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Thursday, 28 May 2026

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम फिर परोल पर, 12वीं बार जेल से बाहर आया

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम फिर परोल पर, 12वीं बार जेल से बाहर आया
- Friday World 29 May 2026
सिरसा। दो साध्वियों से दुष्कर्म और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामलों में 20 साल की सज़ा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर परोल मिली है। वह सोमवार सुबह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आए। यह उनकी 12वीं परोल है। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से समय और स्थान की जानकारी सार्वजनिक नहीं की।  

कब-कब मिली परोल, क्या रहा कारण?
राम रहीम को पहली बार अक्टूबर 2020 में एक दिन की इमरजेंसी परोल बीमार मां से मिलने के लिए दी गई थी। इसके बाद से अब तक 11 बार फरलो और परोल मिल चुकी है। हर बार कारण अलग रहा — कभी खेती, कभी डेरे के कार्यक्रम, कभी परिवार से मुलाकात।  

पिछले 4 साल का हिसाब देखें तो वह 250 दिन से ज्यादा जेल से बाहर रह चुके हैं। 2022 में 91 दिन, 2023 में 90 दिन और 2024 में 50 दिन की छुट्टी मिली। 2025 में यह तीसरी बार है जब वह बाहर आए हैं। जनवरी में 30 दिन और अप्रैल में 21 दिन की परोल मिल चुकी है।  

किस मामले में काट रहे सज़ा?
25 अगस्त 2017 को पंचकूला की विशेष CBI कोर्ट ने राम रहीम को दो साध्वियों से दुष्कर्म का दोषी माना था। 28 अगस्त 2017 को 20 साल की सज़ा सुनाई गई — 10-10 साल की दो सज़ाएं जो एक के बाद एक चलेंगी।  

इसके अलावा 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में उम्रकैद की सज़ा हुई। छत्रपति ने 2002 में अपने अखबार _पूरा सच_ में साध्वी यौन शोषण का मामला उजागर किया था। उसी साल उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई।  

डेरा मैनेजर रंजीत सिंह हत्या मामले में भी राम रहीम को उम्रकैद हुई थी, लेकिन मई 2024 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।  

परोल पर क्यों उठते हैं सवाल?
राम रहीम की बार-बार परोल राजनीतिक और कानूनी बहस का मुद्दा बनती रही है। विपक्ष का आरोप है कि हरियाणा और पंजाब में चुनाव से पहले उन्हें परोल दी जाती है। डेरा सच्चा सौदा का हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में बड़ा जनाधार है।  

फरवरी 2024 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि बिना कोर्ट की अनुमति परोल न दी जाए। SGPC ने भी याचिका दाखिल कर कहा था कि एक सजायाफ्ता को बार-बार छूट देना गलत मिसाल है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में यह शर्त हटा दी और कहा कि परोल पर फैसला जेल प्रशासन कानून के हिसाब से ले सकता है।  

हरियाणा सरकार का पक्ष है कि जेल मैनुअल के तहत हर कैदी को साल में 90 दिन की परोल और 28 दिन की फरलो का अधिकार है। राम रहीम को भी वही नियम लागू होते हैं। जेल मंत्री रणजीत चौटाला कई बार कह चुके हैं कि इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है।  

डेरा सच्चा सौदा का असर कितना बड़ा?
1948 में शाह मस्ताना ने सिरसा में डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की थी। राम रहीम 1990 में गद्दी पर बैठे। डेरा शिक्षा, स्वास्थ्य और नशा मुक्ति के नाम पर काम करता है। दावा है कि देश-विदेश में 6 करोड़ से ज्यादा अनुयायी हैं।  

हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 35-40 सीटों पर डेरा का सीधा असर माना जाता है। पंजाब की मालवा बेल्ट की 69 सीटों पर भी डेरा समर्थक निर्णायक भूमिका में हैं। 2014 हरियाणा चुनाव और 2017 पंजाब चुनाव में डेरा ने खुलकर भाजपा को समर्थन दिया था।  

2017 में क्या हुआ था जब सज़ा हुई?
25 अगस्त 2017 को जब कोर्ट ने राम रहीम को दोषी करार दिया, तो पंचकूला, सिरसा और पंजाब के कई शहरों में हिंसा भड़क गई थी। 38 लोगों की मौत हुई, 250 से ज्यादा घायल हुए। 100 से ज्यादा गाड़ियां फूंक दी गईं। हालात काबू करने के लिए सेना बुलानी पड़ी। कोर्ट ने बाद में डेरा की 157 एकड़ संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया ताकि नुकसान की भरपाई हो सके।  

अब आगे क्या?
नियमों के मुताबिक परोल के दौरान राम रहीम हरियाणा में रहेंगे और चुनाव प्रचार नहीं कर सकते। उनके सोशल मीडिया अकाउंट भी बैन हैं। पुलिस और CID की टीम हर गतिविधि पर नज़र रखेगी।  

कानूनी जानकारों का कहना है कि 20 साल की सज़ा में से राम रहीम 8 साल काट चुके हैं। अच्छे आचरण और परोल के दिनों को जोड़कर वह 2027-2028 तक रिहाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि छत्रपति हत्या मामले में उम्रकैद की सज़ा अलग से चल रही है, इसलिए रिहाई आसान नहीं होगी।  

परोल vs फरलो: फर्क क्या है?
कई लोग परोल और फरलो को एक समझते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं। परोल किसी खास कारण से दी जाती है — जैसे परिवार में मौत, बीमारी, शादी। इसके लिए कारण बताना जरूरी है। फरलो कैदी का अधिकार है, जो लंबे समय से जेल में अच्छे आचरण वाले कैदियों को सामाजिक संपर्क बनाए रखने के लिए दी जाती है। इसमें कोई खास कारण नहीं चाहिए।  

राम रहीम को अब तक परोल और फरलो दोनों मिल चुकी हैं। जेल विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने एक भी बार शर्त नहीं तोड़ी। समय पर वापस आते रहे हैं।  

विवाद का अंत नहीं
राम रहीम की परोल हर बार नई बहस छेड़ देती है। एक पक्ष कहता है कि कानून सबके लिए बराबर है, तो छूट भी बराबर मिलनी चाहिए। दूसरा पक्ष सवाल उठाता है कि क्या आम कैदी को इतनी आसानी से बार-बार परोल मिलती है?  

फिलहाल राम रहीम परोल पर बाहर हैं। डेरा अनुयायियों में उत्साह है, तो विरोधियों में नाराज़गी। कानून अपनी जगह है और सियासत अपनी जगह। इस पूरे मामले ने एक बार फिर न्याय, राजनीति और आस्था के टकराव को सामने ला दिया है।  

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 29 May 2026