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Tuesday, 21 April 2026

UAE का बड़ा झटका: ईरान तनाव के बीच अमेरिकी सैन्य अड्डे 'बोझ' बने, अब बंद करने की मांग! डॉलर की कमी पर तेल व्यापार के लिए चीनी युआन का रुख, दशकों पुराने संबंधों में दरार

UAE का बड़ा झटका: ईरान तनाव के बीच अमेरिकी सैन्य अड्डे 'बोझ' बने, अब बंद करने की मांग! डॉलर की कमी पर तेल व्यापार के लिए चीनी युआन का रुख, दशकों पुराने संबंधों में दरार
-Friday World-April 21,2026 
अबू धाबी/वाशिंगटन, २१ अप्रैल २०२६: ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल के भीषण सैन्य तनाव और युद्ध की छाया में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने दशकों पुराने सहयोगी अमेरिका को एक बड़ा संदेश दिया है। प्रमुख एमिराती राजनीतिक विश्लेषक और अबू धाबी के पूर्व सलाहकार डॉ. अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि UAE में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद कर दिया जाए। उनके अनुसार, ये अड्डे अब सुरक्षा प्रदान करने के बजाय 'बोझ' बन गए हैं। 

साथ ही UAE ने ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर डॉलर की उपलब्धता कम हुई तो वह तेल और गैस के व्यापार के लिए चीनी युआन या अन्य मुद्राओं की ओर मुड़ सकता है। यह विकास मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है, जो अमेरिकी डॉलर के वैश्विक दबदबे (पेट्रोडॉलर सिस्टम) को चुनौती दे रहा है।

 अब्दुल खालिक अब्दुल्ला का सशक्त बयान
प्रसिद्ध एमिराती विचारक और रणनीतिक विश्लेषक डॉ. अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने कहा, “अमेरिकी सैन्य अड्डे अब UAE के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं रहे, बल्कि बोझ बन गए हैं। हमें अब अमेरिकी सुरक्षा की जरूरत नहीं है।” उन्होंने जोर दिया कि ईरान के साथ जारी तनाव में अमेरिकी अड्डे UAE को लक्ष्य बना सकते हैं, जिससे देश की सुरक्षा को खतरा बढ़ गया है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले, ईरानी तेल टैंकरों की जब्ती और पाकिस्तान में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के मिले-जुले संदेशों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। UAE, जो लंबे समय से अमेरिका का प्रमुख सहयोगी रहा है, अब अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दे रहा है।

UAE की चेतावनी: डॉलर की कमी पर युआन का विकल्प
UAE ने वाशिंगटन में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के साथ हालिया बैठक में स्पष्ट संकेत दिया कि अगर ईरान युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा और डॉलर की कमी हुई तो वह तेल व्यापार को चीनी युआन में शिफ्ट कर सकता है। 

UAE के सेंट्रल बैंक गवर्नर ने अमेरिकी अधिकारियों से करेंसी स्वैप लाइन की मांग की, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि डॉलर की कमी में वे युआन या अन्य मुद्राओं का सहारा लेंगे। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह “अमेरिकी डॉलर के लिए एक सूक्ष्म खतरा” है। 

UAE दुनिया का प्रमुख तेल निर्यातक है। अगर वह तेल की बिक्री का कुछ हिस्सा युआन में करने लगता है तो इससे अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मांग प्रभावित होगी और पेट्रोडॉलर सिस्टम कमजोर पड़ेगा। चीन पहले से ही UAE का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और युआन में व्यापार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

 दशकों पुराने संबंधों में दरार क्यों?
UAE और अमेरिका के बीच सैन्य संबंध १९९० के दशक से मजबूत रहे हैं। अमेरिका के पास UAE में अल धफ्रा एयर बेस और अन्य सुविधाएं हैं, जो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने स्थिति बदल दी है:

- सुरक्षा का जोखिम: अमेरिकी अड्डे ईरानी मिसाइलों के दायरे में आ सकते हैं। UAE नहीं चाहता कि वह अमेरिका-ईरान संघर्ष का शिकार बने।
- आर्थिक प्रभाव: हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव से तेल की कीमतें बढ़ी हैं (ब्रेंट क्रूड ९५.९ डॉलर तक पहुंचा)। UAE की अर्थव्यवस्था, जो पर्यटन, वित्त और व्यापार पर निर्भर है, प्रभावित हो रही है।
- रणनीतिक स्वायत्तता: UAE अब अपनी स्वतंत्र नीति अपनाना चाहता है। वह चीन, रूस और अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है।

डॉ. अब्दुल खालिक अब्दुल्ला जैसे प्रमुख विश्लेषक अब खुलकर कह रहे हैं कि अमेरिकी सुरक्षा अब “रक्षक” नहीं, बल्कि “खतरा” बन गई है।

 पृष्ठभूमि: ईरान तनाव और गल्फ देशों की चिंता
ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल के संघर्ष ने पूरे गल्फ को प्रभावित किया है। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का २० प्रतिशत तेल गुजरता है। अगर यह रूट प्रभावित हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा। 

UAE, सऊदी अरब और अन्य गल्फ देश अब शांति की अपील कर रहे हैं। पाकिस्तान में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता पर गल्फ देश नजर रखे हुए हैं। UAE ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उनकी नीतियों ने क्षेत्र को अस्थिर किया है।

 वैश्विक प्रभाव
- अमेरिका के लिए: अगर UAE जैसे सहयोगी युआन की ओर मुड़े तो डॉलर की वैश्विक स्थिति कमजोर होगी। BRICS देश पहले से ही डॉलर को चुनौती दे रहे हैं।
- चीन के लिए: यह युआन को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाने का बड़ा अवसर है।
- भारत के लिए: UAE भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता और व्यापारिक साझेदार है। अगर तेल युआन में बिका तो भारत को भी नई व्यवस्था अपनानी पड़ सकती है।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: अमेरिकी अड्डों के बंद होने से गल्फ की सुरक्षा की नई व्यवस्था की जरूरत पड़ेगी।

 आगे क्या?
UAE और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। अमेरिका UAE को डॉलर सपोर्ट देने पर विचार कर रहा है, लेकिन Emirati अधिकारियों का रुख सख्त है। अगर तनाव बढ़ा तो UAE चीन की ओर और झुक सकता है।

डॉ. अब्दुल खालिक अब्दुल्ला का बयान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि UAE की बदलती रणनीति का संकेत है। गल्फ देश अब “अमेरिका या ईरान” के बीच फंसने के बजाय अपनी स्वतंत्रता चाहते हैं।

 ईरान तनाव ने UAE जैसे अमेरिकी सहयोगी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिकी अड्डों को बंद करने की मांग और युआन में तेल व्यापार की चेतावनी दिखाती है कि पुराने गठबंधन अब टूट रहे हैं। दुनिया नई भू-राजनीतिक वास्तविकता की ओर बढ़ रही है – जहां डॉलर का दबदबा कम हो रहा है और बहुध्रुवीय दुनिया उभर रही है।

UAE का यह कदम न सिर्फ अमेरिका के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे विश्व को संदेश है कि आर्थिक और सुरक्षा हितों के आगे पुरानी दोस्ती भी टिक नहीं सकती। अब देखना यह है कि ट्रंप प्रशासन इस चुनौती का कैसे सामना करता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 21,2026