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Tuesday, 23 June 2026

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में 'रिवर्स ऑपरेशन लोटस' का धमाका: BJP+JDS के 11 विधायकों की क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस को 5 सीटें, NDA सिमटी 2 पर, आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली तलब किया

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में 'रिवर्स ऑपरेशन लोटस' का धमाका: BJP+JDS के 11 विधायकों की क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस को 5 सीटें, NDA सिमटी 2 पर, आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली तलब किया
- Friday World 24 Jun 2026
बेंगलुरु: कर्नाटक की सियासत में शुक्रवार को वो हुआ जिसकी कल्पना शायद BJP ने भी नहीं की थी। विधान परिषद की 7 सीटों के लिए हुए चुनाव में ‘ऑपरेशन लोटस’ का मंत्र देने वाली BJP को उसी के हथियार से मात खानी पड़ी। NDA गठबंधन, जिसमें BJP और JDS शामिल हैं, के 11 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर दिया। इस सियासी उलटफेर ने न सिर्फ चुनावी गणित बदला, बल्कि राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। 

क्या है पूरा मामला: आंकड़ों का खेल और 11 विधायकों की बगावत
कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों पर चुनाव हुआ था। जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को 28 विधायकों का समर्थन चाहिए था। विधानसभा में दलीय स्थिति कुछ ऐसी थी: 

- कांग्रेस: 4 सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में थी। उसके पास 5वीं सीट के लिए 23 विधायक थे, यानी 5 और वोट चाहिए थे। 
- NDA (BJP+JDS): 2 सीटें पक्की थीं। 7वीं सीट के लिए उसके पास 25 विधायक थे, यानी जीत के लिए 3 वोट की जरूरत थी। 

कागज पर NDA का पलड़ा भारी दिख रहा था। लेकिन वोटिंग के दिन खेल पलट गया। NDA के 11 विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर कांग्रेस के उम्मीदवार को वोट दे दिया। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस 4 की बजाय 5 सीटें जीत गई और NDA 3 की उम्मीद के बावजूद सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गया। 

'रिवर्स ऑपरेशन लोटस' क्यों कहा जा रहा है
‘ऑपरेशन लोटस’ BJP की उस रणनीति को कहा जाता है जिसमें विपक्षी दलों के विधायकों को तोड़कर अपनी सरकार बनाना या मजबूत करना शामिल है। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में BJP पर ऐसे आरोप लगते रहे हैं। 

लेकिन इस बार कांग्रेस ने BJP को उसी की भाषा में जवाब दिया। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने NDA के असंतुष्ट विधायकों से संपर्क साधा। इनमें वो विधायक शामिल थे जिन्हें टिकट वितरण, मंत्रिमंडल विस्तार या क्षेत्र के विकास कार्यों में नजरअंदाज किए जाने की शिकायत थी। कांग्रेस ने ‘रिवर्स ऑपरेशन लोटस’ चलाकर 11 विधायकों को अपने पाले में कर लिया। इसे ही राजनीतिक गलियारों में ‘घर में ही सेंधमारी’ कहा जा रहा है। 

किसके-किसके नाम चर्चा में 
हालांकि क्रॉस वोटिंग गुप्त मतदान से होती है, इसलिए आधिकारिक तौर पर 11 नाम सामने नहीं आए हैं। लेकिन राजनीतिक हलकों में कुछ BJP और JDS विधायकों के नामों की चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि उत्तरी कर्नाटक और पुराने मैसूर क्षेत्र के कुछ विधायक नाराज चल रहे थे। टिकट न मिलने, विकास निधि में भेदभाव और स्थानीय BJP नेतृत्व से खींचतान इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। 

JDS के लिए यह डबल झटका है। पार्टी पहले ही विधानसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। अब उसके कुछ विधायकों का कांग्रेस के साथ जाना, कुमारस्वामी की मुश्किलें और बढ़ा सकता है। 

BJP में हड़कंप: आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष को दिल्ली बुलाया
इस शर्मनाक हार के बाद BJP आलाकमान तुरंत हरकत में आया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने कर्नाटक BJP अध्यक्ष को तत्काल दिल्ली तलब किया है। उनसे इस ‘बड़ी चूक’ पर जवाब मांगा जाएगा। 

पार्टी के अंदर भी घमासान मचा है। एक धड़े का कहना है कि प्रदेश नेतृत्व विधायकों की नाराजगी भांपने में नाकाम रहा। टिकट बंटवारे से लेकर संगठन में सबको साथ लेकर चलने में विफलता इस हार की वजह बनी। वहीं दूसरा धड़ा इसे कांग्रेस की ‘धनबल और छल’ की राजनीति बता रहा है। BJP अब बागी विधायकों की पहचान कर उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है। 

कांग्रेस खेमे में जश्न: ‘जनता ने अहंकार को हराया’
दूसरी तरफ कांग्रेस कैंप में जश्न का माहौल है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने इसे ‘जनता की जीत’ बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह परिणाम BJP के ‘अहंकार’ और ‘विधायकों की अनदेखी’ के खिलाफ जनादेश है। 

डीके शिवकुमार, जिन्हें कर्नाटक में कांग्रेस का ‘चाणक्य’ माना जाता है, एक बार फिर अपने सियासी प्रबंधन का लोहा मनवाने में कामयाब रहे। उन्होंने कहा, “ये सिर्फ शुरुआत है। BJP को समझना चाहिए कि विधायकों को डरा-धमकाकर या खरीद-फरोख्त से लोकतंत्र नहीं चलता।” 

आगे क्या: सियासी समीकरणों पर असर

1. राज्यसभा चुनाव पर नजर: विधान परिषद के इस नतीजे का असर आने वाले राज्यसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस का मनोबल बढ़ा है। 
2. 
2. BJP में अंतर्कलह: हार के बाद BJP में गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। 
3. 
3. JDS का भविष्य: JDS के लिए यह अस्तित्व का संकट है। अगर विधायक टूटते हैं तो पार्टी का विलय कांग्रेस या BJP में होने की अटकलें तेज हो जाएंगी। 
4. 
4. 2028 विधानसभा की पटकथा: कांग्रेस इस जीत को 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए नैरेटिव सेट करने में इस्तेमाल करेगी। ‘BJP के गढ़ में सेंध’ का संदेश कार्यकर्ताओं में जोश भरेगा। 

विश्लेषण: सिर्फ आंकड़े नहीं, संदेश भी बड़ा है
यह चुनाव सिर्फ 5 बनाम 2 सीटों की लड़ाई नहीं थी। यह संदेश था कि कर्नाटक में BJP का ‘अजेय’ वाला तिलिस्म टूट रहा है। 2023 विधानसभा में हार, फिर लोकसभा में उम्मीद से कम प्रदर्शन और अब विधान परिषद में अपने ही विधायकों की बगावत, यह BJP के लिए खतरे की घंटी है। 

कांग्रेस के लिए यह जीत सियासी ही नहीं, मनोवैज्ञानिक भी है। पार्टी ने दिखा दिया कि वह अब सिर्फ बचाव नहीं, आक्रामक खेल भी खेल सकती है। ‘रिवर्स ऑपरेशन लोटस’ ने BJP को उसी के घर में घेरा है। 


कर्नाटक की सियासत में ‘वफादारी’ सबसे बड़ा सियासी करेंसी बन गई है। जो पार्टी अपने विधायकों को संभाल नहीं पाई, वो चुनाव हार गई। BJP के लिए यह आत्ममंथन का वक्त है। क्या वह असंतोष को दूर कर पाएगी या बगावत की चिंगारी और भड़केगी? वहीं कांग्रेस के लिए चुनौती होगी कि इस जीत को जमीन पर विकास में कैसे बदले। फिलहाल तो कर्नाटक की सियासत में ‘पिक्चर अभी बाकी है’। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 24 Jun 2026