाद के बाद की घटनाएं और अब वोटिंग ईव पर ब्लास्ट — सब कुछ वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा लगता है। 

सच्चाई क्या है? 

वास्तव में, मुर्शिदाबाद का यह ब्लास्ट अभी तक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र से नहीं जुड़ा है। यह ज्यादातर स्थानीय राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का नतीजा प्रतीत होता है। TMC और हमायूं कबीर की AJUP के बीच तनाव स्पष्ट है। इलाके में पहले से क्रूड बम बनाना और फेंकना आम है — पंचायत चुनावों में भी ऐसे मामले दर्ज हुए हैं। चुनाव आयोग ने भारी केंद्रीय बल तैनात किए हैं, फिर भी लीकेज हो रहा है। 

फिर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। जब कोई ब्लास्ट होता है और तुरंत एक पक्ष दूसरे पर आरोप लगा देता है, तो नैरेटिव बन जाता है। मीडिया इस नैरेटिव को तेजी से फैलाता है। नतीजा — समाज में डर, ध्रुवीकरण और वोटों का बंटवारा। जो लोग पीछे से ‘काम’ कर रहे होते हैं, वे चुपचाप फायदा उठाते हैं। 

इजराइल का पैटर्न यहां लागू होता हो या नहीं, यह बहस की बात है। लेकिन एक बात साफ है — बंगाल की राजनीति में ‘डिवाइड एंड रूल’ बहुत पुराना खेल है। ब्रिटिश काल से लेकर आज तक, चाहे धर्म हो, जाति हो या क्षेत्रीयता, नेता इसे इस्तेमाल करते आए हैं। मुर्शिदाबाद जैसे संवेदनशील इलाके में एक छोटा ब्लास्ट पूरे जिले की सियासत को प्रभावित कर सकता है। 

 क्या सबक सीखना चाहिए?

1. सुरक्षा की असली मजबूती: केंद्रीय बल तैनात करने भर से काम नहीं चलेगा। इंटेलिजेंस और स्थानीय पुलिस की तालमेल जरूरी है। क्रूड बम बनाने वाले नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई हो।

2. नैरेटिव का खेल समझें: हर ब्लास्ट को अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र से जोड़ने से पहले सबूत देखें। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावे अक्सर बिना आधार के होते हैं। 

3. वोटर जागरूकता: आम लोग समझें कि हिंसा से कोई पार्टी नहीं जीतती, लोकतंत्र कमजोर होता है। विकास, शिक्षा, रोजगार जैसे मुद्दों पर वोट दें, न कि डर या धार्मिक ध्रुवीकरण पर।

4. मीडिया की भूमिका: मीडिया को संतुलित रिपोर्टिंग करनी चाहिए, न कि एक तरफा नैरेटिव बनाने में मदद करनी चाहिए। 

मुर्शिदाबाद आज फिर सुर्खियों में है। वोटिंग चल रही है, लोग लंबी कतारों में खड़े हैं। एक ओर डर का माहौल, दूसरी ओर लोकतंत्र का उत्सव। अगर यह ब्लास्ट किसी बड़े गेम का हिस्सा था, तो वह खेल अभी जारी है। लेकिन अगर यह सिर्फ स्थानीय गुंडागर्दी है, तो भी चिंता की बात है — क्योंकि बंगाल में चुनावी हिंसा सामान्य हो चुकी है। 

हमायूं कबीर और TMC के बीच लड़ाई जारी रहेगी। आरोप-प्रत्यारोप होंगे। लेकिन सवाल यह है — क्या आम मुर्शिदाबादी नागरिक इस खेल का शिकार बनेंगे? या वे शांति और विकास का रास्ता चुनेंगे? 

इतिहास गवाह है — जो समाज आपस में लड़ता रहता है, वह कभी आगे नहीं बढ़ पाता। मुर्शिदाबाद की मिट्टी इतिहास की गवाह है। यहां बंगाल का सांस्कृतिक मेलजोल रहा है। आज अगर बमों की आवाज गूंज रही है, तो यह सिर्फ एक ब्लास्ट नहीं, लोकतंत्र पर सवाल है। 

चुनाव आयोग, प्रशासन और राजनीतिक दल — सभी को जिम्मेदारी समझनी होगी। वरना ‘डिवाइड एंड रूल’ का खेल जारी रहेगा। चाहे वह इजराइल का कथित पैटर्न हो, या बंगाल की अपनी पुरानी सियासी चाल। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 23,2026