-Friday World-May 2,2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी “शांति दूत” वाली छवि चमकाने में जुट गए हैं। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के 2025 के सैन्य तनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि पहेलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देश परमाणु युद्ध की कगार पर थे, लेकिन उन्होंने “टैरिफ लगा दूंगा” की धमकी देकर युद्ध टाल दिया। ट्रंप का यह बयान न सिर्फ सुर्खियां बटोर रहा है, बल्कि भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
घटना का पूरा विस्तार: 2025 का पहेलगाम संकट
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थल पहेलगाम में हुए घातक आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में कई निर्दोष नागरिक और पर्यटक शहीद हुए। भारत सरकार ने इसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का हिस्सा मानते हुए तुरंत सख्त कार्रवाई का फैसला लिया।
भारतीय सशस्त्र बलों ने **ऑपरेशन सिंदूर** शुरू किया। इस अभियान में वायुसेना, थलसेना और नौसेना के समन्वय से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) और पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों, लॉन्च पैड्स और सपोर्ट बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। ऑपरेशन की सफलता के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। गोलीबारी, मिसाइलों का आदान-प्रदान और हवाई कार्रवाइयों की खबरें आने लगीं।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैदान में कूद पड़े। ओवल ऑफिस में हालिया बयान में उन्होंने कहा कि दोनों परमाणु शक्तियां “पूर्ण युद्ध” की ओर बढ़ रही थीं। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के नेताओं से सीधे संपर्क किया और स्पष्ट चेतावनी दी – “अगर लड़ाई जारी रखी तो मैं दोनों पर बहुत भारी टैरिफ लगा दूंगा। अमेरिका के साथ व्यापार बंद कर दूंगा।”
ट्रंप ने टैरिफ की दर 200 प्रतिशत से लेकर 350 प्रतिशत तक बताई। उनके अनुसार, आर्थिक दबाव के कारण दोनों देश पीछे हट गए और बड़े पैमाने का युद्ध टल गया।
ट्रंप की कूटनीति: टैरिफ ही सबसे बड़ा हथियार
ट्रंप की विदेश नीति का सबसे बड़ा हथियार हमेशा से आर्थिक दबाव रहा है। चीन पर लगाए गए टैरिफ, यूरोपीय देशों के साथ व्यापार युद्ध और अब भारत-पाकिस्तान मुद्दे में भी यही फॉर्मूला। उन्होंने कहा, “पैसे से ज्यादा ताकतवर कुछ नहीं है। मैंने उन्हें कहा कि लड़ो मत, वरना ट्रेड डील्स खत्म।”
ट्रंप कई बार यह दावा दोहरा चुके हैं – स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण, बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग और अब ओवल ऑफिस में। हर बार कहानी में थोड़ा नया मोड़ जोड़ते हैं। कभी विमानों की संख्या बढ़ जाती है, कभी टैरिफ प्रतिशत।
भारत का स्पष्ट जवाब: स्वतंत्र कार्रवाई, कोई बाहरी मध्यस्थता नहीं
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने ट्रंप जैसे दावों को लगातार खारिज किया है। आधिकारिक बयानों में कहा गया कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का हिस्सा था। किसी भी विदेशी देश ने इसमें मध्यस्थता नहीं की। भारत हमेशा से कहता रहा है कि कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे पर वह किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं करता।
भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का बयान उनकी घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि चमकाने का हिस्सा है। 2025 के संकट में भारत मजबूत स्थिति में था। पाकिस्तान की आर्थिक हालत पहले से कमजोर थी। दोनों देशों के बीच सीधी सैन्य और कूटनीतिक चैनलों से बातचीत हुई, जिसमें अमेरिका की भूमिका सीमित थी।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और प्रभाव
ट्रंप के इन दावों का भारत-अमेरिका संबंधों पर असर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सहयोग है। क्वाड, इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसी साझेदारियां आगे बढ़ रही हैं। फिर भी ट्रंप के बयान भारत की संप्रभुता की भावना को ठेस पहुंचाते हैं।
पाकिस्तान की ओर से इन दावों का स्वागत किया जा रहा है क्योंकि इससे उन्हें “ट्रंप ने बचाया” वाला नैरेटिव मिलता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि 2025 का तनाव दोनों देशों की आंतरिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय दबाव से कम हुआ।
ट्रंप की शांति कूटनीति की आलोचना
ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में कई “युद्ध समाप्त” करने का दावा कर चुके हैं। मध्य पूर्व, यूरोप और अब दक्षिण एशिया। आलोचक कहते हैं कि यह अतिशयोक्ति है। परमाणु शक्तियों के बीच टैरिफ से युद्ध रोकना इतना सरल नहीं। सैन्य संतुलन, खुफिया जानकारी, कूटनीतिक दबाव और दोनों देशों की इच्छाशक्ति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
ट्रंप की स्टाइल “डील मेकिंग” पर आधारित है। वे हर मुद्दे को व्यापारिक सौदे की तरह देखते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय संबंध जटिल होते हैं। भावनाएं, इतिहास और सुरक्षा चिंताएं सिर्फ टैरिफ से नहीं सुलझतीं।
भारत के लिए सबक और भविष्य की राह
ट्रंप के बयानों से भारत को एक बार फिर याद आता है कि अपनी सुरक्षा पर भरोसा रखना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति जारी रखनी चाहिए। साथ ही अमेरिका जैसे मित्र देशों के साथ संबंध मजबूत रखते हुए, लेकिन किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को सिरे से खारिज करना चाहिए।
भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, सैन्य क्षमता और कूटनीतिक कौशल ही उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। 2025 का संकट इसका प्रमाण है। भविष्य में भी भारत अपनी स्वतंत्र नीति पर चलता रहेगा।
ट्रंप का “टैरिफ लगा दूंगा” वाला बयान सुर्खियों में रह सकता है, लेकिन भारत की जनता और सरकार अच्छी तरह जानती है कि देश की सुरक्षा कौन तय करता है – वह खुद।
यह दावा ट्रंप की व्यक्तिगत छवि चमकाने का हिस्सा हो सकता है, लेकिन वास्तविकता भारत की साहसिक कार्रवाई और रणनीतिक परिपक्वता में छिपी है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-May 2,2026