इस्लामाबाद, 24 जून 2026 – वर्षों के तनाव, संघर्ष और युद्ध की छाया के बाद मध्य पूर्व में शांति की एक नई किरण दिखाई दे रही है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ दो दिवसीय महत्वपूर्ण वार्ता के ठीक बाद मंगलवार को पाकिस्तान पहुंचे। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए इस प्रक्रिया को क्षेत्रीय कूटनीति का मील का पत्थर माना जा रहा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पेजेश्कियान का यह दौरा न केवल कृतज्ञता का प्रतीक है, बल्कि स्थायी शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का भी संकेत देता है।
: युद्ध से बातचीत तक का सफर
फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में अस्थिरता चरम पर पहुंच गई थी। होर्मुज की खाड़ी बंद होने का खतरा, तेल की कीमतों में उछाल, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव – इन सबने दुनिया को चिंतित कर दिया। ऐसे में पाकिस्तान ने एक साहसिक कदम उठाया और दोनों पक्षों के बीच संवाद का पुल बनने की भूमिका निभाई।
स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में रविवार और सोमवार को हुई वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता ने अहम भूमिका निभाई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ के बीच हुई इन बैठकों के बाद 60 दिनों का रोडमैप तैयार हुआ, जिसमें ईरान पर लगी कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की राहत और परमाणु कार्यक्रम की निगरानी जैसे मुद्दे शामिल हैं। ईरान ने स्पष्ट किया कि उसका बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम वार्ता का हिस्सा नहीं था और रहेगा भी नहीं।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस प्रक्रिया को “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” का नाम दिया, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान और कतर दोनों मध्यस्थ के रूप में सक्रिय रहे।
इस्लामाबाद में भव्य स्वागत
ईरानी राष्ट्रपति का विमान नूर खान एयरबेस पर उतरा तो पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार समेत उच्च अधिकारी छाता लेकर स्वागत के लिए मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सड़कों पर स्वागत बैनर लगे हुए थे, जो इस दौरे के महत्व को दर्शाते थे।
यह पेजेश्कियान की राष्ट्रपति बनने के बाद पहली विदेश यात्रा है, जो युद्ध शुरू होने के बाद का उनका पहला विदेश दौरा भी है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ईरान के साथ “चट्टान की तरह” खड़े होकर समर्थन दिया। प्रधानमंत्री शरीफ ने आश्वासन दिया कि पाकिस्तान ईरान को कभी निराश नहीं करेगा।
वार्ता के प्रमुख मुद्दे
इस्लामाबाद में पेजेश्कियान और शरीफ के बीच हुई बैठक में निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा हुई:
- ईरान-अमेरिका शांति समझौते का क्रियान्वयन: 60 दिनों के अंदर स्थायी समझौते के लिए तकनीकी टीमों की बैठकें जारी रखना।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: मध्य पूर्व में स्थिरता, लेबनान में हिंसा रोकना, और होर्मुज की खाड़ी को खुला रखना।
- द्विपक्षीय सहयोग: व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और सीमा प्रबंधन में बढ़ोतरी। पाकिस्तान-ईरान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के मसौदे पर काम तेज करने का फैसला।
- इस्लामी देशों का नया सुरक्षा फ्रेमवर्क: मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर।
विदेश मंत्री अब्बास अराघची, जो स्विट्जरलैंड में ईरान के प्रमुख वार्ताकार थे, ने पाकिस्तानी अधिकारियों से विस्तृत ब्रिफिंग साझा की।
पाकिस्तान की कूटनीतिक जीत
पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अपनी कूटनीतिक परिपक्वता साबित की है। प्रधानमंत्री शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर दोनों ने सक्रिय भूमिका निभाई। अमेरिका के साथ पाकिस्तान के संबंधों में सुधार और ईरान के साथ पारंपरिक दोस्ती को संतुलित रखते हुए इस्लामाबाद ने एक दुर्लभ कूटनीतिक सफलता हासिल की।
विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति, दोनों देशों से उसके संबंध और क्षेत्रीय प्रभाव ने इसे इस भूमिका के लिए आदर्श बनाया। कतर के साथ मिलकर पाकिस्तान ने “ट्रैक-वन” कूटनीति को नई ऊंचाई दी।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
यह विकास मध्य पूर्व के लिए राहत की खबर है। तेल की कीमतें स्थिर हो सकती हैं, व्यापारिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं, और मानवीय संकट कम हो सकता है। लेबनान, गाजा और अन्य क्षेत्रों में तनाव कम करने के प्रयास तेज होंगे।
भारत, चीन, रूस और सऊदी अरब जैसे देश इस प्रक्रिया को बारीकी से देख रहे हैं। भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। चीन के लिए भी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं।
चुनौतियां आगे भी हैं
हालांकि उत्साह है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम, इजराइल का रुख, और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन जैसे मुद्दे जटिल बने हुए हैं। ट्रंप प्रशासन ने साफ कहा है कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता तो “जो करना पड़ेगा” किया जाएगा। ईरान ने अपने रक्षात्मक मिसाइल कार्यक्रम को अटूट बताया है।
फिर भी, बातचीत का रास्ता खुलना ही बड़ी उपलब्धि है।
शांति की उम्मीद
पेजेश्कियान का पाकिस्तान दौरा सिर्फ एक राजकीय यात्रा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शांति की नई शुरुआत का प्रतीक है। पाकिस्तान ने साबित किया कि कूटनीति और संवाद से सबसे जटिल समस्याओं का हल निकाला जा सकता है।
दुनिया अब अगले 60 दिनों की ओर देख रही है। अगर यह रोडमैप सफल रहा तो इतिहास में “इस्लामाबाद-बर्गेनस्टॉक प्रक्रिया” शांति कूटनीति का सुनहरा अध्याय बनेगी।
ईरान और पाकिस्तान के बीच भाईचारे के रिश्ते, साझा संस्कृति और भविष्य के सहयोग की संभावनाएं इस यात्रा को और यादगार बनाती हैं। उम्मीद है कि यह दौरा न केवल दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र को स्थिरता की ओर ले जाएगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 24 Jun 2026