-Friday World 15 Aug 2026
देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल (E20) मिलाने की चर्चा अभी थमी नहीं है, तभी एक और बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। अब साफ और सस्ते माने जाने वाले CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) ईंधन में भी मिश्रण शुरू हो गया है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा हाल ही में सोशल मीडिया पर शेयर किए गए आधिकारिक वीडियो ने वाहन चालकों का ध्यान खींचा है। इस वीडियो में दिखाया गया है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले CNG के साथ CBG (कंप्रेस्ड बायो गैस) कैसे मिलाया जा रहा है। स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
CBG क्या है? कंप्रेस्ड बायो गैस या बायो-CNG कृषि अवशेष, पशु गोबर, खाद्य अपशिष्ट, नगरपालिका ठोस कचरा और सीवेज से बनने वाली बायोगैस का शुद्ध रूप है। बायोगैस को शुद्ध करके उसमें से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अशुद्धियां निकाल ली जाती हैं, जिससे इसमें मीथेन की मात्रा 90 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। गुणों में यह सामान्य नेचुरल गैस या CNG के लगभग समान होता है। इसलिए मौजूदा CNG वाहनों या फिलिंग स्टेशनों में कोई बदलाव किए बिना इसे इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए CBG ब्लेंडिंग को अनिवार्य बना दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में 1 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पार करते हुए 1.05 प्रतिशत ब्लेंडिंग हासिल की गई। अब लक्ष्य बढ़ाए जा रहे हैं—वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत। BPCL जैसी कंपनियां पहले से ही उच्च ब्लेंडिंग रेशियो हासिल कर रही हैं। कंपनी के वीडियो से साफ है कि CBG को CNG के साथ मिलाकर पंपों तक पहुंचाया जा रहा है और वाहनों में सामान्य तरीके से भरा जा रहा है।
इस कदम के कई फायदे हैं। सबसे पहले पर्यावरणीय लाभ। CBG जैविक कचरे से बनता है, इसलिए यह कार्बन न्यूट्रल या कम उत्सर्जन वाला ईंधन है। इससे ग्रीनहाउस गैसों में कमी आती है और कचरे का बेहतर प्रबंधन होता है। दूसरा, किसानों को अतिरिक्त आय। गोबर, फसल अवशेष और अन्य कृषि कचरे को बेचकर वे पैसा कमा सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
तीसरा बड़ा फायदा ऊर्जा सुरक्षा का है। भारत नेचुरल गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। घरेलू CBG उत्पादन बढ़ाने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और आयात निर्भरता घटेगी। सरकार ने GOBARdhan जैसी योजनाओं के जरिए CBG प्लांट्स को बढ़ावा दिया है। हजारों करोड़ रुपये के निवेश से सैकड़ों प्लांट लग रहे हैं या लग चुके हैं।
वाहन चालकों के लिए अच्छी खबर यह है कि प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। चूंकि CBG और CNG दोनों मुख्य रूप से मीथेन हैं, इसलिए इंजन की पावर, माइलेज या मेंटेनेंस में कोई खास फर्क नहीं आता। कई विशेषज्ञ इसे E20 से भी बेहतर बताते हैं क्योंकि इथेनॉल ब्लेंडिंग में कभी-कभी संगतता के मुद्दे उठते हैं, जबकि यहां ऐसा नहीं है।
BPCL का वीडियो इस दिशा में व्यावहारिक प्रगति का संकेत है। कंपनी कई भौगोलिक क्षेत्रों में CBG उत्पादकों के साथ समझौते कर रही है और ब्लेंडिंग बढ़ा रही है। अन्य कंपनियां जैसे टोरेंट गैस, IGL आदि भी इसमें आगे हैं। कुल मिलाकर देश में 200 से अधिक CBG प्लांट काम कर रहे हैं और कई और निर्माणाधीन हैं।
चुनौतियां भी हैं। पर्याप्त CBG उत्पादन, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और स्थिर मूल्य निर्धारण जरूरी है। कई प्लांट अभी पाइपलाइन से नहीं जुड़े हैं, जिससे आपूर्ति बाधित हो सकती है। सरकार इन मुद्दों को हल करने के लिए योजनाएं बना रही है। लंबे समय में यह सर्कुलर इकोनॉमी का मजबूत उदाहरण बनेगा—कचरे से ईंधन, किसानों को आय, पर्यावरण को फायदा और देश को ऊर्जा सुरक्षा।
पेट्रोल में इथेनॉल के बाद CNG में CBG मिश्रण भारत की हरित ऊर्जा यात्रा का अगला अध्याय है। यह न सिर्फ स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देगा बल्कि ग्रामीण भारत को भी मुख्यधारा से जोड़ेगा। आने वाले वर्षों में जब ब्लेंडिंग प्रतिशत बढ़ेगा तो इसका प्रभाव और स्पष्ट दिखेगा। वाहन चालकों को फिलहाल किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। बस सामान्य CNG की तरह भरवाएं और पर्यावरण के प्रति अपना योगदान देते रहें।
यह पहल साबित करती है कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में ठोस कदम उठा रहा है। कचरे को सोने में बदलने वाली यह तकनीक अगर सही तरीके से लागू हुई तो आने वाले समय में CNG और भी हरित और सस्ती हो सकती है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 15 Aug 2026
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