- Friday World 29 May 2026
दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में गन कल्चर अब सिर्फ घरेलू समस्या नहीं रह गई है। स्कूलों, मॉल्स और सड़कों पर रोजाना होने वाली गोलीबारी अमेरिका को अंदर से खोखला कर रही है, लेकिन यही संस्कृति अब मध्य पूर्व, एशिया और अफ्रीका तक फैल चुकी है। हथियारों की संस्कृति, सैन्य हस्तक्षेप और रणनीतिक साझेदारियों के जरिए अमेरिका-इजराइल गठजोड़ ने कई देशों में अस्थिरता पैदा की है। परिणाम? लाखों निर्दोष मौतें, आतंकवाद का उदय और क्षेत्रीय युद्ध जो आज भी जारी हैं।
यह लेख अमेरिकी विदेश नीति के उन पहलुओं पर प्रकाश डालता है जहां हथियार सप्लाई, सैन्य समर्थन और भू-राजनीतिक खेल ने दुनिया को कैसे प्रभावित किया है।
अमेरिका में गन कल्चर की भयावह सच्चाई
अमेरिका में बंदूकें न सिर्फ अधिकार हैं, बल्कि संस्कृति बन चुकी हैं। हर साल हजारों लोग गोलीबारी में मारे जाते हैं। मास शूटिंग्स की घटनाएं आम हो गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, मास पब्लिक शूटिंग्स में सैकड़ों मौतें और हजारों घायल होते हैं। यह संस्कृति अब निर्यात हो रही है – हथियारों का वैश्विक व्यापार और संघर्ष क्षेत्रों में सैन्य सहायता के रूप में।
जब घर में ही बंदूकें इतनी तबाही मचा रही हैं, तो विदेश नीति में हथियारों को "स्थिरता" बनाए रखने का औजार कैसे बनाया जा सकता है? यही सवाल आज पूरी दुनिया पूछ रही है।
1980 का दशक: ईरान-इराक युद्ध और दोहरी नीति
1979-80 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिका ने इराक को समर्थन दिया। सद्दाम हुसैन के इराक को आर्थिक मदद, खुफिया जानकारी और ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी मुहैया कराई गई। इसका मकसद ईरान की बढ़ती ताकत को काउंटर करना था। युद्ध आठ साल चला और लाखों लोग मारे गए। अमेरिका ने इराक को केमिकल हथियारों के इस्तेमाल के बावजूद समर्थन जारी रखा।
यह नीति बाद में उल्टी पड़ गई। सद्दाम को 2003 में खुद अमेरिका ने हटाया, जिसके परिणामस्वरूप इराक में अराजकता और ISIS जैसे समूहों का उदय हुआ।
अफगानिस्तान: मुजाहिदीन से अल-कायदा तक
सोवियत संघ के अफगानिस्तान पर आक्रमण (1979) के दौरान अमेरिका ने मुजाहिदीन को हथियार और फंडिंग दी। पाकिस्तान के ISI के जरिए अरब लड़ाकों सहित कई ग्रुप्स को सपोर्ट मिला। ओसामा बिन लादेन भी उनमें शामिल थे, हालांकि अमेरिका ने उन्हें सीधे फंड नहीं किया, लेकिन पूरे नेटवर्क को मजबूत किया गया।
सोवियत हार के बाद ये हथियार और प्रशिक्षित लड़ाके अल-कायदा में तब्दील हो गए। 9/11 हमलों ने दुनिया बदल दी। अमेरिका को "ब्लोबैक" (अपनी ही नीति का प्रतिकार) का सामना करना पड़ा। अफगानिस्तान में दशकों तक तबाही मची, जिसकी कीमत अफगान जनता ने चुकाई।
फिलिस्तीन-इजराइल: हथियारों की अनवरत आपूर्ति
अमेरिका इजराइल का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है। अक्टूबर 2023 के बाद से अरबों डॉलर की सैन्य मदद दी गई है – बम, मिसाइल, फाइटर जेट्स। इजराइल की सुरक्षा को "क्वालिटेटिव मिलिट्री एज" बनाए रखने के नाम पर यह सपोर्ट जारी है।
फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी संघर्ष में हजारों निर्दोष मारे गए हैं। आलोचक इसे "नरसंहार" तक कहते हैं। अमेरिका-इजराइल गठबंधन इस क्षेत्र में स्थायी तनाव का बड़ा कारण माना जाता है।
मिस्र: लोकतंत्र vs सैन्य शासन
2011 की अरब स्प्रिंग के बाद मिस्र में मुबारक के पतन के बाद सैन्य शासन आया। अब्देल फतह अल-सिसी के नेतृत्व में सैन्य सरकार को अमेरिका से अरबों डॉलर की मदद मिलती रही। लोकतांत्रिक सरकार (मोर्सी) को हटाने के बाद भी समर्थन जारी रहा। मानवाधिकारों की अनदेखी कर स्थिरता को प्राथमिकता दी गई।
हालिया घटनाएं: ईरान के साथ तनाव
अमेरिका-ईरान के बीच लंबे समय से तनाव है। वार्ता के साथ-साथ प्रतिबंध और सैन्य दबाव की नीति अपनाई गई। हाल के वर्षों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष टकराव बढ़े हैं। इसने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया, जिसकी मार भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ी।
गन कल्चर का वैश्विक असर
अमेरिकी हथियार उद्योग दुनिया का सबसे बड़ा है। संघर्ष क्षेत्रों में अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल आम है। इससे आतंकवादी समूहों को भी हथियार मिलते हैं। "गन कल्चर" अब सिर्फ अमेरिका की समस्या नहीं – यह प्रॉक्सी वॉर्स, अस्थिर सरकारों और नागरिकों की पीड़ा का प्रतीक बन गया है।
आलोचना और वास्तविकता
अमेरिकी विदेश नीति के समर्थक कहते हैं कि यह लोकतंत्र की रक्षा, आतंकवाद विरोध और क्षेत्रीय संतुलन के लिए जरूरी है। लेकिन आलोचक इसे साम्राज्यवादी हस्तक्षेप मानते हैं, जिसमें हित साधने के लिए समूहों को तैयार किया जाता है और फिर उन्हें दुश्मन बना लिया जाता है।
इतिहास गवाह है – ईरान-इराक युद्ध, अफगान मुजाहिदीन, सद्दाम का उदय और पतन, मिस्र का सैन्य शासन – कई बार "स्ट्रैटेजिक पार्टनर" बाद में समस्या बन गए।
क्या सीखने का समय आ गया है?
अमेरिकी गन कल्चर और हथियार-आधारित विदेश नीति ने अमेरिका को भी अंदर से कमजोर किया है और बाहर अस्थिरता फैलाई है। दुनिया को अब शांतिपूर्ण समाधान, कूटनीति और आत्मनिर्भरता की जरूरत है।
भारत जैसे देशों को इस स्थिति से सीख लेनी चाहिए – ऊर्जा और हथियारों में आत्मनिर्भरता बढ़ाएं, विविध साझेदारियां करें और किसी एक शक्ति पर निर्भर न रहें।
जब तक हथियारों की संस्कृति हावी रहेगी, तब तक शांति दूर रहेगी। अमेरिका को भी अपनी घरेलू गन समस्या और विदेशी हस्तक्षेपों पर गंभीरता से सोचना होगा, वरना यह "गन कल्चर" न सिर्फ अमेरिका को, बल्कि पूरी दुनिया को डुबो देगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 29 May 2026