-Friday World 21 Aug 2026
मंगलवार तड़के उत्तर-पश्चिमी सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित अबू दुहूर एयर बेस पर इजरायली हमले ने मध्य पूर्व की पहले से ही जटिल सुरक्षा स्थिति को और उलझा दिया है। इजरायल का दावा है कि इस हमले का मकसद बेस पर तुर्की सैनिकों की संभावित तैनाती को रोकना था। सीरियाई सरकारी टीवी के अनुसार रनवे और कुछ सुविधाओं को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। यह घटना इजरायल और तुर्की के बीच सीरिया को लेकर लंबे समय से चली आ रही तनातनी को नए सिरे से भड़का रही है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने स्पष्ट बयान जारी कर कहा कि सीरिया ने तुर्की सेना को बेस में आने की अनुमति देकर सुरक्षा मामलों में बनी यथास्थिति को तोड़ने की कोशिश की थी। इजरायल का कहना है कि उसने सीरिया को बार-बार चेतावनी दी थी कि ऐसी तैनाती उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, लेकिन दमिश्क ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया। इजरायल की नजर में पड़ोसी देश में तुर्की की बढ़ती सैन्य उपस्थिति स्वीकार्य नहीं है।
दूसरी ओर, सीरिया और तुर्की दोनों ने इजरायली दावों का खंडन किया है। सीरियाई विदेश मंत्री ने कहा कि अबू दुहूर बेस पर तुर्की का कोई स्थायी सैन्य अड्डा बनाने या बड़े पैमाने पर सैनिक तैनात करने की कोई योजना नहीं थी। तुर्की अधिकारी केवल प्रशिक्षण और सैन्य सहयोग के सिलसिले में वहां गए थे। बेस अभी पूरी तरह संचालन में नहीं था और पुनर्निर्माण के चरण में था। तुर्की रक्षा मंत्रालय ने भी साफ कहा कि हमले से पहले या दौरान वहां कोई तुर्की सैन्य प्रतिनिधिमंडल मौजूद नहीं था। अंकारा ने इजरायली हमले को “लापरवाह” करार दिया और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की मांग की।
### पृष्ठभूमि: सीरिया में प्रभाव का संघर्ष
सीरिया में लंबे गृहयुद्ध के बाद नई राजनीतिक व्यवस्था आकार ले रही है। तुर्की का सीरिया की वर्तमान सरकार के साथ करीबी रिश्ता है। अंकारा लंबे समय से सीरियाई सेना को सहयोग दे रहा है और उत्तरी सीरिया में अपनी सुरक्षा चिंताओं (खासकर कुर्द समूहों से जुड़ी) को देखते हुए सक्रिय रहा है। इजरायल के लिए यह स्थिति अलग मायने रखती है। तेल अवीव हमेशा से चाहता रहा है कि उसके उत्तरी सीमा के पास कोई ऐसी शक्ति न बढ़े जो उसकी सुरक्षा को चुनौती दे सके। तुर्की की सैन्य मौजूदगी को वह संभावित खतरे के रूप में देखता है।
अबू दुहूर एयर बेस इदलिब क्षेत्र में है, जो तुर्की सीमा के अपेक्षाकृत करीब पड़ता है। इस बेस पर किसी भी विदेशी सैन्य गतिविधि को इजरायल अपनी “रेड लाइन” का उल्लंघन मानता है। नेतन्याहू कार्यालय के बयान में “सुरक्षा मामलों में सहमत यथास्थिति” का जिक्र महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों के बीच कुछ समझ या अनौपचारिक समझौते की बात कही जा रही है, जिसे इजरायल के अनुसार सीरिया तोड़ने जा रहा था।
### हमले का तात्कालिक असर
हमले में आठ एयरस्ट्राइक की खबर है, जिनमें मुख्य रूप से रनवे और स्टोरेज सुविधाओं को निशाना बनाया गया। कोई हताहत न होना राहत की बात है, लेकिन भौतिक नुकसान ने बेस की उपयोगिता को प्रभावित किया है। सीरियाई पक्ष ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है। तुर्की ने भी इजरायल की “आक्रामक” नीतियों की आलोचना की है। संयुक्त राज्य अमेरिका के एक वरिष्ठ दूत ने इसे “अनावश्यक उकसावे” करार दिया और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नुकसानदायक बताया। अमेरिका दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए डि-कॉनफ्लिक्शन मैकेनिज्म पर काम कर रहा है।
यह हमला मार्च के बाद सीरियाई सरकारी ठिकानों पर इजरायल का पहला बड़ा हमला माना जा रहा है। इससे साफ है कि इजरायल अपनी सुरक्षा नीति में कोई नरमी नहीं बरतना चाहता, चाहे क्षेत्रीय कूटनीति कितनी भी जटिल क्यों न हो।
### लंबे समय से चली आ रही तनातनी
इजरायल और तुर्की के रिश्ते कई सालों से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। दोनों देश नाटो सहयोगी या क्षेत्रीय खिलाड़ी होने के बावजूद सीरिया, पूर्वी भूमध्य सागर और अन्य मुद्दों पर अलग-अलग रुख रखते हैं। तुर्की सीरियाई सरकार के करीब है और उसकी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में मदद कर रहा है। इजरायल इसे अपनी सीमा के पास शक्ति संतुलन बिगड़ने के रूप में देखता है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं—इजरायल तुर्की को “खतरनाक साहसिक कदम” उठाने का आरोप लगा रहा है, जबकि तुर्की इजरायल पर सीरिया की अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगा रहा है।
क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक एयरबेस का मामला नहीं है। यह सीरिया में प्रभाव क्षेत्र को लेकर व्यापक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है। इजरायल चाहता है कि सीरिया कमजोर सैन्य क्षमता वाला रहे और कोई बाहरी शक्ति वहां मजबूत पैर न जमाए। तुर्की चाहता है कि सीरिया स्थिर हो और उसकी अपनी सुरक्षा चिंताएं दूर हों। दोनों हित टकरा रहे हैं।
### आगे क्या हो सकता है?
इस हमले से तनाव बढ़ने की आशंका वास्तविक है। अगर तुर्की या सीरिया जवाबी कदम उठाते हैं, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वह दोनों देशों के साथ रिश्ते रखता है और क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है। कूटनीतिक संपर्क जारी हैं। सीरियाई विदेश मंत्री और इजरायली खुफिया अधिकारियों के बीच पहले भी बातचीत हुई थी, लेकिन हमले ने उस प्रक्रिया को झटका दिया है।
मध्य पूर्व में छोटी-छोटी घटनाएं भी बड़े संघर्ष का रूप ले सकती हैं। अबू दुहूर हमला याद दिलाता है कि सीरिया अभी भी क्षेत्रीय शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा बना हुआ है। इजरायल अपनी सुरक्षा को सर्वोपरि रखता है और किसी भी संभावित खतरे को पहले ही रोकने की नीति पर अमल कर रहा है। तुर्की अपनी क्षेत्रीय भूमिका और सीरियाई सहयोग को जारी रखने का इरादा रखता है। दोनों रुखों के बीच समझौता निकालना आसान नहीं होगा।
जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह घटना चेतावनी है कि क्षेत्र में स्थायी शांति अभी दूर है। सैन्य कार्रवाइयां अस्थायी समाधान दे सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक तनाव कम करने के लिए बातचीत और आपसी समझ जरूरी है। अबू दुहूर एयर बेस पर हुआ यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि इजरायल-तुर्की-सीरिया त्रिकोण में प्रभाव और सुरक्षा की नई लड़ाई का संकेत है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बयान और संभावित जवाबी कदम इस तनाव की दिशा तय करेंगे।
Sajjadali Nayani ✍
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