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Saturday, 11 July 2026

ट्रंप का ऐतिहासिक फैसला: पूर्व अल-कायदा नेता के साथ बैठक के बाद सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक सूची से हटाने की घोषणा, अमेरिकी सहायता का द्वार खुला!

ट्रंप का ऐतिहासिक फैसला: पूर्व अल-कायदा नेता के साथ बैठक के बाद सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक सूची से हटाने की घोषणा, अमेरिकी सहायता का द्वार खुला! - Friday World Jul 11 2026 
सीरिया की रणनीतिक भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरआ के साथ मुलाकात की और घोषणा की कि वे सीरिया को अमेरिका की 'स्टेट स्पॉन्सर्स ऑफ टेररिज्म' (आतंकवाद प्रायोजक देशों) की सूची से हटा देंगे। यह कदम 1979 के बाद पहली बार उठाया जा रहा है। अल-शरआ, जो पहले अल-कायदा से जुड़े एक समूह के नेता थे, अब सीरिया के राष्ट्रपति हैं और ट्रंप ने उन्हें 'असाधारण काम' करने वाला बताया। इस फैसले से दमिश्क को अमेरिकी सैन्य और आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

यह फैसला न केवल सीरिया के पुनर्निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा। ट्रंप ने कहा, "मैंने अल-शरआ से वादा किया है कि मैं सभी बाधाओं को हटा दूंगा ताकि वे अपना देश फिर से बनाएं।" इस घोषणा के बाद अमेरिकी कंपनियां सीरिया में निवेश के लिए तैयार हैं। लेकिन क्या यह फैसला सिर्फ कूटनीतिक चाल है या वास्तविक बदलाव का प्रतीक? आइए इस पूरे मुद्दे को विस्तार से समझते हैं।

: सीरिया का संघर्ष और नया दौर

सीरिया दशकों से गृहयुद्ध की आग में जल रहा था। बशर अल-असद की तानाशाही, ISIS का उदय, रूस-ईरान का हस्तक्षेप और पश्चिमी देशों की सैन्य कार्रवाई ने देश को तबाह कर दिया। लाखों लोग मारे गए, करोड़ों विस्थापित हुए। 2024 के अंत में असद की सरकार गिर गई और अहमद अल-शरआ (जिन्हें पहले अबू मोहम्मद अल-जौलानी के नाम से जाना जाता था) की HTS (हयात तहरीर अल-शाम) ने सत्ता संभाली।

अल-शरआ का अतीत विवादास्पद है। वे पहले अल-कायदा से जुड़े थे, लेकिन बाद में अलग हो गए और सीरिया में इस्लामिक विद्रोही गठबंधन का नेतृत्व किया। ट्रंप प्रशासन ने उन्हें 'संयमित' नेता बताया है, जो देश को एकजुट करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने मुलाकात में कहा, "अल-शरआ ने अद्भुत काम किया है। वे देश को फिर से खड़ा कर रहे हैं।"

सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक सूची में रखने से अमेरिकी सहायता, रक्षा निर्यात और वित्तीय लेन-देन पर भारी प्रतिबंध लगे थे। सूची से हटने के बाद ये बाधाएं दूर हो जाएंगी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कांग्रेस को सूचित किया है। अब 45 दिनों की समीक्षा अवधि चलेगी, जिसमें कांग्रेस रोक सकती है, लेकिन संभावना कम है।

 ट्रंप-अल-शरआ मुलाकात: क्या हुआ?

नाटो शिखर सम्मेलन तुर्की में आयोजित हुआ। वहां ट्रंप और अल-शरआ की द्विपक्षीय बैठक हुई। ट्रंप ने अल-शरआ की तारीफ करते हुए कहा, "वे एक अच्छा काम कर रहे हैं।" उन्होंने सीरिया को सूची से हटाने का वादा किया। ट्रंप ने एक पत्र में लिखा, "मैं सभी बाधाएं हटा दूंगा। अमेरिकी कंपनियां निवेश के लिए तैयार हैं। आपका देश पहले से भी महान और समृद्ध बनेगा।"

यह बैठक क्षेत्रीय कूटनीति का बड़ा मोड़ है। तुर्की, जो सीरिया के साथ सीमा साझा करता है और कुर्द मुद्दे पर संवेदनशील है, इस प्रक्रिया में शामिल है। ट्रंप ने अल-शरआ से लेबनान में हिजबुल्लाह के मुद्दे पर भी सहयोग मांगा।

 आतंकवाद सूची से हटने के प्रभाव

1. आर्थिक सहायता और निवेश: सूची से हटने से विश्व बैंक, IMF जैसी संस्थाओं से फंडिंग आसान होगी। अमेरिकी कंपनियां ऊर्जा, पुनर्निर्माण और बुनियादी ढांचे में निवेश कर सकेंगी।

2. सैन्य सहायता: अमेरिका सीरियाई सेना को प्रशिक्षण और हथियार दे सकेगा, खासकर 'आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई' के नाम पर। अल-शरआ की सरकार ISIS बचे हुए तत्वों और अन्य समूहों के खिलाफ अभियान चला रही है।

3. lक्षेत्रीय संतुलन: ईरान और रूस का प्रभाव कम हो सकता है। कुर्द समूहों और तुर्की के बीच तनाव भी प्रभावित होगा।

4. मानवीय राहत: लाखों शरणार्थी वापस लौट सकेंगे। पुनर्निर्माण तेज होगा।

लेकिन चुनौतियां भी हैं। अल-शरआ की सरकार पर अभी भी मानवाधिकार उल्लंघनों और अल्पसंख्यक समुदायों (ईसाई, अलावी, कुर्द) के साथ व्यवहार के आरोप लगते हैं। आलोचक कहते हैं कि ट्रंप का फैसला जल्दबाजी है।

 ऐतिहासिक संदर्भ

1979 में सीरिया को सूची में डाला गया था, जब हाफिज अल-असद की सरकार आतंकवाद का समर्थन करती थी। अब 47 साल बाद ट्रंप इसे हटा रहे हैं। ओबामा और बाइडेन युग में सीरिया नीति जटिल थी – असद विरोधी लेकिन ISIS पर फोकस। ट्रंप पहले भी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत मध्य पूर्व से सैनिक वापस बुलाना चाहते थे।

अल-शरआ का परिवर्तन उल्लेखनीय है। अल-कायदा लिंक से अलग होकर वे 'मॉडरेट' छवि बना रहे हैं। अमेरिका ने उन्हें HTS को अलग करने के बाद प्रतिबंध हटाए थे।

 क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं

- इजराइल: ईरान और हिजबुल्लाह पर फोकस के साथ सतर्क।

- तुर्की: कुर्द मुद्दे पर चिंतित, लेकिन सहयोगी।

- ईरान-रूस: विरोध, क्योंकि उनका प्रभाव घटेगा।

- सऊदी और अरब देश: समर्थन, स्थिरता के लिए।

भारत के लिए भी महत्वपूर्ण – सीरिया में भारतीय समुदाय, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होगी।

 भविष्य की चुनौतियां

सूची हटने के बाद भी स्थिरता आसान नहीं। आंतरिक कलह, आर्थिक संकट, पुनर्निर्माण की भारी लागत। अल-शरआ को समावेशी सरकार बनानी होगी। अमेरिका की मदद शर्तों के साथ आएगी – आतंकवाद विरोध, मानवाधिकार।

ट्रंप का यह कदम 'डीलमेकिंग' का उदाहरण है। पूर्व दुश्मन को दोस्त बनाने की कोशिश। लेकिन इतिहास गवाह है – मध्य पूर्व में तेज फैसले उलटे भी पड़ सकते हैं।

यह घटना दिखाती है कि भू-राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन या दोस्त नहीं होता। ट्रंप ने अल-शरआ को 'अच्छा काम' करने वाला बताया। अब देखना होगा कि सीरिया वाकई नया अध्याय शुरू कर पाता है या नहीं।

 ट्रंप का फैसला सीरिया के लिए नई सुबह ला सकता है, लेकिन सफलता क्षेत्रीय शांति और समावेशी शासन पर निर्भर करेगी। मध्य पूर्व का भविष्य रोचक मोड़ पर है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Jul 11 2026