नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर राहत की बड़ी खबर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सरकार को अब तक का सबसे बड़ा रेकॉर्ड सर्प्लस डिविडेंड ट्रांसफर करने जा रहा है। सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह राशि 2.7 लाख करोड़ से 3.5 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। अगर यह आंकड़ा 3.5 लाख करोड़ के करीब पहुंचा, तो यह भारतीय इतिहास में RBI द्वारा सरकार को दिया गया सबसे बड़ा डिविडेंड साबित होगा।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, विकास योजनाओं और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की चुनौतियों से जूझ रही है। RBI बोर्ड की 22 मई (शुक्रवार) को हुई महत्वपूर्ण बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है।
पिछले रेकॉर्ड को भी तोड़ेगा RBI
गत वित्तीय वर्ष में RBI ने सरकार को **2.69 लाख करोड़ रुपये** का डिविडेंड दिया था, जो उस समय भी रेकॉर्ड था। लेकिन इस बार उसमें भारी उछाल आने की उम्मीद है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों की तुलना में RBI के डिविडेंड में लगभग तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। यह गैर-कर राजस्व का एक बड़ा और भरोसेमंद स्रोत बन गया है।
RBI ने इतना बड़ा मुनाफा कैसे कमाया?
आम नागरिक का सवाल स्वाभाविक है — जब रुपये का मूल्य गिर रहा है, तब RBI इतना मुनाफा कहां से कमा रहा है?
मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. विदेशी मुद्रा भंडार का मूल्य वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 10 प्रतिशत कमजोर हुआ। RBI के पास रखे गए विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) का मूल्य रुपयों में बढ़ गया। इस समय भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 688 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से 3 प्रतिशत अधिक है।
2. फॉरेक्स मार्केट में सक्रिय हस्तक्षेप: रुपया ज्यादा गिरने से बचाने के लिए RBI ने बाजार में भारी मात्रा में डॉलर बेचे। इन ऑपरेशंस से बैंक को अच्छा मुनाफा हुआ।
3. उच्च प्रतिफल (Returns) पर विदेशी निवेश: RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित और लाभकारी एसेट्स में निवेश करता है। अंतरराष्ट्रीय बांड, ट्रेजरी सिक्योरिटीज आदि से मिलने वाले उच्च ब्याज ने भी मुनाफे में बड़ा योगदान दिया।
4. नोट छपाई और अन्य आय: करेंसी प्रिंटिंग तथा अन्य गतिविधियों से भी RBI को अतिरिक्त आय हुई।
इन सभी कारकों के मिले-जुले प्रभाव से RBI का कुल मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
सरकार को मिलेगा कितना बड़ा फायदा?
3.5 लाख करोड़ रुपये की यह राशि सरकार के लिए **नॉन-टैक्स रेवेन्यू** का बड़ा सहारा बनेगी। इस धनराशि का उपयोग निम्न क्षेत्रों में हो सकता है:
- राष्ट्रीय राजमार्ग, हाई-स्पीड रेल, एयरपोर्ट और पोर्ट जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश
- किसान कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार योजनाओं को मजबूत करना
- राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को लक्षित स्तर पर नियंत्रित रखना
- सब्सिडी खर्च और विकास कार्यक्रमों के वित्तपोषण में सहायता
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि मिलने से सरकार पर नए टैक्स लगाने या बॉन्ड जारी करने का दबाव कम होगा। इससे आर्थिक विकास को और गति मिलेगी।
RBI और सरकार के बीच डिविडेंड ट्रांसफर का इतिहास
RBI का डिविडेंड ट्रांसफर Bimal Jalan Committee की सिफारिशों के आधार पर तय होता है। 2019 में हुई व्यवस्था के बाद RBI ने लगातार बड़े डिविडेंड दिए हैं।
- FY 2023-24: लगभग 2.11 लाख करोड़
- FY 2024-25: 2.69 लाख करोड़ (रिकॉर्ड)
- FY 2025-26: 2.7 से 3.5 लाख करोड़ (अनुमानित)
यह ट्रेंड दिखाता है कि मजबूत विदेशी मुद्रा प्रबंधन और सशक्त मौद्रिक नीति RBI को मुनाफेदार बनाने में सफल रही है।
चुनौतियां भी मौजूद
हालांकि यह खबर सकारात्मक है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। रुपये की लगातार गिरावट से आयात महंगा होता है, खासकर कच्चे तेल का। RBI को मुद्रास्फीति पर भी नजर रखनी पड़ती है। साथ ही, इतना बड़ा डिविडेंड लेने के बाद सरकार पर खर्च प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
RBI गवर्नर और बोर्ड का यह फैसला शनिवार को या उसके बाद आधिकारिक रूप से घोषित होने की संभावना है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम
यह डिविडेंड ट्रांसफर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत** और **विकसित भारत 2047 के विजन को मजबूती प्रदान करेगा। जब देश वैश्विक अनिश्चितताओं (जैसे भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान) से जूझ रहा है, तब RBI का यह योगदान आर्थिक स्थिरता का प्रतीक है।
RBI द्वारा संभावित 3.5 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड न सिर्फ सरकार के लिए राहत है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और RBI की कुशल प्रबंधन क्षमता का प्रमाण भी है। यह राशि सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों, रेलवे और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में आम नागरिकों तक पहुंचेगी।
देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। विदेशी मुद्रा भंडार, निर्यात, FDI और डिजिटल ट्रांजेक्शंस सभी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। RBI का यह कदम भविष्य के लिए भी उम्मीद जगाता है।
अभी इंतजार है 22 मई की बैठक का — जहां से इतिहास रचने वाला फैसला आने वाला है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 26 May 2026