- Friday World 8 Jun 2026
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर पुरानी खाई गहरी होती दिख रही है। कांग्रेस के दो दिग्गज नेता — पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट— के बीच का जूना विवाद 7 जून 2026 को फिर से सुर्खियों में आ गया। गहलोत ने 2022 के हाईवोल्टेज ड्रामे को लेकर पायलट पर तीखे हमले किए, जिसके जवाब में BJP ने साफ कहा कि यह कांग्रेस की आंतरिक कलह है और उसमें BJP की कोई भूमिका नहीं। BJP प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने दोनों नेताओं को सलाह दी कि वे अपने मतभेद सोशल मीडिया या जाहिर में न लाकर आपसी बातचीत से सुलझाएं।
यह विवाद न केवल कांग्रेस की एकता के लिए खतरा है, बल्कि राजस्थान की आगामी राजनीतिक लड़ाई को भी प्रभावित कर सकता है।
2022 का पुराना घाव फिर ताजा: गहलोत का खुलासा
जयपुर के कंस्टीट्यूशन क्लब में बोलते हुए अशोक गहलोत ने 25 सितंबर 2022 की घटना को दोहराया। उन्होंने कहा कि उस दिन जो कुछ हुआ, वह कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ बगावत नहीं थी, बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के विरोध में था। गहलोत ने दावा किया कि जब पायलट के नाम की चर्चा मुख्यमंत्री पद के लिए होने लगी, तो उनके समर्थक लगभग 90 विधायकों ने विरोध जताया और बैठक का बहिष्कार किया।
गहलोत ने सवाल उठाया — “अगर मैंने हाईकमान के खिलाफ बगावत की होती, तो क्या मैं मुख्यमंत्री पद पर टिक पाता?” उन्होंने यह भी कहा कि पायलट की 2020 की मानेसर बगावत याद रखनी चाहिए। गहलोत ने पायलट को 2012 में केंद्र में मंत्री बनाने में अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए नाराजगी भी जताई कि पायलट ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस 2023 के चुनावी हार के बाद राजस्थान में फिर से संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
BJP की तीखी प्रतिक्रिया: “गहलोत सुर्खियों में रहने के लिए पुरानी कहानियां दोहरा रहे हैं”
रajasthan BJP प्रदेश अध्यक्ष **मदन राठौड़** ने गहलोत के बयानों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके गहलोत को संयम रखना चाहिए। राठौड़ का आरोप है कि गहलोत जानबूझकर पुराने विवादों को हवा दे रहे हैं ताकि अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बरकरार रख सकें और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर सकें।
BJP ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की आंतरिक कलह या नेतृत्व विवाद में उसकी कोई भूमिका नहीं है। मदन राठौड़ ने दोनों नेताओं से अपील की कि वे मतभेदों को जाहिर में न लाएं और आपसी चर्चा से हल निकालें। उन्होंने यह भी कहा कि गहलोत पायलट को “बच्चा” समझते हैं और जब भी पायलट की राजनीतिक हैसियत बढ़ती है, गहलोत उन्हें कमजोर करने की कोशिश करते हैं।
BJP का यह रुख साफ संदेश देता है — “कांग्रेस अपना घर संभाल नहीं पा रही, फिर दूसरों पर उल्टा आरोप लगाती है।”
विवाद की जड़ें: सत्ता, महत्वाकांक्षा और पीढ़ीगत संघर्ष
गहलोत-पायलट विवाद नया नहीं है। 2020 में मानेसर में पायलट गुट की बगावत, 2022 का हाईकमान vs गहलोत समर्थक विधायकों का ड्रामा, और 2023 चुनाव में कांग्रेस की हार — इन सबने रिश्तों को और खट्टा किया।
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि गहलोत राष्ट्रीय स्तर पर फिर से कांग्रेस अध्यक्ष या बड़े पद की महत्वाकांक्षा रखते हैं, इसलिए राजस्थान में अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं। वहीं पायलट युवा चेहरा हैं और पार्टी में नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों के बीच यह टकराव कांग्रेस को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है।
अप्रैल 2026 में दोनों नेताओं के बीच दुर्लभ सौहार्दपूर्ण मुलाकात हुई थी, लेकिन अब पुरानी कड़वाहट फिर सामने आ गई है।
राजस्थान कांग्रेस के लिए खतरा: एकता टूटेगी तो भाजपा को फायदा
राजस्थान में कांग्रेस पहले ही 2023 के विधानसभा चुनाव हार चुकी है। यदि गहलोत-पायलट विवाद नहीं थमा तो आगामी लोकसभा उपचुनाव, नगर निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है।
- कार्यकर्ता स्तर पर असर: आम कार्यकर्ता और पदाधिकारी दोनों गुटों में बंटे हुए हैं। यह बंटवारा संगठनात्मक चुनावों और रणनीति बनाने में बाधा बन रहा है।
- हाईकमान की चिंता: कांग्रेस आलाकमान (मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी) को इस कलह को शांत करने की जरूरत है, वरना राजस्थान में पार्टी की वापसी और मुश्किल हो जाएगी।
- BJP का फायदा: विपक्ष BJP इस आंतरिक लड़ाई का पूरा राजनीतिक लाभ उठा रही है। वह कांग्रेस को “असंगठित और बिखरी हुई” बता रही है।
क्या है समाधान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
1. दोनों नेताओं को हाईकमान के सामने बैठकर मुद्दे सुलझाने चाहिए।
2. व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को पार्टी हित से ऊपर नहीं रखना चाहिए।
3. युवा नेतृत्व (पायलट) और अनुभवी नेतृत्व (गहलोत) का संतुलित समन्वय जरूरी है।
4. सोशल मीडिया और पब्लिक स्टेटमेंट्स से बचना चाहिए।
कांग्रेस की एकता पर सवाल
रajasthan Congress में गहलोत-पायलट विवाद की नई लहर पार्टी के लिए चेतावनी है। अशोक गहलोत जैसे अनुभवी नेता और सचिन पायलट जैसे युवा चेहरे अगर एक साथ नहीं लड़ सके, तो भाजपा को राजस्थान में और मजबूत होने का मौका मिलेगा।
BJP का कहना सही है कि कांग्रेस को पहले अपना घर संभालना चाहिए। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस हाईकमान इस बार सख्ती दिखाएगा या फिर पुरानी तरह समझौता कर लेगा?
राजस्थान की जनता विकास, रोजगार और अच्छे शासन की उम्मीद करती है, न कि नेताओं की आपसी लड़ाई की। यदि कांग्रेस इस विवाद को जल्द नहीं सुलझाती, तो 2028 में फिर हार का सामना करना पड़ सकता है।
समय आ गया है कि गहलोत और पायलट दोनों 'पार्टी फर्स्ट' का मंत्र अपनाएं। अन्यथा यह लड़ाई कांग्रेस को और कमजोर करेगी और भाजपा को मजबूत बनाएगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 8 Jun 2026