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Sunday, 18 October 2026

चीन की सोने की खरीद: क्या अमेरिका से टकराव की तैयारी चल रही है?

चीन की सोने की खरीद: क्या अमेरिका से टकराव की तैयारी चल रही है?
-Friday World Oct 18,2026 
चीन लंबे समय से दूरदर्शिता के साथ योजना बनाता आया है। वह धीरे-धीरे ऐसे कदम उठाता है जिससे उसे किसी पर निर्भर न रहना पड़े। हाल के वर्षों में उसने सोने की भारी खरीद शुरू कर दी है। यह महज आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम लगता है।

२०२२ में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी सेंट्रल बैंक की विदेश में जमा लगभग ३०० अरब डॉलर की संपत्ति जब्त कर ली थी। इस घटना ने पूरी दुनिया को एक सबक सिखाया—विदेश में रखी संपत्ति कितनी जल्दी हाथ से निकल सकती है। चीन ने इस घटना से सीख ली और सोने की खरीद तेज कर दी। सोना ऐसा परिसंपत्ति है जिसका आसानी से नाश नहीं होता, वह कहीं भी और कभी भी काम आ सकता है। यह जोखिम प्रबंधन का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) स्थित कॉमर्ज बैंक के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख थू-बैन-गुयेन का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की संपत्ति जब्त होने से चीन सतर्क हो गया है। वह जो कर रहा है, उसे वे जोखिम प्रबंधन के रूप में देखते हैं।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने सितंबर में लगातार २३वें महीने भी सोने की खरीद जारी रखी। उस महीने उसने २३ टन सोना खरीदा, जो एक माह में उसकी सबसे बड़ी खरीद में से एक रही। इस खरीद के बाद चीन का सोने का भंडार लगभग २,४१० टन हो गया। अक्टूबर २०२३ के बाद यह उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद थी।

विश्लेषक इस प्रवृत्ति को देखकर अनुमान लगा रहे हैं कि चीन अमेरिका के साथ संभावित टकराव के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। यदि टकराव होता है तो अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश उसकी अन्य संपत्तियों पर कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन सोना उसके अपने भंडारों में सुरक्षित रहेगा। इससे अतिरिक्त मुश्किलें कम होंगी।

बात सीधी है—चीन को यकीन हो चला है कि अमेरिका के साथ टकराव की संभावना बनी हुई है, इसलिए वह पहले से मजबूत नींव तैयार कर रहा है। सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता और रणनीतिक सुरक्षा का प्रतीक बन गया है। चीन की यह चाल विश्व अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति दोनों पर गहरा असर डाल सकती है। आने वाले समय में सोने की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा व्यवस्था पर भी इसके प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

चीन की यह रणनीति बताती है कि वह भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए तैयार रहना चाहता है। सोने का बढ़ता भंडार उसकी आर्थिक ताकत और आत्मनिर्भरता को और मजबूत बना रहा है।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 18,2026 


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