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Saturday, 2 May 2026

पैलेस्टाइन के लिए कोई सहानुभूति नहीं, नए और पुराने अब्बा के लिए सब कुछ कुर्बान! UAE ने अमेरिका को बदलकर इजरायल को सौंपा सैनिक अड्डा, इजरायल ने तैनात किए लेजर हथियार और सैनिक

पैलेस्टाइन के लिए कोई सहानुभूति नहीं, नए और पुराने अब्बा के लिए सब कुछ कुर्बान! UAE ने अमेरिका को बदलकर इजरायल को सौंपा सैनिक अड्डा, इजरायल ने तैनात किए लेजर हथियार और सैनिक
-Friday World-May 2,2026
मध्य पूर्व के भीषण युद्ध के बीच UAE के फैसले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। पैलेस्टाइन के लिए कोई सहानुभूति नहीं, नए और पुराने अब्बा के लिए सब कुछ कुर्बान! युद्ध के दौरान UAE ने अमेरिका के बजाय इजरायल को सैनिक अड्डा सौंप दिया। इजरायल ने अपनी सबसे उन्नत लेजर हथियार प्रणाली ‘आयरन बीम’ और सैनिकों को तैनात करके UAE को ईरानी हमलों से बचाया। यह घटना महज सुरक्षा सहयोग नहीं, बल्कि अब्राहम समझौतों की असली परीक्षा और पैलेस्टाइन मुद्दे पर अरब देशों की प्राथमिकताओं का स्पष्ट चित्रण है।

 पैलेस्टाइन भुलाया, UAE-इजरायल गठबंधन मजबूत

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद ईरान ने UAE को निशाना बनाया। 500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 2,000 ड्रोन UAE की ओर दागे गए। कारण साफ था – 2020 के अब्राहम एक्सॉर्ड्स के तहत UAE ने इजरायल के साथ संबंध स्थापित किए थे। इस संकट की घड़ी में UAE ने अमेरिका के बजाय इजरायल को अपनी जमीन पर सैनिक अड्डा देने का फैसला किया। इजरायल ने अपने सैनिकों और अत्याधुनिक हथियार भेजकर UAE की रक्षा की।

इस सहयोग में सबसे महत्वपूर्ण है आयरन बीम लेजर डिफेंस सिस्टम। यह सिस्टम छोटी दूरी के रॉकेटों और ड्रोनों को लेजर किरणों से भाप बना देता है। लागत सिर्फ 3 डॉलर प्रति शॉट। आयरन डोम मिसाइल इंटरसेप्टर और स्पेक्ट्रो सर्विलांस डिवाइस भी तैनात किए गए, जो 20 किलोमीटर दूर से ड्रोनों को पहचान लेते हैं। इजरायल ने ईरानी मिसाइलों की रियल-टाइम खुफिया जानकारी भी साझा की।

 इजरायली सैनिकों की तैनाती: अभूतपूर्व कदम

सबसे चौंकाने वाली बात इजरायली सैनिकों की तैनाती है। इजरायल ने सिर्फ हथियार ही नहीं, दर्जनों सैनिक भी UAE भेजे। यह पहली बार हुआ जब इजरायली सेना किसी अरब देश की प्रत्यक्ष रक्षा के लिए मैदान में उतरी। नेतन्याहू और UAE राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के बीच फोन पर बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों में यह अब तक का सबसे बड़ा और अनोखा कदम माना जा रहा है।

UAE ने अमेरिका के बजाय इजरायल को प्राथमिकता दी। इसका कारण व्यावहारिक सुरक्षा जरूरत है। पैलेस्टाइन के लिए संवेदना दिखाने के बजाय UAE ने अपने और क्षेत्रीय हितों को आगे रखा। कई लोग इसे “नए-पुराने अब्बा” के लिए कुर्बानी मानते हैं, जहां पैलेस्टाइनियों की पीड़ा को नजरअंदाज कर आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन को प्राथमिकता दी गई।

अब्राहम एक्सॉर्ड्स की सच्ची परीक्षा

2020 के अब्राहम समझौते ने UAE, बहरीन, मोरक्को जैसे देशों को इजरायल के साथ संबंध बनाने का मौका दिया। समझौते का मुख्य आकर्षण आर्थिक सहयोग, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा था। ईरान के खिलाफ साझा दुश्मनी ने इस गठबंधन को और मजबूत किया। फरवरी 2026 का युद्ध इस समझौते की असली कसौटी बन गया।

ईरान ने UAE पर सबसे भारी हमले किए क्योंकि वह इजरायल का मित्र बन चुका था। लेकिन UAE की इस मदद से ईरान को साफ संदेश गया कि गल्फ देश अब अकेले नहीं हैं। तकनीकी श्रेष्ठता, गुप्त सुरक्षा सहयोग और सैनिकों की मौजूदगी ने नया समीकरण बना दिया है।

 आयरन बीम और अन्य सिस्टम की तकनीकी जानकारी

आयरन बीम: हाई-पावर लेजर सिस्टम। ड्रोन और रॉकेट को तुरंत नष्ट कर देता है। पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बहुत सस्ता और प्रभावी। दिसंबर 2025 में IDF को मिली यह प्रणाली UAE में युद्ध की आग में परखी गई।

आयरन डोम: विश्व प्रसिद्ध मिसाइल डिफेंस सिस्टम। गाजा और लेबनान से आने वाले हमलों को रोकने में सफल।

स्पेक्ट्रो सर्विलांस: उन्नत सेंसर्स के साथ 20 किमी दूर से ड्रोन का पता लगाता है।

इन सभी सिस्टमों का संयोजन UAE को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। इजरायली सैनिकों की मौजूदगी ने इन सिस्टमों को प्रभावी ढंग से चलाने में मदद की।

 रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव

यह घटना सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि रणनीतिक विकास है। UAE के लिए ईरानी खतरा वास्तविक है। इजरायल के साथ गठबंधन उसे मजबूत बनाता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह प्रासंगिक है क्योंकि UAE भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है और इजरायल के साथ रक्षा सहयोग बढ़ रहा है।

युद्ध का आर्थिक प्रभाव भी पड़ा। एयर इंडिया जैसी कंपनियों को ईंधन सरचार्ज बढ़ाना पड़ा। ऐसे समय में UAE-इजरायल सहयोग ने स्थिरता बनाए रखने में मदद की।

पैलेस्टाइन मुद्दे पर अरब देशों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। आर्थिक विकास, सुरक्षा और ईरान विरोधी गठबंधन को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। कुछ इसे पैलेस्टाइन के प्रति उपेक्षा मानते हैं, तो कुछ इसे व्यावहारिक राजनीति कहते हैं।

 भविष्य की दिशा

यह सहयोग दर्शाता है कि मध्य पूर्व में पुराने दुश्मन-मित्र के समीकरण बदल रहे हैं। सऊदी अरब, बहरीन जैसे देश भी इस ओर बढ़ रहे हैं। ईरान का अलगाव बढ़ रहा है। लेजर हथियारों का युग शुरू हो चुका है, जो युद्ध की प्रकृति बदल देगा।

UAE और इजरायल का यह गुप्त कवच वर्तमान युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले रणनीतिक संबंधों की शुरुआत है। पैलेस्टाइन के लिए सहानुभूति के सवाल के साथ यह घटना अरब दुनिया की नई प्राथमिकताओं को उजागर करती है – सुरक्षा और विकास को सर्वोपरि मानना।

यह घटना दुनिया को याद दिलाती है कि आधुनिक राजनीति में भावनाओं से ज्यादा व्यावहारिक हित महत्व रखते हैं। UAE ने अपने नेतृत्व के फैसले से देश को सुरक्षित रखा, लेकिन इसकी कीमत पैलेस्टाइनियों की पीड़ा को नजरअंदाज करके चुकानी पड़ी।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-May 2,2026