-Friday World September 16,2026
मक्का-ए-मोअज्जमा पर हमले की झूठी कहानी और असली साजिश
आज उम्मत-ए-मुस्लिमा एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ दुश्मन बाहर से कम और अंदर से ज्यादा वार कर रहा है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित मुहिम देखी जा रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि अंसारुल्लाह ने मक्का-ए-मोअज्जमा पर हमला करने की कोशिश की।
सोचने वाली बात है, वह अंसारुल्लाह जो फिलिस्तीन की मज़लूम अवाम की हिमायत में खड़ा है, जिसने यमन से लेकर ग़ज़्ज़ा तक ज़ायोनिस्ट जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की है, वह भला हरम-ए-पाक पर हमला क्यों करेगा? हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
असल में यह एक बहुत बड़ी साइकोलॉजिकल वॉरफेयर है। सऊदी हुकूमत के अंदर बैठे ज़ायोनिस्ट डीप स्टेट के असर वाले तत्व खुद ही ऐसे फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की स्क्रिप्ट लिखते हैं, और नाम लगा देते हैं उन मुजाहिदीन तंजीमों का जो इस्राइल और अमेरिका की आंखों में खटकती हैं।
सोशल मीडिया पर आतंकवादी ग्रुपों की बाढ़ क्यों?
आप गौर करें तो पिछले कुछ महीनों में फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर अचानक सैकड़ों पेज और ग्रुप एक्टिव हो गए हैं। इनका काम सिर्फ एक है - अंसारुल्लाह को दहशतगर्द साबित करना, फिलिस्तीन हिमायती तहरीकों को बदनाम करना और सऊदी हुकूमत को इस्लाम का इकलौता ठेकेदार दिखाना।
ये अकाउंट्स एक ही पैटर्न पर पोस्ट करते हैं, एक ही तरह के ग्राफिक्स, एक ही तरह की भाषा। साफ जाहिर होता है कि इनके पीछे कोई आम आदमी नहीं, बल्कि एक बड़ी एजेंसी काम कर रही है, जो देश और विदेश दोनों जगह से ऑपरेट कर रही है। इसका मकसद साफ है - मुसलमानों के दिलों में फिलिस्तीन की हिमायत करने वालों के लिए नफरत पैदा करो।
इस्लाम को खतरा बाहर से नहीं, अंदर से है
हमारे बुजुर्गों ने सही कहा था कि दीने इस्लाम को इतनी थ्रेट बाहर से नहीं है जितनी अंदर से है। इतिहास गवाह है, जब भी इस्लाम पर सामने से हमला हुआ है, वह और मजबूत हुआ है। इस्राइल और अमेरिकी डीप स्टेट का मुश्तरका ज़ायोनिस्ट नेटवर्क आज भी मैदाने जंग में इस्लाम का मुकाबला नहीं कर सकता।
इसीलिए वह एक पुरानी चाल चलता है - इस्लाम का चोला पहन कर इस्लाम को नुकसान पहुंचाना। हरमैन शरीफैन की आड़ में बैठ कर, इस्लामी लिबास में, ऐसी साजिशें रची जाती हैं जिससे पूरी दुनिया में मुसलमान आपस में ही लड़ते रहें। फिलिस्तीन का मुद्दा भूल जाएं, यमन का दर्द भूल जाएं, और आपस में फिरका वारियत में उलझे रहें।
यह वही ज़ायोनिस्ट शैतान है जो नहीं चाहता कि उम्मत एक हो। वह जानता है कि अगर मक्का और कुद्स के चाहने वाले एक हो गए, तो उसका वजूद खत्म हो जाएगा। इसलिए वह मक्का के नाम पर कुद्स को और कुद्स के नाम पर मक्का को बदनाम करने की साजिश रचता है।
अंसारुल्लाह को बदनाम करने का असली मकसद क्या है?
अंसारुल्लाह ने लाल सागर में इस्राइली जहाजों को रोक कर, अमेरिका को ललकार कर जो काम किया है, वह आज तक किसी अरब हुकूमत ने नहीं किया। इसी वजह से उसे बदनाम करना जरूरी हो गया है।
प्लान बिल्कुल साफ है:
1. पहले मक्का पर हमले की झूठी खबर फैलाओ।
2. फिर उसे अंसारुल्लाह से जोड़ो।
3. फिर पूरी दुनिया के मुसलमानों में यह नैरेटिव बनाओ कि देखो, ये लोग तो हरम के भी दुश्मन हैं।
4. ताकि जब वह फिलिस्तीन के लिए आवाज उठाए तो कोई उसकी बात पर यकीन न करे।
लेकिन उम्मत अब बेदार हो रही है। लोग समझ रहे हैं कि जो हुकूमतें इस्राइल के साथ हाथ मिलाकर इब्राहिमी समझौते कर रही हैं, जो ग़ज़्ज़ा में कत्लेआम पर खामोश हैं, वह कैसे इस्लाम की रहनुमा हो सकती हैं?
हमें क्या करना चाहिए?
आज जरूरत इस बात की है कि हम सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे हर प्रोपेगेंडा पर आंख बंद करके यकीन न करें। तहकीक करें। सोर्स देखें। पूछें कि यह खबर किसका फायदा कर रही है - इस्लाम का या ज़ायोनिस्ट निजाम का?
हमें मक्का-ए-मोअज्जमा की हुरमत की हिफाजत भी करनी है और मस्जिद-ए-अक्सा की आजादी की जद्दोजहद को भी नहीं भूलना है। दोनों हमारे दिल में हैं। जो हमें इनमें से एक को चुनने के लिए कहे, समझ लो वह दुश्मन का एजेंट है।
अल्लाह हरम-ए-पाक की हिफाजत फरमाए और उम्मत को अंदर के मुनाफिकीन और बाहर के ज़ायोनिस्ट शैतानों की साजिशों से महफूज रखे। आमीन।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 16,2026
#SaveMakkah #Ansarullah #PalestineSupport #ExposeZionistPlot #IslamUnderAttack #DeepStateExposed #MakkahConspiracy #TruthOfAnsarullah #MuslimUnity #StandWithPalestine