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Wednesday, 6 May 2026

19 लाख बैरल तेल लेकर निकले दो ईरानी जहाज, UNCLOS 1982 का हवाला देकर इंडोनेशिया ने किया अंतरराष्ट्रीय नौवहन का समर्थन

19 लाख बैरल तेल लेकर निकले दो ईरानी जहाज, UNCLOS 1982 का हवाला देकर इंडोनेशिया ने किया अंतरराष्ट्रीय नौवहन का समर्थन
-Friday World- 6, May 2026
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच समुद्री रास्तों पर एक नया मोड़ आया है। अमेरिका की सख्त नाकेबंदी को दरकिनार करते हुए ईरान के दो विशाल तेल टैंकर इंडोनेशिया के लोम्बोक स्ट्रेट से गुजरते हुए देखे गए हैं। इंडोनेशिया ने इस पर साफ कहा है कि इन जहाजों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस जलमार्ग से गुजरने का पूरा अधिकार है।

यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि मलक्का स्ट्रेट पर अमेरिकी निगरानी बेहद कड़ी है। ऐसे में ईरानी टैंकरों ने बाली के पूर्व में स्थित लोम्बोक स्ट्रेट को नया रास्ता चुना है।

क्या है पूरा मामला

शिपिंग पर नजर रखने वाली वेबसाइट http://TankerTrackers.com ने 2 मई को पहली बार इस बात की पुष्टि की। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान का झंडा लगा टैंकर 'Huge' श्रीलंका के पास दिखने के बाद करीब छह हफ्ते तक रडार से गायब था। अचानक यह इंडोनेशिया के लोम्बोक स्ट्रेट से गुजरता दिखा।

इस टैंकर की क्षमता 3.17 लाख डेडवेट टन है और यह 19 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा था। बाजार में इस तेल की कीमत लगभग 22 करोड़ डॉलर आंकी गई है। http://TankerTrackers.com का मानना है कि यह जहाज अमेरिकी नाकेबंदी शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही ईरान से निकला था।

'Nuge' 2008 में बना था और 2015 से ईरानी झंडे के तहत चल रहा है। इसे नेशनल ईरानियन टैंकर कॉरपोरेशन यानी NITC ऑपरेट करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में भी यह जहाज शामिल है।

दूसरा टैंकर भी उसी राह पर

अमेरिकी कोशिशों के बावजूद 3 मई को http://TankerTrackers.com ने एक और ईरानी टैंकर 'Derya' को इसी रास्ते पर देखा। यह जहाज भी 18.8 लाख बैरल तेल लेकर चल रहा था। रिपोर्ट बताती है कि यह टैंकर अप्रैल के मध्य से समुद्र में था। भारत को तेल पहुंचाने के लिए अमेरिका की तरफ से मिली छूट की समय सीमा निकल जाने के बाद यह अपनी मंजिल तलाश रहा था।

2013 में बना 'Derya' भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है। यह भी लोम्बोक स्ट्रेट से होते हुए रियाउ द्वीपसमूह की तरफ बढ़ रहा था। रियाउ द्वीपसमूह को 'शैडो फ्लीट' टैंकरों द्वारा गैर-कानूनी तरीके से जहाज से जहाज में तेल ट्रांसफर करने के लिए बदनाम माना जाता है।

इंडोनेशिया का रुख: कानून सर्वोपरि

इन खबरों के बाद इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने अपना पक्ष रखा। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता यनोने मेवेंगकांग ने इंडोनेशियाई समाचार सेवा बरनामा के हवाले से कहा, "हमारा मानना है कि ये जहाज अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अपने मार्ग के अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।"

इंडोनेशिया ने 1982 की UNCLOS संधि यानी संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि का हवाला दिया। यह संधि पिछले 32 साल से लागू है। विदेश मंत्रालय ने 'निर्दोष मार्ग' के अधिकार को दोहराया। यह नियम कहता है कि किसी भी देश का जहाज शांतिपूर्ण तरीके से दूसरे देश के जल क्षेत्र से गुजर सकता है, बशर्ते वह उस देश की शांति, व्यवस्था या सुरक्षा के लिए खतरा न हो।

इंडोनेशिया का यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता दिखाता है। साथ ही यह संकेत भी देता है कि वह अमेरिका और ईरान के टकराव में किसी एक पक्ष के दबाव में नहीं आना चाहता।

अमेरिका का दावा: 51 जहाज लौटाए

दूसरी तरफ अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने 5 मई तक दावा किया कि अमेरिकी बलों ने ईरानी जहाजों और बंदरगाहों की नाकेबंदी के तहत 51 जहाजों को वापस लौटने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है। CENTCOM के बयानों के मुताबिक हर दिन इस संख्या में कुछ जहाजों की बढ़ोतरी हो रही है।

अमेरिका ईरान पर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर दबाव बनाने के लिए तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाता रहा है। उसका मकसद ईरान की आय के मुख्य स्रोत को रोकना है। लेकिन 'Huge' और 'Derya' जैसे जहाजों का लोम्बोक स्ट्रेट से निकलना दिखाता है कि ईरान अब नए समुद्री रास्ते तलाश रहा है।

लोम्बोक स्ट्रेट क्यों अहम है

आमतौर पर फारस की खाड़ी से एशिया आने वाला तेल मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है। यह दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग है। साथ ही इस पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की कड़ी नजर रहती है।

लोम्बोक स्ट्रेट मलक्का का विकल्प है। यह इंडोनेशिया के बाली और लोम्बोक द्वीपों के बीच है। यह रास्ता ज्यादा गहरा है और बड़े टैंकरों के लिए सुविधाजनक है। निगरानी कम होने के कारण अब यह प्रतिबंधित जहाजों के लिए नया गलियारा बन रहा है।

शैडो फ्लीट' का खेल

रिपोर्ट में रियाउ द्वीपसमूह का जिक्र खास है। यह सिंगापुर के पास का इलाका है जिसे 'शैडो फ्लीट' का अड्डा कहा जाता है। शैडो फ्लीट यानी पुराने टैंकरों का वह बेड़ा जो प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए इस्तेमाल होता है।

ये जहाज अक्सर अपनी लोकेशन छिपाते हैं। ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं। समुद्र के बीच में ही एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर कर देते हैं। इससे तेल की असली पहचान छिप जाती है और खरीदार तक पहुंच जाता है। 'Huge' और 'Derya' का रियाउ की तरफ जाना इसी आशंका को बढ़ाता है।

भू-राजनीतिक असर

1. अमेरिका के लिए चुनौती: यह घटना दिखाती है कि सिर्फ मलक्का स्ट्रेट पर निगरानी से ईरान का तेल निर्यात नहीं रुक सकता। अमेरिका को अब दूसरे रास्तों पर भी नजर रखनी होगी।
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2. इंडोनेशिया की तटस्थता इंडोनेशिया ने UNCLOS का हवाला देकर साफ कर दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून को सबसे ऊपर रखता है। वह दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है और ईरान से उसके रिश्ते भी सामान्य हैं।
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3. तेल बाजार पर असर अगर ईरान लगातार ऐसे रास्ते निकालता रहा तो वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति पर अमेरिकी प्रतिबंधों का असर कम हो सकता है। इससे कीमतों पर भी दबाव पड़ेगा।
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4. समुद्री कानून की परीक्षा यह मामला UNCLOS के 'निर्दोष मार्ग' प्रावधान की नई परीक्षा है। सवाल यह है कि क्या प्रतिबंधों के तहत आया जहाज भी 'निर्दोष' माना जाएगा।

आगे क्या

अमेरिका निश्चित तौर पर लोम्बोक स्ट्रेट पर अपनी निगरानी बढ़ाएगा। वह इंडोनेशिया पर कूटनीतिक दबाव भी बना सकता है। दूसरी तरफ ईरान और देशों की मदद से ऐसे ही नए रास्ते तलाशेगा।

http://TankerTrackers.com जैसी एजेंसियां अब मलक्का के अलावा सुंडा स्ट्रेट और लोम्बोक स्ट्रेट पर भी पैनी नजर रखेंगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह समुद्री शह-मात का खेल किस मोड़ पर पहुंचता है।

फिलहाल इतना तय है कि ईरान ने अमेरिका की नाकेबंदी में सेंध लगा दी है। और इंडोनेशिया ने अंतरराष्ट्रीय कानून का पाठ पढ़ाकर दुनिया को याद दिलाया है कि समुद्र किसी एक देश की जागीर नहीं है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World- 6, May 2026