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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 30 May 2026

यमन के विवादास्पद 'भगोड़े' राष्ट्रपति अब्द रब्बूह मंसूर हादी का रियाद में निधन: एक युग का अंत

यमन के विवादास्पद 'भगोड़े' राष्ट्रपति अब्द रब्बूह मंसूर हादी का रियाद में निधन: एक युग का अंत
- Friday World 31 May2026
रियाद, 28 मई 2026 – यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्द रब्बूह मंसूर हादी, जिन्हें उनके समर्थक 'रिपब्लिकन सिस्टम के रक्षक' और आलोचक 'भगोड़े नेता' कहते थे, 80 वर्ष की आयु में अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अपने आवास पर निधन हो गया। यमनी राज्य टेलीविजन और सरकारी सूत्रों ने इसकी पुष्टि की। हृदयाघात को उनकी मृत्यु का कारण बताया जा रहा है। यमन सरकार ने तीन दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित कर झंडे आधे झुका दिए हैं।

यह निधन यमन के आधुनिक इतिहास के एक जटिल और दर्द भरे अध्याय का समापन करता है। हादी 2012 से 2022 तक औपचारिक रूप से राष्ट्रपति रहे, लेकिन 2015 के बाद से वे मुख्य रूप से निर्वासन में ही शासन संभालते रहे। हूतियों के सत्ता पर कब्जे के बाद वे सऊदी अरब चले गए थे, जहां से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समर्थन के साथ यमन की वैध सरकार का प्रतिनिधित्व किया।

दक्षिणी यमन से राष्ट्रपति पद तक की यात्रा

अब्द रब्बूह मंसूर हादी का जन्म 1 सितंबर 1945 को दक्षिण यमन के अब्यान प्रांत के थुकैन गांव में हुआ था। उस समय यह क्षेत्र ब्रिटिश संरक्षण में था। उन्होंने 1960 के दशक में सैन्य अकादमी से शिक्षा प्राप्त की और दक्षिण यमन की सेना में सेवा की। मिस्र और सोवियत संघ में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले हादी 1986 के दक्षिण यमन गृहयुद्ध के दौरान उत्तरी यमन चले गए थे।

1990 में यमन के उत्तर और दक्षिण के एकीकरण के बाद वे राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के करीबी बने। 1994 के गृहयुद्ध में उन्होंने सालेह सरकार का साथ दिया और रक्षा मंत्री के रूप में दक्षिणी अलगाववादियों के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया। इसके पुरस्कार स्वरूप 1994 में उन्हें उपराष्ट्रपति बना दिया गया, पद जो वे 2012 तक संभाले रहे।

2011 के अरब स्प्रिंग आंदोलन ने सालेह के 33 वर्षीय शासन को चुनौती दी। घायल सालेह के सऊदी अरब जाने के बाद हादी कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। 2011 के GCC समझौते के तहत सालेह ने सत्ता छोड़ी और हादी को 2012 के चुनाव में एकमात्र उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया गया। उन्होंने लगभग 100% वोटों से जीत हासिल की, हालांकि चुनाव का बहिष्कार भी हुआ था।

 संक्रमणकालीन राष्ट्रपति: आशाएं और असफलताएं

हादी की राष्ट्रपति पद की शुरुआत आशा के साथ हुई। राष्ट्रीय संवाद सम्मेलन (National Dialogue Conference) के जरिए उन्होंने यमन को संघीय ढांचे की ओर ले जाने की कोशिश की। अल-कायदा से मुकाबला, सैन्य सुधार और आर्थिक स्थिरता उनके एजेंडे में थे। अमेरिका और खाड़ी देशों का समर्थन उन्हें प्राप्त था।

लेकिन चुनौतियां भारी थीं। गरीबी, भ्रष्टाचार, क्षेत्रीय असमानताएं और हूथी विद्रोह (उत्तर में) उनके शासन को कमजोर कर रहे थे। 2014 में हूतियों ने राजधानी साना पर कब्जा कर लिया। ईरान समर्थित हूतियों ने ईंधन सब्सिडी में कटौती और शासन की नाकामियों का फायदा उठाया। जनवरी 2015 में हादी को नजरबंद कर दिया गया, उन्होंने इस्तीफा दे दिया, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया।

फरवरी 2015 में वे एडेन भाग गए और फिर रियाद पहुंचे। मार्च 2015 में सऊदी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने हूतियों के खिलाफ हस्तक्षेप शुरू किया, जिसे हादी सरकार की बहाली का उद्देश्य बताया गया। युद्ध ने यमन को तबाही के कगार पर पहुंचा दिया – लाखों मौतें, अकाल, महामारी और मानवीय संकट।

 निर्वासन में शासन: विवादों का सिलसिला

रियाद से हादी ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का नेतृत्व किया। लेकिन आलोचक उन्हें "रिमोट कंट्रोल" राष्ट्रपति कहते थे। 2017 के बाद वे लगभग पूरी तरह सऊदी नियंत्रण में बताए जाते थे। 2022 में सऊदी दबाव में उन्होंने इस्तीफा दे दिया और सत्ता प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को सौंपी, जिसके चेयरमैन राशिद अल-अलीमी बने।

हादी का शासन यमन के लिए मिश्रित विरासत छोड़ गया। एक ओर वे एकीकरण और गणतंत्र की रक्षा के प्रतीक बने, दूसरी ओर उनकी कमजोर नेतृत्व क्षमता, क्षेत्रीय पूर्वाग्रह (दक्षिणी पक्षपात) और युद्ध को लंबा खींचने के आरोप लगे। हूतियों ने उन्हें "वैधता" का प्रतीक मानकर भी निशाना बनाया।

निधन पर प्रतिक्रियाएं

यमन के वर्तमान नेतृत्व ने हादी को "यमनी लोगों के न्यायपूर्ण राज्य, स्वतंत्रता और गरिमा के विश्वासी" बताया। सऊदी अरब, अमेरिका और कई अरब देशों ने शोक व्यक्त किया। हाला नामक पत्नी और छह संतानों सहित परिवार शोक में है।

 यमन आज: अनसुलझी चुनौतियां

हादी के निधन के समय यमन अभी भी विभाजित है। हूतियों का उत्तरी नियंत्रण, सरकार का दक्षिणी आधार और UN-समर्थित संघर्ष विराम। युद्ध ने लाखों लोगों को प्रभावित किया, लेकिन शांति की उम्मीद अभी भी जिंदा है।

अब्द रब्बूह मंसूर हादी की कहानी यमन की जटिल राजनीति, बाहरी हस्तक्षेप और आंतरिक कलह की दास्तां है। एक सैनिक से राष्ट्रपति बने व्यक्ति, जो अंत में निर्वासन में ही जीवन समाप्त कर गया। उनका निधन यमन को आईने में देखने का अवसर देता है – विगत की गलतियों से सीखकर भविष्य कैसे बनाया जाए।

 हादी का शासन यमन की एकता को बनाए रखने की कोशिश का प्रतीक था, लेकिन क्षेत्रीय शक्तियों (सऊदी vs ईरान) की जंग ने देश को बर्बादी की ओर धकेला। अब नई पीढ़ी के नेताओं पर निर्भर है कि वे शांति और पुनर्निर्माण का रास्ता चुनें। यमन की जनता, जो दशकों से संघर्ष कर रही है, अब स्थिरता और समृद्धि की हकदार है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 31 May2026