दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जारी तनाव और नाकाबंदी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं और संक्षिप्त रूप से 126 डॉलर प्रति बैरल तक छू गईं। यह उछाल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच फरवरी 2026 से चले आ रहे संघर्ष का सीधा नतीजा है, जिसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद पड़ा हुआ है।
ईरान इस स्थिति से खुश नजर आ रहा है। तेहरान का कहना है कि अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद उसकी कच्चे तेल उत्पादन क्षमता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। उल्टा, बढ़ते दामों से उसे फायदा हो रहा है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर तनाव जारी रहा तो कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसके ऊपर खतरा बना रहेगा, वह हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को रोकता रहेगा।
हॉर्मुज की नाकाबंदी: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस (LNG) के परिवहन का प्रमुख रास्ता है। फरवरी 2026 में शुरू हुए US-Israel-Iran युद्ध के बाद ईरान ने इस रास्ते को प्रभावी रूप से बंद कर दिया। इसके जवाब में अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों पर नाकाबंदी लगा दी, जिससे "डबल ब्लॉकेड" की स्थिति बन गई है।
नतीजा?
- वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी कमी
- कई देशों में ईंधन की कमी और कीमतों में उछाल
- वैश्विक आर्थिक मंदी (recession) का बढ़ता खतरा
सऊदी अरब, UAE और इराक जैसे देशों को भी अपने तेल उत्पादन को कम करना पड़ा है, क्योंकि निर्यात का रास्ता अवरुद्ध है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे "वैश्विक तेल बाजार में अब तक की सबसे बड़ी आपूर्ति व्यवधान" बताया है।
ट्रंप परेशान, कई देशों को भेजा सीक्रेट मैसेज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस स्थिति से काफी चिंतित दिख रहे हैं। उच्च तेल कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कई देशों को सीक्रेट डिप्लोमैटिक केबल के जरिए मैसेज भेजा है, जिसमें हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की अपील की गई है।
ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से भी अन्य देशों से कहा है कि वे खुद हॉर्मुज को सुरक्षित बनाने में मदद करें। उन्होंने कहा, "अमेरिका ने ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया है, अब बाकी देश अपना तेल खुद लेने का इंतजाम करें।"
ट्रंप की नई सैन्य योजना और ईरान को धमकी
एक्सिओस और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ईरान पर नए सैन्य हमलों की योजना बना रहे हैं ताकि उसे बातचीत की मेज पर लाया जा सके। गुरुवार को इस तरह की खबरों के बाद तेल की कीमतों में फिर उछाल देखा गया।
ट्रंप ने सोशल मीडिया (Truth Social) पर एक पोस्ट में ईरान को सीधी चेतावनी दी:
> "ईरान को नॉन-न्यूक्लियर डील साइन करना नहीं आता। उन्हें जल्दी समझदार बनना चाहिए। मैं अब Mr. Nice Guy नहीं रहा।"
पोस्ट के साथ उन्होंने एक AI-जनरेटेड तस्वीर भी शेयर की, जिसमें वे मशीन गन लिए हुए खड़े हैं और पृष्ठभूमि में विस्फोट हो रहे हैं, साथ में कैप्शन – "No More Mr. Nice Guy!"
ट्रंप ने साफ कहा है कि वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे और अगर जरूरी हुआ तो ईरान की बुनियादी ढांचे (पावर प्लांट, ब्रिज आदि) पर हमले किए जा सकते हैं।
ईरान का रुख: दबाव में नहीं झुकेंगे
ईरान का स्टैंड मजबूत है। वह कह रहा है कि जब तक अमेरिका-इजरायल का खतरा बना रहेगा, हॉर्मुज खुलने वाला नहीं है। ईरान ने पाकिस्तान जैसे देशों के माध्यम से बातचीत की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। तेहरान में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी धमकियों के खिलाफ आवाज उठाई है।
वैश्विक प्रभाव: किसे फायदा, किसे नुकसान?
- ईरान: बढ़े हुए तेल दामों से कुछ राहत, हालांकि उसकी अपनी अर्थव्यवस्था भी नाकाबंदी से प्रभावित है।
- अन्य खाड़ी देश: उत्पादन घटने से नुकसान, लेकिन ऊंचे दामों से कुछ मुनाफा।
- भारत, चीन, यूरोप जैसे आयातक देश: महंगा तेल, मुद्रास्फीति और आर्थिक दबाव।
- अमेरिका: घरेलू कीमतें बढ़ने से ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर हॉर्मुज जल्द नहीं खुला तो वैश्विक मंदी का खतरा और बढ़ जाएगा। टैंकरों को नई जगहों पर पहुंचाने, उत्पादन बहाल करने और विश्वास बहाल करने में हफ्तों का समय लग सकता है।
आगे क्या?
स्थिति बेहद नाजुक है। ट्रंप एक तरफ सैन्य विकल्पों की तैयारी कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश में जुटे हैं। ईरान "दबाव में नहीं झुकने" का संदेश दे रहा है। पाकिस्तान, चीन और अन्य देश मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं।
दुनिया इस समय दो बड़े सवालों का जवाब ढूंढ रही है:
1. हॉर्मुज कब और कैसे खुलेगा?
2. क्या तेल की कीमतें 140 डॉलर तक पहुंच जाएंगी?
जब तक कोई ठोस डिप्लोमैटिक ब्रेकथ्रू नहीं होता, तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव जारी रहने वाला है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-May 1,2026