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Wednesday, 20 May 2026

ईरान युद्ध: अमेरिका को सबसे महंगा सबक – 42 फाइटर जेट गंवाए, कांग्रेस ने किया ट्रंप का जुठ उजागर रिपब्लिकन शिविर में सन्नाटा

ईरान युद्ध: अमेरिका को सबसे महंगा सबक – 42 फाइटर जेट गंवाए, कांग्रेस ने किया ट्रंप का जुठ उजागर रिपब्लिकन शिविर में सन्नाटा
-Friday World-20 May 2026
By Friday World | 20 मई 2026

2026 की शुरुआत में मध्य पूर्व की आग एक बार फिर भड़की। इजराइल और अमेरिका के संयुक्त अभियान Operation Epic Fury ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, सैन्य ठिकानों और वायु रक्षा प्रणालियों पर भारी हमले किए। लेकिन इस 40 दिनों के हाई-टेक युद्ध ने अमेरिका को भी भारी कीमत चुकानी पड़ी। आधिकारिक Congressional Research Service (CRS) रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने 42 एयरक्राफ्ट (फाइटर जेट, ड्रोन और सपोर्ट एयरक्राफ्ट) खोए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किए। अनुमानित नुकसान 2.6 बिलियन डॉलर (करीब 22,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा।

यह आंकड़ा केवल कागजी नहीं है। यह आधुनिक हवाई युद्ध की क्रूर हकीकत को उजागर करता है – जहां महंगे स्टेल्थ जेट और ड्रोन कुछ ही घंटों या दिनों में राख हो सकते हैं।

युद्ध का संक्षिप्त कालक्रम

फरवरी के अंत में शुरू हुए इस अभियान में अमेरिकी और इजराइली वायुसेना ने ईरान पर सैकड़ों सॉर्टी मारीं। लक्ष्य थे: नटांज और फोर्डो जैसे परमाणु केंद्र, मिसाइल उत्पादन फैक्टरियां और IRGC के कमांड सेंटर्स। ईरान ने जवाब में बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन स्वार्म और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम (रूसी S-300/400 और घरेलू Bavar-373) का इस्तेमाल किया।

CRS रिपोर्ट (13 मई 2026) के मुताबिक कुल 42 एयरक्राफ्ट प्रभावित हुए:

- 24 MQ-9 Reaper ड्रोन (सबसे ज्यादा नुकसान)

- 4 F-15E Strike Eagle फाइटर जेट

- 1 F-35A Lightning II स्टेल्थ फाइटर (दुश्मन फायर से क्षतिग्रस्त – अमेरिकी इतिहास में पहली बार)

- KC-135 टैंकर, E-3 Sentry AWACS, A-10 Thunderbolt और रेस्क्यू हेलीकॉप्टर सहित अन्य

कुछ नुकसान ईरानी मिसाइलों से, कुछ फ्रेंडली फायर (अमेरिकी/कुवैती डिफेंस से) और कुछ दुर्घटनाओं से हुए। Pentagon ने अभी तक पूरी डिटेल सार्वजनिक नहीं की है, जिससे आशंका है कि असली संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है।

 अमेरिकी कांग्रेस में पड़ताल और तनाव
CRS रिपोर्ट आने के बाद अमेरिकी कांग्रेस में जोरदार बहस छिड़ गई। Democrats ने ऑपरेशन की लागत, नागरिक हताहतों और पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए। Republicans, जो ट्रंप प्रशासन के समर्थन में थे, खुद आंतरिक दबाव में हैं।

मुख्य मुद्दे:
- एयरपावर की टिकाऊता: इतनी कम अवधि में इतने assets खोने से Air Force readiness पर सवाल।

- Replacement Cost: F-35 जैसा जेट बनाने में सालों लगते हैं और अरबों डॉलर खर्च होते हैं।

- Transparency: Pentagon पर आरोप कि उसने Congress को पूरी जानकारी नहीं दी।

- Supplemental funding की मांग – लगभग 200 बिलियन डॉलर तक की चर्चा।

रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी दो धड़े दिखाई दे रहे हैं – एक तरफ हॉक्स (जो ईरान पर सख्त एक्शन चाहते हैं) और दूसरी तरफ फिस्कल कंजर्वेटिव जो इतनी भारी लागत पर चिंतित हैं। कुछ सीनेटर्स ने कहा, “हम ईरान को कमजोर करने आए थे, लेकिन अपनी हवाई ताकत को भी काफी नुकसान पहुंचा दिया।”

 ईरान का रेसिस्टेंस और सबक

ईरान ने इस युद्ध में अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया। उसकी बैलिस्टिक मिसाइलें अमेरिकी बेस पर वार करने में सफल रहीं और एयर डिफेंस ने कई हाई-वैल्यू टारगेट्स को बचाया। ईरानी मीडिया इसे “ऐतिहासिक प्रतिरोध” बता रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार आधुनिक युद्ध में attrition rate (नुकसान की दर) बहुत ऊंची हो जाती है। MQ-9 Reaper जैसे ड्रोन सस्ते लगते हैं लेकिन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में वे भी जल्दी खत्म हो जाते हैं। F-35 जैसी तकनीक शक्तिशाली है, लेकिन जब दुश्मन के पास layered air defense और स्वार्म अटैक हो तो कोई भी सिस्टम 100% सुरक्षित नहीं रहता।

वैश्विक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां

इस युद्ध ने कई बड़े सबक दिए:
1. ड्रोन वॉरफेयर का युग पूरी तरह आ चुका है। सस्ते ड्रोन महंगे जेट्स को चुनौती दे रहे हैं।

2. स्टेल्थ टेक्नोलॉजी की सीमाएं सामने आई हैं।

3. लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट सिस्टम (टैंकर, AWACS) भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने फाइटर जेट।

4. Political Cost: युद्ध जीतने के बाद भी घरेलू राजनीति में घाटा हो सकता है।

ट्रंप प्रशासन इसे “मिशन सफल” बता रहा है क्योंकि ईरान की कई महत्वपूर्ण सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। लेकिन आलोचक कहते हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह रुका नहीं है और अब वह और ज्यादा गुप्त व छितराए हुए तरीके अपनाएगा।

रिपब्लिकन पार्टी में तनाव इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि 2026 के mid-term elections नजदीक हैं। वोटर महंगाई, युद्ध की लागत और सैनिकों की सुरक्षा पर सवाल पूछ रहे हैं। कुछ रिपब्लिकन lawmakers खुलकर कह रहे हैं कि “अभी और युद्ध नहीं, पहले अपनी सेना को मजबूत करें।”

 महंगे सबक की कीमत

42 एयरक्राफ्ट का नुकसान अमेरिका जैसे सुपरपावर के लिए विनाशकारी नहीं है – उसके पास हजारों एयरक्राफ्ट हैं। लेकिन यह psychologically और strategically महत्वपूर्ण है। यह दिखाता है कि कोई भी देश, चाहे कितना भी ताकतवर हो, आधुनिक युद्ध में भारी कीमत चुकाए बिना विजय हासिल नहीं कर सकता।

ईरान युद्ध ने साबित कर दिया कि भविष्य के संघर्षों में quantity, innovation और resilience की जरूरत quantity of expensive platforms से ज्यादा होगी। अमेरिका अब अपनी वायुसेना की रणनीति, ड्रोन स्वार्म डिफेंस और ally coordination पर फिर से विचार कर रहा है।

कांग्रेस की पड़ताल जारी है। रिपोर्ट्स के और खुलासे आने वाले हैं। दुनिया देख रही है कि यह “महंगा सबक” अमेरिकी विदेश नीति को किस दिशा में ले जाता है – और ईरान-इजराइल-अमेरिका त्रिकोण की अगली कड़ी क्या होगी।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-20 May 2026