नई दिल्ली! अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को लेकर अपनाई गई आक्रामक नीति अब उनके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन गई है। पीबीएस न्यूज़, एनपीआर और मैरिस्ट के ताजा सर्वे ने जो आंकड़े सामने रखे हैं, वे व्हाइट हाउस से लेकर रिपब्लिकन पार्टी के कैंप तक हड़कंप मचा रहे हैं।
सर्वे साफ कहता है: अमेरिकी जनता ट्रंप की जंग को सिरे से नकार रही है।
सर्वे के 5 सबसे बड़े खुलासे
1. 60% अमेरिकियों ने ट्रंप की ईरान नीति को ठुकराया
पीबीएस न्यूज़/एनपीआर/मैरिस्ट पोल के मुताबिक 10 में से 6 अमेरिकी नागरिक ईरान के मामले में ट्रंप के रुख से सहमत नहीं हैं। जनता का मानना है कि कूटनीति की जगह सीधा सैन्य टकराव चुनना अमेरिका के हित में नहीं है।
2. 61% बोले: सैन्य कार्रवाई से फायदा कम, नुकसान ज्यादा
ज्यादातर अमेरिकियों को लगता है कि ईरान पर अमेरिकी सैन्य दखल ने हालात सुधारने के बजाय बिगाड़े हैं। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता बढ़ी, अमेरिका के सैनिकों पर खतरा बढ़ा और दुनिया में अमेरिका की छवि को धक्का लगा।
3. गैस की कीमतों का दर्द, 63% ने ट्रंप को ठहराया जिम्मेदार
ईरान तनाव का सीधा असर अमेरिकी जेब पर पड़ा है। तेल की सप्लाई पर अनिश्चितता के चलते गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। 63% लोग मानते हैं कि कीमतों में इस उछाल के पीछे ट्रंप की नीतियां हैं। महंगाई से जूझ रहे आम परिवारों के लिए यह सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
4. 62% का आरोप: ट्रंप ने वैश्विक मंच पर अमेरिका को कमजोर किया
सर्वे में 62% लोगों ने कहा कि ट्रंप के फैसलों ने सहयोगी देशों का भरोसा तोड़ा और वैश्विक मंच पर अमेरिका की लीडरशिप कमजोर हुई है। 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा कूटनीतिक अकेलेपन में बदल गया।
5. घरेलू गुस्सा बढ़ा: 'पहले अपने घर की समस्या देखो'
6.
बढ़ती गैस कीमतें, आर्थिक तनाव और टैक्सपेयर्स के पैसे से विदेश में युद्ध लड़ने को लेकर जनता में जबरदस्त नाराजगी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब देश में हेल्थकेयर, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पैसा कम पड़ रहा है, तो अरबों डॉलर युद्ध पर क्यों खर्च हो रहे हैं?
मिडटर्म चुनाव 2026: रिपब्लिकन के लिए खतरे की घंटी
इन आंकड़ों का सबसे बड़ा सियासी मतलब है नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनाव। सर्वे बताता है कि डेमोक्रेट अब 'जनरल बैलट' यानी समग्र मतदान में रिपब्लिकन से आगे निकल गए हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं, डेमोक्रेटिक वोटरों में उत्साह भी रिपब्लिकन समर्थकों के मुकाबले कहीं ज्यादा दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान मुद्दा, महंगाई और गैस की कीमतें मिलकर मिडटर्म में रिपब्लिकन पार्टी का खेल बिगाड़ सकते हैं।
हाउस और सीनेट की कई करीबी सीटों पर यह गुस्सा निर्णायक साबित हो सकता है। जिन राज्यों में गैस की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं, वहां रिपब्लिकन उम्मीदवारों को सीधा नुकसान होता दिख रहा है।
युवा और स्वतंत्र वोटर सबसे ज्यादा नाराज
सर्वे की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि 18-45 आयु वर्ग के वोटर और खुद को 'इंडिपेंडेंट' बताने वाले मतदाता ट्रंप की ईरान नीति से सबसे ज्यादा नाखुश हैं। यही वो वर्ग है जो 2020 और 2024 के चुनावों में निर्णायक रहा था। इनका खिसकना रिपब्लिकन के लिए दोहरी मार है।
आगे क्या?
रिपब्लिकन रणनीतिकारों के सामने अब बड़ी चुनौती है। क्या वे मिडटर्म से पहले ईरान पर अपना रुख नरम करेंगे? क्या ट्रंप गैस कीमतों को लेकर कोई नया प्लान देंगे?
फिलहाल तो आंकड़े यही कह रहे हैं कि अमेरिकी जनता ने अपना फैसला सुना दिया है: उन्हें विदेश में महंगी जंग नहीं, घर में सस्ती जिंदगी चाहिए।
2026 का चुनाव अब सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि 'युद्ध बनाम अर्थव्यवस्था' का जनमत संग्रह बनता जा रहा है। और इस जनमत में ट्रंप पिछड़ते नजर आ रहे हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World- 6, May 2026