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Friday, 10 July 2026

99 वर्षीय आयतुल्लाह जन्नती की अलौकिक श्रद्धा: शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई के अंतिम सफर में पैदल चले।

99 वर्षीय आयतुल्लाह जन्नती की अलौकिक श्रद्धा: शहीद आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई के अंतिम सफर में पैदल चले।
-Friday World Jul 10 2026 
ईरान के इस्लामी गणराज्य के इतिहास में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जो पीढ़ियों तक याद रहते हैं। एक ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायक क्षण जुलाई 2026 में देखने को मिला, जब 99 वर्षीय आयतुल्लाह अहमद जन्नती ने स्वर्गीय सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई के जनाजे के अंतिम सफर (तशीय-ए-जनाज़ा) में पैदल भाग लिया। कमजोर शरीर, लेकिन अटूट इच्छाशक्ति और गहरी श्रद्धा के साथ चलते हुए यह बुजुर्ग नेता न सिर्फ ईरानी जनता बल्कि पूरी दुनिया के लिए समर्पण और वफादारी का प्रतीक बन गए।

यह दृश्य केवल एक अंतिम विदाई नहीं था, बल्कि क्रांति की उस विरासत का जीवंत प्रमाण था जो 1979 से चली आ रही है।

एक युग का अंत

फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल संघर्ष के दौरान हुए हवाई हमलों में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई शहीद हो गए। 86 वर्ष की आयु में उनका निधन ईरान के लिए एक बड़ा झटका था। दशकों तक देश का नेतृत्व करने वाले ख़ामेनेई को “रहबर” (नेता) के रूप में जाना जाता था। उनकी मृत्यु के बाद ईरान ने कई दिनों तक चले राज्य स्तरीय अंतिम संस्कार का आयोजन किया, जिसमें लाखों लोग शामिल हुए।

तेहरान, कुम और मशहद जैसे पवित्र शहरों में जनाजे की शोभायात्रा निकाली गई। इनमें सबसे भावुक क्षण तब आया जब 99 वर्षीय आयतुल्लाह अहमद जन्नती सहायक की मदद से पैदल चलते नजर आए।

 आयतुल्लाह जन्नती: क्रांति के सच्चे सिपाही

आयतुल्लाह अहमद जन्नती का जन्म 23 फरवरी 1927 को इस्फहान के निकट लादान गांव में हुआ था। 2026 में वे 99 वर्ष के हो चुके थे। वे ईरानी गार्जियन काउंसिल के सेक्रेटरी और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। आयतुल्लाह खोमैनी और ख़ामेनेई दोनों की क्रांति में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वे कट्टर सिद्धांतों के लिए जाने जाते हैं और ईरानी इस्लामी व्यवस्था के मजबूत स्तंभ रहे। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे सक्रिय थे। उनका पैदल चलना शारीरिक क्षमता से कहीं आगे था – यह आस्था, वफादारी और क्रांतिकारी मूल्यों के प्रति समर्पण था।

 जनाजे का दृश्य: भावनाओं का सैलाब

तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग इकट्ठा हुए। काले कपड़ों में सजे लोग, सीने पीटते हुए, नारे लगाते हुए। बीच में एक बुजुर्ग व्यक्ति, सहारे के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। आयतुल्लाह जन्नती का यह रूप देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो गया और दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।

एक 99 वर्षीय व्यक्ति का पैदल चलना युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा था। इससे साबित होता है कि उम्र कोई बाधा नहीं, जब बात सिद्धांतों और आस्था की हो।

 राजनीतिक और सामाजिक महत्व

यह घटना ईरानी समाज की एकजुटता को दर्शाती है। ख़ामेनेई के शासनकाल में ईरान ने कई चुनौतियों का सामना किया – आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय तनाव और आंतरिक सुधारों की मांग। फिर भी क्रांतिकारी मूल्य बरकरार रहे।

जन्नती का सहभागिता ईरान की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था की निरंतरता का संदेश देता है। नए नेतृत्व (उनके पुत्र मुजतबा ख़ामेनेई सहित) को यह विरासत सौंपी जा रही थी।

 समर्पण की मिसाल: इतिहास में दुर्लभ

इतिहास में कई उदाहरण हैं जहां बुजुर्ग नेताओं ने अंतिम समय में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। लेकिन 99 वर्ष की आयु में पैदल जनाजे में शामिल होना दुर्लभ है। यह इस्लामी परंपरा में “इज्जत और वफादारी” का प्रतीक है।

ईरानी मीडिया ने इसे “क्रांति की अमर भावना” बताया। विरोधी भी इस दृश्य को सम्मान से देख रहे थे।

ईरान का भविष्य: चुनौतियां और अवसर

ख़ामेनेई के बाद ईरान नए युग में प्रवेश कर चुका है। आर्थिक पुनर्निर्माण, अंतरराष्ट्रीय संबंध और आंतरिक स्थिरता बड़ी चुनौतियां हैं। जन्नती जैसे बुजुर्गों की उपस्थिति युवाओं को प्रेरित करती है कि मूल्य और सिद्धांतों को कभी न छोड़ा जाए।

ईरान की जनता ने दिखाया कि संकट में भी वे एकजुट हैं। करोड़ ो लोगों का जनाजे में शामिल होना राष्ट्रीय एकता का प्रमाण है।

अमर विरासत

99 वर्षीय आयतुल्लाह जन्नती का पैदल सफर केवल एक शारीरिक प्रयास नहीं था। यह उन करोड़ रानियों की भावना का प्रतिबिंब था जो ख़ामेनेई को अपना रहबर मानते थे। यह घटना याद दिलाती है कि सच्ची श्रद्धा उम्र की सीमाओं से परे होती है।

ईरान के इस्लामी गणराज्य की यात्रा जारी रहेगी। ख़ामेनेई की विरासत और जन्नती जैसे साथियों का समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

अल्लाह इस्लामी ईरान और उसके नेताओं पर अपनी रहमत बरसाए।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Jul 10 2026