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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Friday, 9 October 2026

सीधे बैलिस्टिक मिसाइल और सुसाइड ड्रोन से हमला करेंगे!' - सऊदी में पाकिस्तानी फौज की तैनाती पर अंसारुल्लाह की पाकिस्तान को खुली चेतावनी

सीधे बैलिस्टिक मिसाइल और सुसाइड ड्रोन से हमला करेंगे!' - सऊदी में पाकिस्तानी फौज की तैनाती पर अंसारुल्लाह की पाकिस्तान को खुली चेतावनी
-Friday World Oct 9,2026 
मध्य-पूर्व का रणक्षेत्र एक बार फिर तेज़ी से बदल रहा है। सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैनिकों और फाइटर जेट्स की तैनाती की खबरों के बीच यमन के अंसारुल्लाह (हूती) आंदोलन ने पाकिस्तान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। यह चेतावनी सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि मिसाइल और ड्रोन हमलों की सीधी धमकी है।

अंसारुल्लाह ने क्या कहा?

अंसारुल्लाह के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने CNN-News18 और एक इराकी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, "अल्लाह की कसम, अगर तुर्की और पाकिस्तान इस युद्ध में शामिल हुए, तो हम उन्हें लोहे के हाथ (iron fist) से कुचल देंगे।"

उन्होंने साफ कहा कि यदि कोई भी विदेशी सेना, चाहे वह पाकिस्तानी ही क्यों न हो, सऊदी अरब की तरफ से यमन के खिलाफ मोर्चे पर खड़ी होती है, तो उसे यमनी संप्रभुता पर सीधा हमला माना जाएगा। इसका जवाब बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों के बड़े हमलों से दिया जाएगा।

बुखैती ने कहा कि उनका निशाना सरकारें होंगी, पाकिस्तानी और तुर्की की आवाम नहीं, क्योंकि वहां की जनता में यमन के लिए हमदर्दी है।

पाकिस्तान की तैनाती और मक्का पैक्ट

यह पूरा विवाद 7 अगस्त 2026 को साइन हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट (MJDA) के बाद शुरू हुआ है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए इस समझौते में कहा गया है कि किसी एक पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा।

5 अक्टूबर को रियाद में हुई इमरजेंसी बैठक में इस पैक्ट को एक्टिवेट कर दिया गया। अल जजीरा और गल्फ मीडिया के मुताबिक, तीनों देशों ने सऊदी अरब में तेजी से सेना तैनात करने पर सहमति दी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने 8,000 सैनिक और JF-17 लड़ाकू विमानों की एक स्क्वाड्रन सऊदी अरब में भेजी है और पाकिस्तानी जेट्स यमन में हूती ठिकानों पर बमबारी में शामिल हैं। हालांकि पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इस रिपोर्ट का खंडन किया है। वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 29 सितंबर को मदीना में पैगंबर मस्जिद के पावर स्टेशन पर हूती ड्रोन हमले की निंदा की थी।

सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ऑपरेशन 'Dawn of Yemen' में 100 फाइटर जेट्स से 324 हाई-वैल्यू टारगेट्स पर हमला किया गया है।

रियाल के लिए खूनी खेल?

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान आर्थिक तंगी के कारण यह कदम उठा रहा है। सऊदी अरब से मिलने वाले रियाल और डॉलर के बदले यमन युद्ध में कूदना पाकिस्तान के लिए दोहरा खतरा है।

पहला खतरा सैन्य स्तर पर। 6 और 7 अक्टूबर को हूतियों ने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आभा एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसमें 3 लोगों की मौत और 36 लोग घायल हुए, जिनमें एक पाकिस्तानी नागरिक भी शामिल था। हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने एयरलाइंस को चेतावनी दी है कि सऊदी एयरस्पेस अब युद्ध क्षेत्र है।

यदि पाकिस्तानी सैनिक सऊदी बेस पर तैनात हैं, तो वे सीधे हूती मिसाइलों की रेंज में होंगे।

ईरान से रिश्ते बिगड़ने का डर

दूसरा और बड़ा खतरा कूटनीतिक है। हूतियों को ईरान का मजबूत वैचारिक और सैन्य समर्थन प्राप्त है। पाकिस्तान की ईरान के साथ 900 किमी लंबी सीमा है और बलूचिस्तान में पहले से ही अशांति है।

2015 में जब सऊदी ने पाकिस्तान से यमन में सेना मांगी थी, तो पाकिस्तानी संसद ने मना कर दिया था ताकि ईरान से रिश्ते न बिगड़ें। अब यदि पाकिस्तान हूतियों पर बमबारी करता है, तो तेहरान इसे दुश्मनी मानेगा। इससे पाकिस्तान का अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता का जो प्रयास चल रहा है, वह भी खत्म हो जाएगा।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि मक्का पैक्ट को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान सिर्फ लॉजिस्टिक सपोर्ट तक सीमित रहेगा, सीधे बमबारी से बचेगा।


रियाद से मिलने वाले पैसों के लिए यमन की पहाड़ियों में अपने सैनिकों की बलि चढ़ाना और अपने पड़ोसी ईरान से दुश्मनी मोल लेना पाकिस्तान के लिए एक नया मोर्चा खोलने जैसा होगा। सवाल यह है कि क्या इस्लामाबाद रियाल के लालच में खुद को एक ऐसे युद्ध में झोंक देगा, जहां 11 साल से सऊदी गठबंधन भी जीत नहीं पाया है?

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 9,2026 

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