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Friday, 1 May 2026

ईरान ने 45 साल के प्रतिबंध और अमेरिका-इजरायल के पूर्ण हमले को भी झेल लिया — 40 दिनों में दोनों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया! अब ट्रंप बोखलाए, हॉर्मुज खुलवाने के लिए दुनिया से गुहार लगा रहे

ईरान ने 45 साल के प्रतिबंध और अमेरिका-इजरायल के पूर्ण हमले को भी झेल लिया — 40 दिनों में दोनों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया! अब ट्रंप बोखलाए, हॉर्मुज खुलवाने के लिए दुनिया से गुहार लगा रहे
-Friday World-May 1,2026 
मध्य पूर्व की जंग ने एक बार फिर विश्व की भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। 45 साल से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में जकड़े ईरान पर “पूर्ण शक्ति” का इस्तेमाल किया गया। परिणाम? ईरान ने न सिर्फ हमलों का डटकर मुकाबला किया, बल्कि महज 40 दिनों के भीतर अमेरिका और इजरायल दोनों को रणनीतिक रूप से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

आज स्थिति यह है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज लगभग बंद पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें चार साल के रिकॉर्ड स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परेशान हैं और दुनिया भर के देशों से हॉर्मुज खुलवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की अपील कर रहे हैं। वहीं ईरान शांत लेकिन दृढ़ है — उसने साफ चेतावनी दी है कि अगर फिर हमला हुआ तो सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि full-scale पलटवार (counter-attack) होगा।

 45 साल की सजा और फिर भी अटूट प्रतिरोध

ईरान पर 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही अमेरिका और पश्चिमी देशों ने लगातार आर्थिक प्रतिबंध लगाए। परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय प्रभाव के कारण तेहरान को “दुनिया का सबसे सजा पा चुका देश” कहा जाता था। 

फिर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त अभियान “Operation Epic Fury” के तहत ईरान के परमाणु स्थलों, सैन्य ठिकानों और नेतृत्व पर भारी हमले किए। यहां तक कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की खबर भी आई। दुनिया को लगा कि ईरान अब टूट जाएगा। लेकिन ईरान ने जो जवाब दिया, वह इतिहास में दर्ज हो गया।

ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ड्रोन, मिसाइल और समुद्री हमलों से जवाबी कार्रवाई की। हॉर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया, जिससे विश्व की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति ठप हो गई। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लगा दी, लेकिन ईरान ने भी जहाजों को रोका। नतीजा — वैश्विक ऊर्जा संकट।

महज 40 दिनों में ईरान ने इतना दबाव बनाया कि अमेरिका-इजरायल को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा। ईरान ने साबित कर दिया कि प्रतिबंध, हमले और अलगाव के बावजूद उसकी सैन्य और रणनीतिक क्षमता अभी भी मजबूत है।

 हॉर्मुज बंद: दुनिया पर मंदी का साया

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज विश्व तेल व्यापार का गला है। यहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल और LNG गुजरता है। ईरान के बंद करने और अमेरिकी नाकाबंदी के कारण शिपिंग ट्रैफिक 90-95% तक घट गया। 

परिणाम:
- ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा (चार साल का उच्चतम स्तर)
- अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें 4.30 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गईं
- यूरोप, भारत, चीन और एशियाई देशों में ईंधन की कमी, मुद्रास्फीति और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ गया
- कई खाड़ी देशों को अपना तेल उत्पादन घटाना पड़ा

ईरान का कहना है कि जब तक उसके खिलाफ खतरा बना रहेगा, हॉर्मुज खुलने वाला नहीं।

 ट्रंप की बोखलाहट: 500 धमकियां, लेकिन ईरान अडिग

ट्रंप प्रशासन ने ईरान को बार-बार धमकियां दीं। सोशल मीडिया पर ट्रंप ने लिखा — “मैं अब Mr. Nice Guy नहीं रहा।” उन्होंने ईरान की पावर प्लांट्स और ब्रिजेस को नष्ट करने की बात कही। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कम से कम 500 बार विभिन्न रूपों में ईरान को चेतावनी दी।

ट्रंप ने कई देशों को सीक्रेट डिप्लोमैटिक मैसेज भेजे और हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की अपील की। लेकिन ज्यादातर देश सतर्क हैं। कोई भी बड़े पैमाने पर सैन्य सहयोग देने को तैयार नहीं दिख रहा।

अब ट्रंप नए सैन्य विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं। एक्सिओस और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे ईरान पर और हमलों की योजना बना रहे हैं ताकि तेहरान को बातचीत के लिए मजबूर किया जा सके। लेकिन ईरान का रुख साफ है:

> “अगर हमला हुआ तो सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि हमला होगा। अमेरिका और इजरायल मध्य पूर्व में सिर्फ ईरान के खंडहर राज्य बनकर रह जाएंगे।”

यह बयान ईरान की नई रणनीति को दर्शाता है — अब वे passive defense से आगे बढ़कर proactive deterrence की बात कर रहे हैं।

 दोनों तरफ की चुनौतियां

ईरान के लिए:
- अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव के बावजूद साधरण 
- तेल निर्यात ठप लेकिन दूसरे बहुत सारे सोर्स ईरान के साथ 
- आंतरिक तनाव अमेरिका-इजरायल के हमले से सुप्रीम लीडर के साथ एक जुट हो गए राजनीतिक और सामाजिक कोई तनाव नही 
ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट पर अपना टोल वसूले गा

अमेरिका-इजरायल के लिए:
- उच्च तेल कीमतों से घरेलू राजनीतिक नुकसान
- वैश्विक मंदी का खतरा
- लंबे युद्ध की थकान
- सहयोगी देशों से सीमित समर्थन
डॉलर का डी-डॉलराइजेशन 
पेट्रो डॉलर का प्रभाव समाप्त उनके सामने युआन-रियाल से ऑयल की खरीदी 
पहले से अमेरिकान टैरिफ से दुनिया परेशान थी अब चलते फिरते सब लात लगाते जाए गे 

विश्लेषकों का मानना है कि यह जंग अब “attrition war” (घिसाघिसी की जंग) में बदल गई है। अमेरिका-इजरायल दोनों मान रहे हैं कि समय उनके पक्ष में नहीं है।

 वैश्विक प्रभाव और भारत के लिए सबक

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ऊंची तेल कीमतें मुद्रास्फीति बढ़ा रही हैं, रुपया दबाव में है और आर्थिक विकास पर असर पड़ रहा है। चीन और यूरोप भी इसी स्थिति में हैं।

यह संकट एक बार फिर साबित कर रहा है कि मध्य पूर्व की अस्थिरता पूरे विश्व को प्रभावित करती है। ऊर्जा सुरक्षा अब सिर्फ सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि कूटनीति, विविधीकरण और रणनीतिक भंडारण पर भी निर्भर है।

आगे क्या?

स्थिति बेहद नाजुक है। ईरान ने हाल ही में कुछ समझौता प्रस्ताव दिए हैं जिसमें हॉर्मुज खोलने और प्रतिबंधों को एक साथ चर्चा करने की बात कही गई है, लेकिन ट्रंप इसे “असंतोषजनक” बता चुके हैं। परमाणु कार्यक्रम अभी भी सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है।

दुनिया इस समय दो सवालों का जवाब ढूंढ रही है:
1. हॉर्मुज कब और कैसे खुलेगा?
2. क्या ट्रंप फिर बड़े सैन्य हमले का फैसला करेंगे या कूटनीति जीतेगी?

ईरान ने 45 साल के प्रतिबंध और पूर्ण हमले के बावजूद अपनी संप्रभुता और प्रतिरोध की क्षमता साबित की है। ट्रंप की बोखलाहट और बार-बार की गुहार इस बात का संकेत है कि सुपरपावर भी हर लड़ाई आसानी से नहीं जीत सकती।

मध्य पूर्व की यह नई जंग न सिर्फ तेल की कीमतें, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी बदल रही है। आने वाले दिनों में कोई बड़ा डिप्लोमैटिक ब्रेकथ्रू या और तनाव — दोनों संभव हैं।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-May 1,2026