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Wednesday, 8 July 2026

NATO में बवाल के बाद खुलासा: अमेरिका की नई विदेश नीति, सहयोगी स्पेन भी निशाने पर, ग्रीनलैंड पर पुराना दावा

NATO में बवाल के बाद खुलासा: अमेरिका की नई विदेश नीति, सहयोगी स्पेन भी निशाने पर, ग्रीनलैंड पर पुराना दावा
-Friday World Jul 9 2026
अंकारा (तुर्की)। NATO समिट के मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति को हिला दिया। स्पेन को NATO का 'बहुत खराब पार्टनर' बताते हुए उन्होंने अपने ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट को स्पेन के साथ सारे व्यापार संबंध तुरंत रोकने का आदेश दे दिया। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब यूरोपीय नेता समिट से गठबंधन की एकता मजबूत करने की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन ट्रंप ने न सिर्फ स्पेन को निशाने पर लिया बल्कि डेनमार्क को भी ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग दोहराते हुए नाराज कर दिया। 

यह घटना सिर्फ द्विपक्षीय तनाव नहीं, बल्कि NATO के भविष्य, यूरोप-अमेरिका संबंधों और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर रही है। आइए इस पूरे प्रकरण को विस्तार से समझते हैं।

ट्रंप का आक्रामक बयान: स्पेन पर तीखा हमला

बुधवार को अंकारा में चल रहे NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड को सीधे निशाना बनाया। उन्होंने कहा, "स्पेन NATO में बहुत खराब पार्टनर है। वे कुछ भी नहीं करते, कुछ भी नहीं देते। मैं उनके साथ कोई व्यापार नहीं करना चाहता।" 

ट्रंप ने तुरंत अपने ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट की ओर मुड़कर आदेश दिया- "स्पेन के साथ सारा व्यापार तुरंत बंद कर दो।" बेसेन्ट ने "हां सर" कहकर जवाब दिया। ट्रंप ने आगे कहा, "वे बेकार और खराब लोग हैं। वे हमसे बहुत पैसा कमाते हैं, अब देखते हैं वे कितना कमाते हैं।"

यह बयान NATO के नए रक्षा खर्च लक्ष्य (GDP का 5%) को स्वीकार न करने पर आधारित था। स्पेन ने इस लक्ष्य को अस्वीकार कर दिया था। ट्रंप ने मार्च में भी यही धमकी दी थी, लेकिन तब व्यापार सामान्य रहा। इस बार उन्होंने इसे सार्वजनिक रूप से लागू करने का ऐलान किया।

NATO महासचिव मार्क रूट ने माहौल शांत करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि स्पेन ने पिछले साल अपना रक्षा खर्च GDP के 2% तक बढ़ा दिया है, लेकिन कुछ मुद्दे अभी भी बाकी हैं। फिर भी ट्रंप ने स्पेन को "नकाम" करार दिया।

 ग्रीनलैंड विवाद: डेनमार्क को फिर झटका

ट्रंप ने समिट के दौरान डेनमार्क को भी नाराज कर दिया। उन्होंने दोहराया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना चाहिए। "यह दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है।" 

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ कहा- "ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।" NATO के हर इंच की रक्षा करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का अभिन्न अंग है। ट्रंप के बयान से पहले डेनमार्क पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि वह ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं करेगा।

विवाद की पृष्ठभूमि: रक्षा खर्च और ईरान मुद्दा

यह तनाव नया नहीं है। ट्रंप लंबे समय से NATO सदस्यों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने स्पेन पर आरोप लगाया कि वह 5% GDP लक्ष्य मानने से इनकार कर रही है। साथ ही ईरान संबंधी नीतियों पर भी मतभेद हैं। 

स्पेन NATO का महत्वपूर्ण सदस्य है, लेकिन ट्रंप के अनुसार वह पर्याप्त योगदान नहीं दे रही। व्यापार रोक का आदेश अगर लागू होता है तो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध बुरी तरह प्रभावित होंगे। अमेरिका स्पेन का बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

NATO समिट का माहौल: उम्मीदें और टकराव

समिट से पहले यूरोपीय नेता उम्मीद कर रहे थे कि रूस-यूक्रेन, चीन की चुनौतियों और आंतरिक मतभेदों पर एकजुटता बनेगी। लेकिन ट्रंप के बयानों ने माहौल बिगाड़ दिया। 

NATO महासचिव मार्क रूट ने कहा कि गठबंधन मजबूत है, लेकिन ट्रंप की शैली ने कई सदस्य देशों को असहज कर दिया। इटली और अन्य देशों से बातचीत का जिक्र करते हुए ट्रंप ने स्पेन को अलग-थलग करने की कोशिश की।

संभावित प्रभाव: आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक

आर्थिक प्रभाव: स्पेन के साथ व्यापार रोक से दोनों पक्षों को नुकसान होगा। स्पेन अमेरिकी निर्यात का बड़ा बाजार है। यूरोपीय संघ के नियमों के तहत ट्रेड नीतियां सामूहिक होती हैं, इसलिए यह EU-US तनाव भी बढ़ा सकता है।

सैन्य प्रभाव: NATO की एकता पर सवाल। अगर सदस्य देश आपस में लड़ें तो गठबंधन कमजोर होगा। रूस और चीन जैसे विरोधी इसका फायदा उठा सकते हैं।

कूटनीतिक प्रभाव: ग्रीनलैंड पर ट्रंप की जिद से आर्कटिक क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है। डेनमार्क और EU पहले ही साफ कर चुके हैं कि संप्रभुता पर कोई बात नहीं होगी।

 ट्रंप की रणनीति: 'अमेरिका पहले' का नया अध्याय

ट्रंप की यह शैली उनकी पुरानी 'अमेरिका पहले' नीति का हिस्सा है। वे NATO को 'फ्री राइडर्स' से बचाना चाहते हैं। लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह गठबंधन को तोड़ने वाला रवैया है। 

पिछले कार्यकाल में भी ट्रंप ने NATO पर सवाल उठाए थे। अब दूसरे कार्यकाल में वे और आक्रामक नजर आ रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के बयान रणनीतिक दबाव की तकनीक हैं। वे सहयोगियों को खर्च बढ़ाने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। लेकिन स्पेन जैसे देशों पर व्यापार रोक का खतरा NATO को अंदरूनी कलह में फंसा सकता है।

कुछ विश्लेषक इसे ट्रंप की चुनावी रणनीति से जोड़ते हैं। वे घरेलू स्तर पर 'मजबूत नेता' का चेहरा दिखाना चाहते हैं।

 NATO का भविष्य संकट में?

ट्रंप का यह आक्रोश NATO के लिए चुनौती है। गठबंधन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। स्पेन और डेनमार्क जैसे देशों के साथ तनाव बढ़ने से यूरोप-अमेरिका संबंध प्रभावित हो सकते हैं। 

दुनिया इस समिट को करीब से देख रही है। क्या ट्रंप अपनी मांगें मनवा लेंगे या NATO टूटने के कगार पर पहुंच जाएगा? समय बताएगा।

समिट जारी है। नई घटनाक्रम के साथ स्थिति बदल सकती है। ट्रंप की नीतियां वैश्विक व्यवस्था को नया रूप दे रही हैं। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Jul 9 2026