- Friday World 17 Aug 2026
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। शनिवार की रात नदिया जिले के नकाशिपारा में कांग्रेस नेता अनीसुर रहमान और उनके 24 वर्षीय बेटे अबू सुफियान की गोली मारकर और धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई। यह घटना बेथुआडहरी रेलवे क्रॉसिंग के पास हुई, जो उनके घर से महज 200 मीटर की दूरी पर है।
अनीसुर रहमान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य और नदिया जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव थे। उनके बेटे अबू सुफियान कानून की पढ़ाई कर रहे थे और कृष्णनगर कोर्ट में प्रैक्टिस भी करते थे। परिवार के अनुसार वे लंदन जाकर आगे की पढ़ाई करने की योजना बना रहे थे। दोनों पिता-पुत्र कार से घर लौट रहे थे तभी अज्ञात हमलावरों ने उनकी गाड़ी को रोका। पहले ताबड़तोड़ फायरिंग की गई और फिर दोनों पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।
पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें हरानगर ग्राम पंचायत की प्रधान फातिमा बीबी (टीएमसी नेता) शामिल हैं। पुलिस और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, फातिमा बीबी के पति जब्बार शेख, जो जेल में बंद हैं, इस हत्याकांड के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने यह हत्या की है और कानून सबके लिए समान है।
कांग्रेस ने इस दोहरे हत्याकांड की कड़ी निंदा की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने निष्पक्ष जांच और दोषियों को कठोर सजा की मांग की है। पार्टी ने पूरे राज्य में ब्लैक डे भी मनाया। स्थानीय कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इलाके पर कब्जा करने की मंशा से यह हत्या करवाई गई।
इससे ठीक पहले बिरभूम जिले में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपाध्यक्ष आशिश बनर्जी का शव पार्टी ऑफिस में फांसी की हालत में मिला था। उनके पास कथित सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया था। इन दोनों घटनाओं ने राज्य में राजनीतिक हिंसा और अपराध के बढ़ते ग्राफ पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है। राजनीतिक रंजिशें और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई हिंसा का रूप लेती दिख रही है। नदिया जैसे इलाकों में लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चली आ रही है। परिवार वाले न्याय की मांग कर रहे हैं और कहते हैं कि बेटा राजनीति से दूर था, फिर भी उसकी जान चली गई।
पुलिस जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत ने पुलिस हिरासत में भेज दिया है। प्रशासन ने दावा किया है कि निष्पक्ष जांच हो रही है। विपक्षी दल कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का वादा कर रहा है।
यह घटना याद दिलाती है कि राजनीतिक हिंसा न सिर्फ नेताओं बल्कि उनके परिवारों को भी निशाना बनाती है। बंगाल जैसे राज्य में शांति और लोकतंत्र की बहाली के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक सहमति दोनों जरूरी हैं। अनीसुर रहमान और उनके बेटे की हत्या ने एक बार फिर राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 17 Aug 2026
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