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Monday, 25 May 2026

सुप्रीम कोर्ट का तीखा तंज: नीट पेपर लीक पर NTA ने फिर नहीं सीखा सबक, परीक्षा रद्द करने की नौबत क्यों आई?

सुप्रीम कोर्ट का तीखा तंज: नीट पेपर लीक पर NTA ने फिर नहीं सीखा सबक, परीक्षा रद्द करने की नौबत क्यों आई? -Friday World 25 May 2026

नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बार साफ़ शब्दों में नाराज़गी जताते हुए कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पिछले साल की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने परीक्षा रद्द करने की स्थिति पर गहरी निराशा व्यक्त की।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को पेपर लीक के कारण रद्द करने की नौबत आना बेहद दुखद है। बार एंड बेंच तथा लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने NTA को फटकार लगाते हुए हाई-पावर्ड कमेटी की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

 2025 का घाव: परीक्षा रद्द, लाखों सपने टूटे

3 मई 2025 को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा विवादास्पद रही। पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद केंद्र सरकार और NTA को परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा। इस फैसले ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया। लाखों मेडिकल aspirants, जिन्होंने महीनों-महीनों की मेहनत की थी, एक पल में निराशा के गर्त में चले गए। कई छात्रों ने मानसिक तनाव, अवसाद और आर्थिक नुकसान की शिकायतें कीं।

सुप्रीम कोर्ट में डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की ओर से दायर याचिकाओं में NTA को पूरी तरह बदलने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि NTA अब विश्वसनीयता खो चुका है और इसे नई, स्वतंत्र तथा अधिक पारदर्शी संस्था से बदलने का समय आ गया है।

 कोर्ट का सख्त रुख: तीन दिन में हलफनामा दाखिल करो

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया कि वह 14 नवंबर 2024 को गठित मॉनिटरिंग कमेटी की स्थिति रिपोर्ट हलफनामे के जरिए पेश करे। साथ ही, पूर्व ISRO चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन, जिन्होंने 2024 के पेपर लीक मामले के बाद गठित हाई-पावर्ड कमेटी की अध्यक्षता की थी, को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपनी रिपोर्ट के आधार पर उठाए गए कदमों का ब्योरा तीन दिन के अंदर दाखिल करें।

कोर्ट ने कहा, “हम निराश हैं कि NTA ने 2024 की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। हमने तब दिशा-निर्देश दिए थे, लेकिन स्थिति जस की तस है।”

 2024 का संकट और हाई-पावर्ड कमेटी

पिछले साल 2024 में भी NEET-UG परीक्षा पेपर लीक के भारी आरोपों में घिरी थी। कई राज्यों में गिरफ्तारियां हुईं, सॉल्वर गैंग सक्रिय पाए गए और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे। इस संकट के बाद केंद्र सरकार ने पूर्व ISRO चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी गठित की थी। कमेटी का मकसद NEET जैसी परीक्षाओं को लीक-प्रूफ, पारदर्शी और छात्र-हितैषी बनाना था।

कमेटी ने सुरक्षा, प्रश्न-पत्र प्रबंधन, डिजिटल निगरानी, केंद्रों की निगरानी और तकनीकी उपायों पर विस्तृत सिफारिशें दी थीं। लेकिन 2025 में फिर वही गलती दोहराई गई, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 NEET का महत्व: सपनों का द्वार या तनाव का स्रोत?

NEET-UG भारत में MBBS, BDS, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्सेस में प्रवेश के लिए एकमात्र परीक्षा है। हर साल 20 लाख से अधिक छात्र इसमें शामिल होते हैं। सफलता की राह बेहद संकरी है — टॉप रैंक हासिल करने वाले ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट पा पाते हैं।

इस परीक्षा से जुड़ी तनाव की कहानियां आम हैं। छात्र रात-रात भर जागकर पढ़ते हैं, कोचिंग संस्थानों में लाखों रुपये खर्च करते हैं और परिवार का सपना पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। लेकिन बार-बार होने वाले पेपर लीक न सिर्फ उनकी मेहनत पर पानी फेरते हैं, बल्कि पूरे मेडिकल एजुकेशन सिस्टम की विश्वसनीयता को भी हिला देते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार की लीक घटनाएं माफिया और सॉल्वर गैंग की सक्रियता को दर्शाती हैं। ये गैंग अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं — व्हाट्सएप, टेलीग्राम चैनल्स, USB ड्राइव्स और यहां तक कि हाई-टेक कैमरों के जरिए प्रश्न बाहर भेजे जाते हैं।

 NTA पर उठते सवाल

NTA की स्थापना 2017-18 में हुई थी ताकि विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन एक छत के नीचे किया जा सके। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं:

- सुरक्षा प्रोटोकॉल में खामी
- परीक्षा केंद्रों की अपर्याप्त निगरानी
- स्टाफ और प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंच
- डिजिटल सिस्टम की कमजोरियां
- पिछले सबकों को लागू न करना

कोर्ट की टिप्पणी ने इन मुद्दों को और तीखा कर दिया है। कई शिक्षा विशेषज्ञ अब NTA के विकेंद्रीकरण या पूर्ण पुनर्गठन की मांग कर रहे हैं। कुछ का सुझाव है कि परीक्षाओं का आयोजन स्वायत्त बोर्ड या प्रोफेशनल टेस्टिंग एजेंसियों को सौंपा जाए, जिनमें बेहतर जवाबदेही हो।

 छात्रों, अभिभावकों और डॉक्टर्स की प्रतिक्रिया

परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में गुस्सा फूट पड़ा। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा की। “दो साल की तैयारी एक रात में बर्बाद”, “हमारी मेहनत का मजाक उड़ाया जा रहा है” — जैसे पोस्ट वायरल हुए।

मेडिकल डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी NTA की आलोचना की और कहा कि भ्रष्टाचार और लापरवाही से भविष्य के डॉक्टर्स की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

अभिभावक संघों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि न सिर्फ दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, बल्कि प्रभावित छात्रों को मुफ्त में अगली परीक्षा का अवसर और मनोवैज्ञानिक मदद भी दी जाए।

 आगे का रास्ता: क्या सुधार संभव है?

सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप को शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने पहले भी परीक्षा सुधार पर जोर दिया है। अब सवाल यह है कि:

1. क्या NTA को नई संरचना दी जाएगी?

2. क्या हाई-पावर्ड कमेटी की सिफारिशें पूरी तरह लागू होंगी?

3. क्या प्रश्न-पत्र तैयार करने, प्रिंटिंग और वितरण की प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाएगा?

4. क्या AI और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा?

5. क्या परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी राज्य स्तर पर बांटी जाएगी?

शिक्षा मंत्रालय को अब जल्द से जल्द एक ठोस रोडमैप पेश करना होगा। साथ ही, अगली परीक्षा की तारीख और सुरक्षा मानकों की जानकारी भी पारदर्शी तरीके से दी जानी चाहिए ताकि छात्रों में विश्वास बहाल हो सके।

 विश्वास की बहाली जरूरी

NEET सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों का प्रतीक है। जब इस परीक्षा की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल उठते हैं, तो पूरा मेडिकल सिस्टम प्रभावित होता है। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख एक चेतावनी है — अब समय आ गया है कि NTA या कोई भी नई संस्था वास्तव में जवाबदेह बने।

छात्रों का भविष्य राजनीति, नफे और लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। पारदर्शी, लीक-प्रूफ और छात्र-केंद्रित परीक्षा प्रणाली भारत के युवाओं का हक है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अगर ठोस कदम उठाए गए, तो यह संकट एक नए, बेहतर सिस्टम की शुरुआत साबित हो सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 25 May 2026