- Friday World 15 Aug 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क के पास एक रैली में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छेड़ दी। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई पूरी होने और उसे हराने के बाद अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को अपने क्षेत्र में शामिल करने की दिशा में कदम उठा सकता है। ट्रंप के शब्दों में, “After we finish defeating Iran, which is being very badly defeated, pretty soon I’ll be declaring the Hormuz Strait a territory of the United States.” उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका पहले से ही ब्लॉकेड के जरिए जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखता है और कोई जहाज उनकी मर्जी के बिना नहीं गुजर सकता।
यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई महीनों से जारी है। फरवरी 2026 के आसपास शुरू हुए संघर्ष के बाद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। सामान्य दिनों में दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। कच्चे तेल, एलएनजी और अन्य ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई के लिए यह रास्ता बेहद संवेदनशील है। अवरोध होने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आया है और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है।
ट्रंप ने रैली में हंसते हुए यह बात कही। बाद में व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि राष्ट्रपति का यह बयान मजाक के तौर पर था और उन्होंने सलाहकारों के साथ इस तरह के किसी औपचारिक कदम पर चर्चा नहीं की है। फिर भी ईरान ने तुरंत तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरानी उप विदेश मंत्री काजिम गरीबआबादी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा से ईरानी रहा है, है और रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जलमार्ग केवल ईरान के आदेश पर बंद या खुलेगा और इसे ट्वीट, विमानवाहक पोत या राजनीतिक भाषण से नहीं छीना जा सकता।
होर्मुज जलडमरूमध्य भौगोलिक रूप से ईरान और ओमान के बीच स्थित है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के अनुसार ऐसे जलमार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही का अधिकार है। किसी एक देश द्वारा इसे अपना क्षेत्रीय हिस्सा घोषित करना कानूनी और कूटनीतिक रूप से बेहद जटिल तथा लगभग असंभव है। कांग्रेस की भूमिका, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और अन्य देशों के हित इसमें बाधा बनेंगे। ओमान समेत क्षेत्रीय देश भी इसे आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे।
वर्तमान संघर्ष में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर ब्लॉकेड लगाया है जबकि ईरान ने जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने के कदम उठाए हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर नियंत्रण का दावा करते रहे हैं। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका का “वॉल ऑफ स्टील” ब्लॉकेड काम कर रहा है। वहीं ईरान इसे झूठा बताता है और अपनी शर्तों पर जलमार्ग खोलने की बात करता है। शर्तों में युद्ध समाप्त करना, प्रतिबंध हटाना और मुआवजा जैसी मांगें शामिल रहीं।
इस बयान के आर्थिक निहितार्थ भी बड़े हैं। ऊर्जा कीमतें पहले से ऊंची हैं। अमेरिकी उपभोक्ताओं को पेट्रोल पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। ट्रंप ने कहा कि परमाणु हथियार से ईरान को रोकने के लिए थोड़ी ऊंची कीमत स्वीकार करनी चाहिए। वैश्विक स्तर पर तेल आयातक देशों, खासकर एशिया के कई देशों के लिए यह चिंता का विषय है। लंबे समय तक अवरोध जारी रहा तो महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप का बयान उनके शैली के अनुरूप है—मजबूत और उत्तेजक भाषा का इस्तेमाल। उन्होंने ग्रीनलैंड, कनाडा या अन्य क्षेत्रों को लेकर भी कभी-कभी ऐसी बातें कही हैं। लेकिन होर्मुज जैसा रणनीतिक जलमार्ग किसी देश का क्षेत्रीय हिस्सा बनाना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देगा। इतिहास में ऐसे दावों के उदाहरण दुर्लभ हैं और आमतौर पर संघर्ष बढ़ाते हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं। क्षेत्रीय सहयोगी, मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और आर्थिक प्रतिबंध इसकी व्यापक तस्वीर हैं। शांति वार्ता के प्रयास बीच-बीच में होते रहे लेकिन नियंत्रण के मुद्दे पर अड़चन बनी रही। विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थायी समाधान के लिए दोनों पक्षों को कूटनीतिक रास्ता अपनाना होगा क्योंकि सैन्य रास्ता ऊर्जा संकट और मानवीय संकट दोनों बढ़ा सकता है।
ट्रंप के बयान ने एक बार फिर याद दिलाया कि मध्य पूर्व की राजनीति कितनी नाजुक है। होर्मुज न सिर्फ तेल का रास्ता है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की नस भी है। इसे लेकर किसी भी तरह का एकतरफा दावा या कार्रवाई पूरे विश्व को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल व्हाइट हाउस की सफाई के बाद इसे गंभीर नीतिगत बदलाव के बजाय रैली वाला बयान माना जा रहा है। फिर भी तनाव कम होने के संकेत फिलहाल कमजोर हैं।
दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर हैं कि आगे बातचीत होती है या तनाव और बढ़ता है। ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति के बीच संतुलन बनाना दोनों पक्षों के लिए चुनौती बना हुआ है। होर्मुज की स्थिरता सिर्फ अमेरिका या ईरान का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का साझा हित है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 15 Aug 2026
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