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Sunday, 16 August 2026

यूएई का बड़ा रणनीतिक खेल: ईरान को अरबों डॉलर और 2 टन सोना लौटाया? अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी ने क्यों बदली अपनी रणनीति?

यूएई का बड़ा रणनीतिक खेल: ईरान को अरबों डॉलर और 2 टन सोना लौटाया? अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी ने क्यों बदली अपनी रणनीति?
-Friday World 16 Aug 2026
मध्य पूर्व की जटिल भू-राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जो लंबे समय से अमेरिका का करीबी सहयोगी और इसराइल के साथ अब्राहम एकॉर्ड्स का हिस्सा रहा है, हाल के महीनों में ईरान के प्रति अपनी नीति में व्यावहारिक बदलाव के संकेत दे रहा है। जून और अगस्त 2026 की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यूएई ने ईरान के फrozen परिसंपत्तियों में से अरबों डॉलर और लगभग 2 टन सोना (करीब 283 मिलियन डॉलर मूल्य) जारी किया या स्थानांतरित किया। ये कदम कथित तौर पर ईरानी हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए उठाए गए।

2026 की शुरुआत में अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच संघर्ष छिड़ने के बाद यूएई पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सबसे बड़ा बोझ पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों हमलों में यूएई को निशाना बनाया गया, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा पर दबाव बढ़ा। जून 2026 में रॉयटर्स ने चार स्रोतों के हवाले से बताया कि यूएई ने ईरान के लिए अरबों डॉलर अनलॉक करने पर सहमति जताई। कुछ स्रोतों ने कुल राशि 10 अरब डॉलर बताई, जिसमें 3 अरब से अधिक पहले ही भेजे जा चुके थे, जबकि अन्य ने 20 अरब डॉलर तक का आंकड़ा दिया। यह कथित समझौता ईरानी हमलों को रोकने और आर्थिक संबंधों को फिर से शुरू करने के बदले में हुआ।

यूएई विदेश मंत्रालय ने जून की इन रिपोर्टों को तुरंत खारिज करते हुए कहा कि ये आरोप “पूरी तरह झूठे और आधारहीन” हैं। उन्होंने जोर दिया कि कोई भी फrozen ईरानी फंड जारी, स्थानांतरित या सुविधाजनक नहीं किया गया। अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी ऐसी किसी साइड डील से इनकार किया।

फिर अगस्त 2026 में नई रिपोर्ट्स सामने आईं। ईरानी स्रोतों और कुछ मीडिया रिपोर्टों (जैसे द हॉरमुज लेटर और अन्य) के अनुसार, यूएई ने ईरान के फrozen परिसंपत्तियों में से अतिरिक्त अरबों डॉलर के साथ-साथ 1.5 से 2 टन सोना जारी किया। ये परिसंपत्तियां 11 और 12 अगस्त को यूएई की रॉयल जेट कंपनी के बोइंग 737-7KK (रजिस्ट्रेशन A6-RJA) विमान से अबू धाबी से तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट और करज के पयाम एयरपोर्ट पहुंचाई गईं। विमान प्रत्येक यात्रा पर करीब एक घंटे रुका और वापस लौट आया। कुछ रिपोर्टों में इसे जून में कथित 3 अरब डॉलर के ट्रांसफर के बाद का तीसरा या अतिरिक्त कदम बताया गया। साथ ही, यूएई ने ईरानी एयरलाइंस को 15 पुराने पैसेंजर विमानों की बिक्री की मंजूरी भी दी होने का दावा किया गया।

ये दावे अभी भी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुए हैं। यूएई और अमेरिका की ओर से पुष्टि का अभाव है, और फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा केवल विमान की यात्राओं की पुष्टि करता है, न कि उसके कार्गो या उद्देश्य की। फिर भी, ये रिपोर्ट्स यूएई की बदलती रणनीति की ओर इशारा करती हैं।

क्यों बदली रणनीति?

यूएई लंबे समय से अमेरिका का मजबूत सहयोगी रहा है। युद्ध के दौरान उसने खुद भी ईरानी ठिकानों पर कुछ हमले किए और इसराइल तथा अमेरिका के साथ समन्वय बढ़ाया। लेकिन संघर्ष के दौरान हुए नुकसान और क्षेत्रीय अस्थिरता ने व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी। छोटे लेकिन समृद्ध देश के रूप में यूएई की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था (खासकर ऊर्जा मार्ग और व्यापार) प्राथमिकता हैं। ईरान के साथ तनाव कम करके हमलों से बचाव, आर्थिक संबंधों को पुनर्जीवित करना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना इसकी नई प्राथमिकताएं लगती हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, यूएई अब “राष्ट्रीय हित पहले” की नीति अपना रहा है। कूटनीति, आर्थिक वजन और रक्षा क्षमता का मिश्रण इस्तेमाल कर रहा है। एक ओर अमेरिका और इसराइल के साथ सुरक्षा संबंध मजबूत रखे जा रहे हैं, दूसरी ओर ईरान के साथ सीमित आर्थिक और कूटनीतिक चैनल खोलने की कोशिश हो रही है। यह पूरी तरह नीति परिवर्तन नहीं, बल्कि जोखिम प्रबंधन और pragmatic adjustment है। युद्ध के बाद की नाजुक स्थिति में यूएई समझता है कि केवल टकराव से सुरक्षा नहीं मिलती।

ईरान के लिए ये कथित फंड्स और सोना आर्थिक राहत का स्रोत हो सकते हैं, खासकर प्रतिबंधों के बीच। क्षेत्र में यह घटनाक्रम खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के अंदर भिन्न दृष्टिकोणों को भी दर्शाता है, जहां कुछ देश कूटनीति पर जोर देते हैं तो कुछ मजबूत रुख अपनाते हैं।


ये रिपोर्ट्स मध्य पूर्व की बदलती शक्ति गतिशीलता को रेखांकित करती हैं। यूएई का यह कथित कदम दिखाता है कि गठबंधन स्थायी नहीं होते; परिस्थितियां बदलने पर रणनीतियां भी बदलती हैं। अगर दावे सही निकले तो यह क्षेत्रीय de-escalation का संकेत हो सकता है, लेकिन आधिकारिक इनकार और सत्यापन की कमी के कारण सावधानी बरतनी जरूरी है। वैश्विक ऊर्जा बाजार, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और बड़े शक्ति संतुलन पर इसका असर पड़ सकता है।

यूएई का यह “बड़ा खेल” व्यावहारिकता, सुरक्षा और आर्थिक हितों का मिश्रण लगता है। अमेरिका के करीबी सहयोगी होते हुए भी अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना आज की भू-राजनीति की हकीकत है। आगे की घटनाएं ही बताएंगी कि यह अस्थायी समायोजन है या लंबे समय की नई रणनीति।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 16 Aug 2026

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