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Sunday, 3 May 2026

ईरान-इजरायल जंग का कहर: अमेरिका में 34 साल पुरानी 'उड़ती सस्ती' स्पिरिट एयरलाइंस रातोंरात बंद, 18 लाख यात्री फंसे-17000 नौकरियां खतरे में

ईरान-इजरायल जंग का कहर: अमेरिका में 34 साल पुरानी 'उड़ती सस्ती' स्पिरिट एयरलाइंस रातोंरात बंद, 18 लाख यात्री फंसे-17000 नौकरियां खतरे में
-Friday World-May 3,2026 
मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े तनाव ने अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं और इसका सबसे बड़ा झटका अमेरिका की एविएशन इंडस्ट्री को लगा है। अमेरिका की 8वीं सबसे बड़ी और अल्ट्रा लो-कॉस्ट एयरलाइन 'स्पिरिट एयरलाइंस' ने शनिवार को अचानक अपना कारोबार पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया। पीले रंग के विमानों और बेहद सस्ते टिकटों के लिए मशहूर इस एयरलाइन का 34 साल का सफर थम गया।

एक रात में 9,000 फ्लाइट कैंसिल, एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी
स्पिरिट एयरलाइंस ने शनिवार सुबह बिना किसी पूर्व सूचना के अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दीं और कस्टमर सर्विस भी बंद कर दी। सिर्फ मई महीने में ही कंपनी की 9,000 फ्लाइट्स शेड्यूल थीं, जिनमें करीब 18 लाख सीटें बुक थीं। यानी रोजाना 60 हजार से ज्यादा यात्री बीच रास्ते में फंस गए। अमेरिका के दर्जनों एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ लग गई। कई लोगों को आखिरी वक्त में दोगुने-तिगुने दाम पर दूसरी एयरलाइंस की टिकट खरीदनी पड़ी। 

कंपनी ने साफ कहा कि वह यात्रियों की दूसरी एयरलाइन में रीबुकिंग में मदद नहीं करेगी। जिन लोगों ने क्रेडिट कार्ड से टिकट खरीदी थी, उन्हें रिफंड मिल सकता है, लेकिन वाउचर या पॉइंट्स से बुकिंग करने वालों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

जेट फ्यूल बना 'काल', 8.1 अरब डॉलर के कर्ज में डूबी कंपनी
स्पिरिट एयरलाइंस के बंद होने की सबसे बड़ी वजह जेट फ्यूल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। एयरलाइन इंडस्ट्री में ईंधन दूसरा सबसे बड़ा खर्च होता है। स्पिरिट जैसी 'अल्ट्रा लो-कॉस्ट' कंपनियां, जो पहले से ही मार्जिन पर चलती हैं, इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाईं। 

कोर्ट के दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी पर 8.1 अरब डॉलर यानी करीब 67 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। यह पिछले दो साल में दूसरी बार है जब स्पिरिट दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही थी। कंपनी के बंद होने से 17,000 कर्मचारियों की नौकरी पर सीधे खतरा मंडरा रहा है।

ट्रंप सरकार का 'सौदा' नहीं बना, विचारधारा नहीं पैसा था मुद्दा
इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी सामने आया। ट्रंप प्रशासन ने स्पिरिट को दिवालिया होने से बचाने के लिए करदाताओं के पैसे से कंपनी के अधिग्रहण का 'अंतिम प्रस्ताव' रखा था। लेकिन डील नहीं हो पाई। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप को इंटेल जैसी अमेरिकी 'लिगेसी ब्रांड' कंपनियों में सरकार के जरिए निवेश का आइडिया पसंद आ रहा है। वे इसे 'आर्थिक सुरक्षा' और अपनी 'बिजनेस स्किल' का प्रतीक मानते हैं। ट्रंप चाहते थे कि अगर स्पिरिट की खरीद को उनकी 'वित्तीय जीत' के तौर पर दिखाया जा सके, तभी सरकार पैसा लगाए। सूत्रों का कहना है कि ट्रंप का विरोध किसी सिद्धांत पर नहीं, बल्कि 'ज्यादा वित्तीय लाभ' न मिलने की वजह से था। स्पिरिट को राहत पैकेज न मिलने की एक बड़ी वजह यही सौदेबाजी बताई जा रही है।

क्यों खास थी स्पिरिट एयरलाइंस?
स्पिरिट ने अमेरिका में 'सस्ती हवाई यात्रा' का कल्चर शुरू किया था। 'नो फ्रिल्स' मॉडल यानी सिर्फ सीट का पैसा लो, बाकी हर चीज - बैग, पानी, सीट सिलेक्शन - के लिए अलग चार्ज। इसी मॉडल की वजह से अमेरिका में लाखों मध्यमवर्गीय परिवार पहली बार हवाई जहाज में बैठ पाए। 34 साल में कंपनी ने अपने 'अल्ट्रा लो-कॉस्ट' मॉडल पर गर्व जताया। शनिवार को जारी आखिरी बयान में कंपनी ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि हम कई सालों तक यात्रियों की सेवा करते रहेंगे।"

आगे क्या? एविएशन इंडस्ट्री में भूचाल के संकेत
स्पिरिट के बंद होने से अमेरिका के एविएशन सेक्टर में हड़कंप मच गया है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि अगर मिडिल ईस्ट का तनाव लंबा चला और तेल के दाम नीचे नहीं आए, तो फ्रंटियर, अलेजिएंट जैसी दूसरी बजट एयरलाइंस पर भी खतरा मंडरा सकता है। इसका सीधा असर हवाई किराए पर पड़ेगा। कम कंपटीशन का मतलब है टिकट महंगे होना तय है। 

ईरान-इजरायल जंग की चिंगारी अब अमेरिका के आम आदमी की जेब और नौकरी तक पहुंच गई है। स्पिरिट का जाना सिर्फ एक एयरलाइन का बंद होना नहीं, बल्कि उस दौर का खत्म होना है जब 'सस्ती उड़ान' हर किसी का सपना नहीं, हकीकत थी।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-May 3,2026