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Tuesday, 1 September 2026

'होर्मुज पर हमारा कब्जा है' - ट्रंप के एक पोस्ट से दुनिया में हड़कंप, कच्चा तेल $96 पार, शेयर बाजार धड़ाम

'होर्मुज पर हमारा कब्जा है' - ट्रंप के एक पोस्ट से दुनिया में हड़कंप, कच्चा तेल $96 पार, शेयर बाजार धड़ाम
-Friday World 2 Sep 2026
वॉशिंगटन से आई एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है।

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर एक ऐसा दावा किया, जिसके बाद इंटरनेशनल ऑयल मार्केट में आग लग गई और एशिया से लेकर अमेरिका तक शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी गई।

 ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि व्यापारिक और सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) पर अब अमेरिका का लगभग पूर्ण नियंत्रण हो चुका है। 

इतना ही नहीं, उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था को लेकर भी बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने लिखा कि ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो चुकी है और वह अब घुटनों पर है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि वह ईरान के साथ किसी भी तरह की डील या बातचीत के मूड में नहीं हैं। उन्होंने लिखा - 

> "ईरान कोई समझौते पर साइन करता है या नहीं, मुझे इसकी जरा भी परवाह नहीं है। मौजूदा स्थिति अमेरिका के लिए बेहद मजबूत और अनुकूल है, क्योंकि होर्मुज पर हमारा नियंत्रण है और ईरान की आर्थिक स्थिति कंगाल हो चुकी है।"

उनके इस एक बयान के बाद दुनिया भर में भूचाल आ गया।

 क्यों इतना महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?

आप सोच रहे होंगे कि एक समुद्री रास्ते पर इतना हंगामा क्यों? तो समझिए, होर्मुज स्ट्रेट कोई आम रास्ता नहीं है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा जलमार्ग है, जो ईरान और ओमान के बीच में है।

दुनिया का एनर्जी हाइवे: दुनिया के कुल कच्चे तेल की खपत का लगभग 20% से 21% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल के टैंकर इसी संकरे रास्ते से निकलते हैं। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपना तेल दुनिया तक इसी रास्ते से पहुंचाते हैं।

अगर यह रास्ता बंद हो गया या यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव हुआ, तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई रुक जाएगी। इसी डर ने बाजार को दहला दिया है।

 कच्चे तेल के दामों में लगी आग

ट्रंप के बयान के आते ही इंटरनेशनल मार्केट में तेल खरीदने की होड़ मच गई और दाम रॉकेट की तरह ऊपर चले गए।

- ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): $96 प्रति बैरल के पार निकल गया, जो पिछले कई महीनों का उच्चतम स्तर है।
- WTI क्रूड (WTI Crude): अमेरिकी कच्चा तेल $92 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
- मर्बन क्रूड (Murban Crude): एशिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला मर्बन क्रूड तो $104 प्रति बैरल से भी ऊपर ट्रेड करता देखा गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो तेल $110 से $120 तक भी जा सकता है।

 शेयर बाजारों में हाहाकार, भारत पर क्या असर होगा?

तेल के दाम बढ़ने का सीधा मतलब है महंगाई बढ़ना। इसी डर से निवेशकों ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया।

जापान का निक्केई, साउथ कोरिया का कोस्पी, हांगकांग का हैंगसेंग समेत सभी प्रमुख एशियाई बाजार लाल निशान में बंद हुए। अमेरिकी फ्यूचर्स मार्केट में भी भारी गिरावट देखी गई।

भारत के लिए खतरे की घंटी: भारत अपनी 85% से ज्यादा तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। तेल महंगा होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा, रुपया कमजोर होगा और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से आम आदमी पर महंगाई की मार पड़ेगी। रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों को काबू में रखना और भी मुश्किल हो जाएगा।

 आगे क्या होगा?

फिलहाल दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं। ईरान ने अभी तक ट्रंप के इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने होर्मुज पर कब्जे की कोशिश की तो वह पूरे क्षेत्र को युद्ध में झोंक देगा।

अमेरिका ने इस इलाके में अपने युद्धपोतों की तैनाती पहले ही बढ़ा दी है। ऐसे में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े युद्ध का रूप ले सकती है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 2 Sep 2026

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