-Friday World 29 Aug 2026
पटना में शनिवार को NDA के अंदर एक ऐसा राजनीतिक टकराव सामने आया है जिसने बिहार से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हलचल मचा दी है। मोदी कैबिनेट के दो दलित चेहरे, चिराग पासवान और जीतनराम मांझी आमने-सामने आ गए हैं। मुद्दा है - अनुसूचित जाति आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कैटेगराइजेशन।
विवाद की शुरुआत कहाँ से हुई?
यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2024 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारें SC के 15% कोटे के अंदर ही वंचित जातियों के लिए सब-कैटेगरी बना सकती हैं और SC/ST में भी क्रीमी लेयर की पहचान के लिए मानदंड तय कर सकती हैं।
इसी फैसले का समर्थन करते हुए हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन, जो बिहार सरकार में मंत्री हैं, ने आरक्षण की समीक्षा की मांग की। संतोष सुमन ने कहा था कि आरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है, महादलित में शामिल 22 में से 18 जातियों के साथ न्याय नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया था कि बिहार में 4% आबादी वाले मुसहर समाज से आज तक एक भी DM या SP क्यों नहीं बन पाया?
चिराग पासवान का पलटवार: इस्तीफा मांग लिया
इस बयान के बाद LJP (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पटना में मीडिया से बात करते हुए सीधा हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि अगर मांझी जी को लगता है कि SC आरक्षण में क्रीमी लेयर लगना चाहिए, तो सबसे पहले उन्हें और उनके बेटे को मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।
चिराग ने कहा, "अनुसूचित जाति के सभी वर्गों में एकता है, इसलिए उनकी सामाजिक शक्ति टिकी है। अगर SC वर्ग में बंटवारा करोगे तो आरक्षण व्यवस्था ही धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। SC आरक्षण सामाजिक पिछड़ेपन और अस्पृश्यता के आधार पर दिया गया है, आर्थिक आधार पर नहीं। संविधान में कहीं भी दलितों के लिए आर्थिक क्रीमी लेयर का उल्लेख नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा कि संविधान बदलना है तो चर्चा संसद में होनी चाहिए, बाहर बयानबाजी करके समाज में बंटवारा करना ठीक नहीं है। चिराग की पार्टी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की भी बात कही थी।
मांझी का जवाब भी उतना ही तीखा आया। उन्होंने कहा, "जो लोग इस तरह का रुख अपना रहे हैं वे स्वार्थी हैं। मैं इस आदेश का पूरे दिल से स्वागत करता हूं, यह दस साल पहले आना चाहिए था।" बाद में मांझी ने पलटवार करते हुए कहा कि चूंकि चिराग गरीबों के हितों की परवाह नहीं करना चाहते, इसलिए उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
दोनों की दलील क्या है?
मांझी पक्ष का तर्क: मांझी खुद मुसहर समुदाय से आते हैं, जो बिहार का सबसे वंचित दलित समुदाय है। उनका तर्क है कि आजादी के इतने सालों बाद भी आरक्षण का बड़ा हिस्सा पासवान, रविदास जैसी अपेक्षाकृत आगे बढ़ी हुई दलित जातियों तक ही सीमित है। छेवाड़े पर खड़ा अति-पिछड़ा वर्ग आज भी पीछे है। इसलिए असली लाभ सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सब-कैटेगराइजेशन जरूरी है।
चिराग पक्ष का तर्क: चिराग पासवान का कहना है कि SC आरक्षण का आधार छुआछूत है। एक अमीर दलित भी मंदिर में जाने पर भेदभाव का शिकार होता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ भेदभाव हो सकता है, तो क्रीमी लेयर की बात कैसे हो सकती है? अगर दलितों में ही बंटवारा कर दिया गया तो उनकी सामूहिक ताकत टूट जाएगी। ea67
केंद्र सरकार का स्टैंड क्या है?
इस पूरे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने अपना रुख सुप्रीम कोर्ट में साफ किया है। सरकार ने दाखिल हलफनामे में कहा है कि SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं होता। संविधान में SC-ST के लिए क्रीमी लेयर की कोई व्यवस्था नहीं है, यह अवधारणा केवल OBC आरक्षण से जुड़ी है।
दरअसल, यह लड़ाई सिर्फ कानूनी नहीं, बिहार चुनाव 2025 से पहले वोट बैंक की भी है। LJP (रामविलास) के पास 19 विधायक और 5 सांसद हैं, जबकि HAM के पास 5 विधायक और 1 सांसद है। दोनों ही दलित वोटों पर दावा करते हैं, लेकिन एक आगे बढ़ी दलित जातियों का प्रतिनिधित्व करता है, तो दूसरा सबसे पिछड़ी जातियों का।
यह टकराव NDA के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि एक तरफ सामाजिक न्याय की बात है तो दूसरी तरफ सामाजिक एकता की।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 29 Aug 2026
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